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दिल्ली: क्या था तरुण कुमार हत्या केस, जिसने उत्तम नगर को बना दिया सांप्रदायिक दंगा संभावित क्षेत्र? ईद पर गली-गली में पुलिस

Delhi Uttam Nagar Eid News: 4 मार्च को पानी से भरा गुब्बारा फेंकने को लेकर दो पक्षों के बीच झगड़ा हो गया था। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच हाथापाई हो गई, जिसमें 26 वर्षीय तरुण बुटोलिया की मौत हो गई।

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दिल्ली: क्या था तरुण कुमार हत्या केस, जिसने उत्तम नगर को बना दिया सांप्रदायिक संभावित क्षेत्र?

Tarun Kumar Murder Case: दिल्ली के उत्तम नगर में रहने वाले मुसलमानों ने शनिवार को ईद-उल-फितर के मौके पर नमाज अदा कर पाने के बाद पुलिस पर फूलों की वर्षा की। दरअसल, उन्हें हालिया सांप्रदायिक झड़पों के बाद धमकी मिल रही थी कि उनके साथ खून की होली खेली जाएगी। उत्तम नगर में इस महीने की शुरुआत में होली के दौरान पानी के गुब्बारे को लेकर हुई झड़प में 26 वर्षीय एक युवक की मौत के बाद से तनाव बना हुआ है।

आखिर क्या है वह मामला जिसके बाद गली गली में पुलिस का पहरा है और कड़ी सुरक्षा के बीच ईद मनाई जा रही है। जानते हैं कि होली के दिन क्या हुआ था?

दरअसल, 4 मार्च को पानी से भरा गुब्बारा फेंकने को लेकर दो पक्षों के बीच झगड़ा हो गया था। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच हाथापाई हो गई, जिसमें 26 वर्षीय तरुण बुटोलिया की मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो नाबालिगों को भी हिरासत में लिया गया है। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव बना हुआ है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

'15–20 लोगों ने मेरे बेटे के सिर पर लाठियों और बैट से वार किया'

मृतक तरुण के पिता मेमराज ने उस दिन की घटना को याद करते हुए बताया कि घर की दूसरी मंजिल पर खड़ी 6–7 साल की एक बच्ची के हाथ से गलती से पानी से भरा एक गुब्बारा नीचे गिर गया। इस दौरान, गली से गुजर रही एक मुस्लिम महिला पर थोड़ा पानी गिर गया, जिसके बाद महिला ने हंगामा करना शुरू कर दिया।

उन्होंने आगे बताया, 'मेरे चाचा और मेरे छोटे भाई रमेश—दोनों ने उस महिला से माफी मांगी। लेकिन वह नहीं मानी और चिल्लाने लगी, और अपने परिवार के लोगों को इकट्ठा कर लिया। उनके हाथों में लाठियां, लोहे की रॉड वगैरह थीं। जैसे ही वे आए, उन्होंने हम पर हमला कर दिया।'

इस घटना में, तरुण के पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को गंभीर चोटें आईं। पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों के कुल 8 लोग घायल हुए।

परिवार का कहना है कि जब यह झगड़ा हुआ, तब तरुण घर पर मौजूद नहीं था। वह अपने दोस्तों के साथ होली खेलने के लिए बाहर गया हुआ था।

'वह जमीन पर पड़ा हुआ था...'

मेमराज (तरुण के पिता) ने कहा, 'मेरा बेटा अपने दोस्तों के साथ होली खेलने गया हुआ था। उसे तो यह भी नहीं पता था कि घर पर क्या हुआ है। जैसे ही मेरा बेटा घर लौटा, 15–20 लोगों ने लोहे की रॉड और बैट से उसके सिर पर वार कर दिया। हमें तो यह भी नहीं पता चला कि उस पर हमला हुआ है। मेरे चाचा का बेटा मुझे बुलाने आया। जब मैंने उसे देखा, तो वह वहीं जमीन पर पड़ा हुआ था। वह मंजर आज भी मेरी आंखों के सामने घूमता रहता है।'

मीडिया से बात करते हुए, DCP द्वारका कुशल पाल सिंह ने बताया, '4 तारीख की रात करीब 11 बजे हमें एक PCR कॉल मिली, जिसमें बताया गया कि एक पड़ोसी ने मेरे चाचा के सिर पर चोट पहुंचाई है। हमारी पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। वहां पहुंचने पर पता चला कि गुब्बारा फेंकने की बात पर अलग-अलग समुदायों के दो पक्षों के बीच झगड़ा हो गया था।'

'हम पर लगाए गए आरोप झूठे हैं'

10 मार्च को, आरोपी परिवार की एक सदस्य ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और अपने परिवार पर लगाए गए सभी आरोपों को झूठा बताया। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'यह दो परिवारों के बीच का मामला है, जिसे बजरंग दल ने हिंदू-मुस्लिम मुद्दा बना दिया है। हम पर लगाया जा रहा हत्या का आरोप पूरी तरह से झूठा है। सभी लड़के नशे की हालत में आए थे। यह उनकी अपनी ही लाठी थी जो तरुण के सिर पर लगी।'

पुलिस ने इस मामले में SC/ST एक्ट के साथ-साथ हत्या से जुड़ी धाराएं भी लगाई हैं। द क्विंट की एक रिपोर्ट में JJ कॉलोनी के स्थानीय लोगों से बात की गई, जिन्होंने कहा कि यह दो परिवारों के बीच का मामला है। वसीम खान कहते हैं, 'यह रंगों को लेकर कोई झगड़ा नहीं है। यह उनके बीच का एक पुराना विवाद है। उनके बीच पहले भी झड़पें हो चुकी हैं। कम से कम तीन घटनाओं की पुष्टि हुई है। बात यह है कि दोनों मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं, बस अलग-अलग समुदायों से ताल्लुक रखते हैं।'

हालांकि, तरुण के पिता ने किसी भी पिछले विवाद से इनकार किया है। उन्होंने कहा, 'उनके साथ हमारी पहले कोई घटना नहीं हुई थी। हमने उनसे बात भी नहीं की थी। हम सामान्य रूप से रहते थे। हम अपने घर आते-जाते रहते थे। उनके साथ हमारा कोई मेल-जोल नहीं था। उनके साथ हमारा कोई झगड़ा नहीं था।'

लेकिन पुलिस का कहना है कि दोनों परिवार एक-दूसरे को सालों से जानते हैं और उनके बीच पहले भी विवाद हो चुके हैं। DCP द्वारका कुशल पाल सिंह ने कहा था, 'दोनों परिवार एक-दूसरे को करीब 50 साल से जानते हैं। ये मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं। पहले ये राजेंद्र नगर की झुग्गियों में रहते थे। 2004 के बाद ये यहां आकर बस गए। पूछताछ के दौरान यह भी पता चला कि पड़ोसियों की तरह, पहले इनके बीच पार्किंग को लेकर झगड़े होते थे। लेकिन यह सांप्रदायिक नहीं था।'

'हम गजवा-ए-हिंद नहीं, भगवा-ए-हिंद बनाएंगे'

इस घटना के बाद से, हिंदू संगठनों के सदस्य तरुण के घर आ-जा रहे हैं। 12 मार्च को, बिट्टू बजरंगी, इंटरनेशनल हिंदू सेना और कई दक्षिणपंथी संगठनों के सदस्यों के साथ, तरुण के घर पहुंचे और भड़काऊ भाषण दिए।

तरुण के परिवार से बात करते हुए एक साध्वी ने कहा, 'हमें उनके (आरोपियों के) घरों में घुसना होगा। जब तक हम ऐसा नहीं करेंगे, वे ऐसा करते रहेंगे। मैं हर हिंदू भाई से कहना चाहूंगी कि जिस तरह आप बड़े-बड़े सेलिब्रिटीज के आने पर भीड़ में इकट्ठा होते हैं, उसी तरह यहां भी इकट्ठा हों।'

इंटरनेशनल हिंदू सेना के स्वामी संतोष आनंद ने तरुण के घर के बाहर एक पार्क में लोगों को संबोधित करते हुए कहा, 'अगर आज भी आप नहीं जागे, तो आपको जगाने कोई नहीं आएगा। हमारा संदेश है—हिंदू भाइयों, जागो, खुद को पहचानो और एकजुट हो जाओ।'

'जिहादी मानसिकता वाले इन लोगों का सिर्फ एक ही मकसद है—भविष्य में 'गजवा-ए-हिंद' कैसे स्थापित किया जाए। लेकिन हर किसी को यह प्रण लेना होगा—'गजवा-ए-हिंद' नहीं, हम तो 'भगवा-ए-हिंद' बनाएंगे।'

आरोपी के घर पर बुलडोजर की कार्रवाई

घटना के चार दिन बाद, 8 मार्च को, दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अतिक्रमण बताते हुए एक आरोपी के घर के एक हिस्से को बुलडोजर से गिरा दिया। आरोपी के परिवार के एक सदस्य ने कहा, 'सिर्फ एक पक्ष की बात सुनी जा रही है, दूसरे पक्ष की तरफ देखा भी नहीं जा रहा। घरों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं। दस्तावेज, नकद, जेवर—सब कुछ तबाह हो गया है। हमारे घर में शादी थी, उसकी तैयारियां चल रही थीं। हम बेघर हो गए हैं। अब हम कहां जाएंगे?' इस विवाद के बीच, 12 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपियों के घरों पर बुलडोजर की कार्रवाई पर एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी है।

दिल्ली पुलिस ने ईद के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। इसके तहत, स्थानीय पुलिस और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के जवानों के साथ-साथ दंगा-रोधी वाहन वज्र और लॉजिस्टिक्स वाहन विक्रांत को भी तैनात किया गया है। ये जवान हर गली के मुहाने पर बैरिकेड लगाकर पहरा दे रहे हैं।

गुरुवार को यह मामला अदालत तक पहुंच गया। दिल्ली हाई कोर्ट ने उत्तम नगर की पुलिस और नागरिक प्रशासन को निर्देश दिया कि वे ईद के जश्न के दौरान सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएं। अदालत ने जोर देकर कहा कि यह त्योहार खुशी मनाने का है, और अधिकारियों का यह फर्ज है कि वे किसी भी अप्रिय घटना को होने से रोकें।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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