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जब कोरोना से जूझ रही थी दुनिया, तब भी दिल्ली में दहेज के कारण मारी जा रही थीं बेटियां, देखें 5 साल के आंकड़ें

राजधानी दिल्ली में 2021 के बाद दहेज हत्या के मामलों में धीरे-धीरे कमी आई। साल 2022 में ऐसे 131 मामले दर्ज हुए,जो 2023 में घटकर 115, 2024 में 109 और 2025 में 99 रह गए। इस साल यानी 2026 में 15 मई तक ऐसे 28 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

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दिल्ली दहेज हत्या।

कोरोना काल में लगाए गए लॉकडाउन और लंबे सामाजिक अलगाव का असर महिलाओं की सुरक्षा पर भी देखा गया। इस काल में राजधानी दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा और दहेज हत्याओं के मामलों में अप्रत्याशित उछाल देखी गई है। दिल्ली में साल 2021 में दहेज संबंधी मौत के 141 मामले दर्ज किए गए थे। ये पिछले पांच सालों में सबसे अधिक थे।

इस साल अभी तक दर्ज किए गए दहेज हत्या के 28 मामले

समाचार एजेंसी पीटीआई के आंकड़ों से पता चला है कि राजधानी दिल्ली में 2021 के बाद दहेज हत्या के मामलों में धीरे-धीरे कमी आई। साल 2022 में ऐसे 131 मामले दर्ज हुए,जो 2023 में घटकर 115, 2024 में 109 और 2025 में 99 रह गए। इस साल यानी 2026 में 15 मई तक ऐसे 28 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

इन मामलों में गिरफ्तारियों का आंकड़ा भी कुछ ऐसे ही हालातों को दिखाता है। वर्ष 2021 में दहेज हत्या के मामलों में 210 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। यह संख्या 2022 में 198, 2023 में 183, 2024 में 181 और 2025 में 163 रही। इस वर्ष 15 मई तक 28 मामलों में 33 लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

2021 की तुलना में अभी तक हर साल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भले ही दहेज से जुड़ी मौतों में कमी दर्ज की गई है,लेकिन यह समस्या अब भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों की जांच अत्यंत संवेदनशीलता के साथ की जाती है क्योंकि इनका प्रभाव सीधे पीड़ित परिवारों पर पड़ता है।

घरेलू उत्पीड़न से जुड़े मामलों की तस्वीर भी चिंताजनक

वहीं घरेलू उत्पीड़न से जुड़े मामलों को लेकर भी एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के दिल्ली में 2021 में 4,731 मामले दर्ज हुए थे। यह संख्या 2022 में बढ़कर 4,901 हो गई, जबकि 2023 में घटकर 4,236 रह गई। इसके बाद 2024 में फिर इसमें वृद्धि दर्ज की गई। उस साल इसमें 4,647 और 2025 में 4,426 मामले दर्ज किए गए। वहीं, वर्ष 2026 में 15 मई तक ऐसे 1,688 मामले सामने आ चुके हैं।

आंकड़ों के अनुसार, इन मामलों में पुलिस की कार्रवाई भी तेज हुई है। वर्ष 2021 में 825 आरोप-पत्र दाखिल किए गए थे, जबकि 2025 तक यह संख्या बढ़कर 1,645 पहुंच गई। इस वर्ष 15 मई तक 563 आरोप-पत्र दाखिल किए जा चुके हैं, जो घरेलू हिंसा के मामलों में अभियोजन को मजबूत करने के प्रयासों को दर्शाता है।

दहेज निषेध अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन यह समस्या लगातार बनी हुई है। दिल्ली में 2021 में 16, 2022 में 13 और 2023, 2024 तथा 2025 में 16-16 मामले दर्ज किए गए। इस वर्ष अब तक ऐसे नौ मामले सामने आए हैं।

महामारी के दौरान इन वजहों से सामनें आईं ऐसी घटनाएं

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, महामारी के दौरान आर्थिक संकट, रोजगार छूटने और लंबे समय तक घरों में रहने जैसी परिस्थितियों ने घरेलू तनाव बढ़ाया, जिससे महिलाओं के खिलाफ दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के मामलों में वृद्धि देखने को मिली। अधिकारियों का कहना है कि दहेज और घरेलू हिंसा जैसे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए कानून के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक सहयोग भी बेहद जरूरी है।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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