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Eid 2026: ये है लखनऊ की सबसे बड़ी मस्जिद, जानें कब और किसने बनवाई

Eid 2026: ईद 20 मार्च को होगी या 21 मार्च को यह संशय अभी खत्म नहीं हुआ है। लखनऊ में ईद का चांद दिखने की टाइमिंग क्या होगी, उससे पहले जान लीजिए कि लखनऊ की सबसे बड़ी मस्जिद का नाम क्या है और इसे किसने व कब बनवाया था।

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लखनऊ की सबसे बड़ी मस्जिद का नाम क्या है

Eid 2026: रमजान का पाक महीना अब पूरा होने को है। ईद को लेकर अब भी संशय है कि इस बार ईद 20 को होगी या 21 मार्च 2026 को। ईद का चांद कब निकलेगा और किस दिन ईद मनाई जाएगी इस पर भी बात करेंगे। लेकिन उससे पहले इस आर्टिकल में जानते हैं नवाबों के शहर लखनऊ की सबसे बड़ी मस्जिद कहां है और उसका नाम क्या है? इस मस्जिद को कब बनाया गया था, किसने इस मस्जिद का निर्माण कराया था? चलिए जानते हैं -

लखनऊ की सबसे बड़ी मस्जिद

लखनऊ की सबसे बड़ी मस्जिद आसफी मस्जिद (आसिफी मस्जिद) को माना जाता है। यह मस्जिद लखनऊ के मशहूर बड़ा इमामबाड़ा में मौजूद है। यह इतनी बड़ी और भव्य है कि इसे देखकर ही इसकी भव्यता का एहसास होता है। बता दें कि बड़ा इमामबाड़ा और सबसे बड़ी आसिफी मस्जिद लखनऊ के केंद्र में मौजूद है। यह भव्य मस्जिद अपने पिल्लरों और डोम के आर्किटेक्चर के लिए जानी जाती है।

rumy darwaja

इमामबाड़ा के बाहर बना रूमी दरवाजा

लखनऊ ईद का चांद कब निकलेगा, टाइमिंग क्या है?

लखनऊ में कल यानी गुरुवार 19 मार्च को ईद का चांद दिखने की संभावना न के बराबर है। यानी लखनऊ में 20 मार्च को ईद का पर्व नहीं मनाया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि 20 मार्च को लखनऊ में ईद का चांद दिखे। शुक्रवार 20 मार्च को शाम 7 बजे के करीब चंद्रोदय हो सकता है, जो 8 बजे तक आसमान में दिखेगा। अगर 20 मार्च को चांद दिखेगा तो शनिवार 21 मार्च को लखनऊ में ईद मनाई जाएगी। 21 मार्च को यहां का नजारा ही कुछ और होगा।

किसने और कब बनवाई थी आसिफी मस्जिद

आसिफी मस्जिद को 1780-1784 में नवाब आसफ-उद-दौला ने बनवाया था। लखनऊ में यह मस्जिद मुगल काल का बड़ा लैंडमार्क है। अकाल के दौरान लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस मस्जिद का निर्माण करवाया गया था। यह दर्शाता है कि नवाब अपनी जनता से कितना लगाव रखते थे और साथ ही चाहते थे कि वह आत्मसम्मान से कमाई करके अपनी रोजी रोटी चलाएं।

आसिफी मस्जिद लखनऊ में शिया मुस्लिम समुदाय के लिए बड़ा धार्मिक स्थान है। माना जाता है कि यह मस्जिद लखनऊ की सबसे बड़ी मस्जिद है। आसिफी मस्जिद का लखनऊ में काफी बड़ा रुतबा है, लेकिन लखनऊ की जामा मस्जिद भी काफी बड़ी और मशहूर है।

इमामबाड़ा प्रांगण में आसिफी मस्जिद के साथ ही भूल-भुलैया और बावली भी, जिसमें हमेशा पानी रहता था। इमामबाड़े में एक विशाल, गुंबदाकार केंद्रीय कक्ष है, जिसमें आसफ-उद-दौला की कब्र है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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