सूरत के न्यू सिविल अस्पताल में प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. हर्ष पांड्या की मौत के मामले में प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जांच समिति की रिपोर्ट में रैगिंग और कथित मानसिक उत्पीड़न से जुड़े तथ्य सामने आए हैं। जिसके बाद चार सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को छह महीने के लिए सस्पेंड कर दिया गया है।
रविवार को हॉस्टल में डॉक्टर को मृत पाया गया
डॉ. हर्ष पांड्या न्यू सिविल अस्पताल में प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टर थे। रविवार सुबह उनकी इमरजेंसी ड्यूटी थी, लेकिन तय समय तक ड्यूटी पर नहीं पहुंचने और फोन का जवाब नहीं देने पर उनके साथी डॉक्टरों को चिंता हुई। जिसके बाद कुछ डॉक्टर हॉस्टल में उनके कमरे पर पहुंचे। काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बावजूद अंदर से कोई जवाब नहीं मिली। स्थिति को देखते हुए सुरक्षा कर्मचारियों और अन्य डॉक्टरों की मौजूदगी में कमरे का दरवाजा खोला गया। जहां अंदर डॉ. हर्ष मृत अवस्था में मिले।
घटना की सूचना तुरंत अस्पताल प्रशासन और पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही खटोदरा पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल का पंचनामा कर कमरे की तलाशी ली। प्रारंभिक जांच में पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।
हाईलेवल कमेटी ने की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर जांच के लिए कमेटी गठित की गई। समिति ने हॉस्टल में रहने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए। जांच का मुख्य फोकस रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न और डॉ. हर्ष के साथ कथित व्यवहार से जुड़े आरोपों पर रहा। डॉ. हर्ष के पिता डॉ. सुभाष पांड्या ने भी आरोप लगाया था कि उनके बेटे को सीनियर डॉक्टरों द्वारा परेशान किया जा रहा था। समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने चार डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
चार सीनियर डॉक्टरों पर हुई कार्रवाई
निलंबित किए गए डॉक्टरों में डॉ. निराली वसावे, डॉ. अनुज माहेश्वरी, डॉ. हिना भूत और डॉ. दीक्षिता सेसारियन शामिल हैं। प्रशासन के आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान चारों डॉक्टर क्लिनिकल सेवाओं, मरीजों की देखभाल और शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो सकेंगे। उन्हें हॉस्टल खाली करने के आदेश दिए गए हैं और निलंबन अवधि के दौरान हॉस्टल परिसर में प्रवेश पर रोक लगाई गई है।
पुलिस जांच में शामिल होगी रिपोर्ट
खटोदरा पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब जांच समिति की रिपोर्ट और सामने आए तथ्यों को पुलिस जांच का हिस्सा बनाया जाएगा। पुलिस यह पता लगाएगी कि कथित रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न में किन लोगों की भूमिका थी और घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलू क्या हैं।
रैगिंग पर प्रशासन का सख्त रुख
अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल संस्थानों में रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उपलब्ध सबूतों और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
