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दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कमर्शियल वाहनों पर ECC चार्ज बढ़ा, अब एंट्री होगी और महंगी

Commercial vehicles entry fee Delhi: सरकार ने सिर्फ एक बार चार्ज बढ़ाने तक ही इस फैसले को सीमित नहीं रखा है, बल्कि हर साल इसमें 5% की बढ़ोतरी का भी प्रावधान किया गया है।

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दिल्ली में एंट्री हुई महंगी: प्रदूषण रोकने के लिए कमर्शियल वाहनों पर ECC चार्ज बढ़ा

Delhi ECC charge hike: राजधानी दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब राजधानी में प्रवेश करने वाले कमर्शियल वाहनों को ज्यादा Environmental Compensation Charge (ECC) देना होगा। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और Commission for Air Quality Management (CAQM) की सिफारिशों के आधार पर लागू किया गया है।

नई दरें कितनी बदलीं?

नई दरों के तहत बदलाव भी साफ तौर पर सामने आए हैं। दिल्ली सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, कैटेगरी 2 (लाइट ड्यूटी वाहन) और कैटेगरी 3 (2-एक्सल ट्रक) के लिए ECC पहले ₹1400 था, जिसे अब बढ़ाकर ₹2000 कर दिया गया है। वहीं कैटेगरी 4 (3-एक्सल ट्रक) और कैटेगरी 5 (4-एक्सल और उससे अधिक) के लिए यह चार्ज पहले ₹2600 था, जो अब ₹4000 हो गया है। यानी अब प्रदूषण फैलाने वाले भारी वाहनों को दिल्ली में एंट्री के लिए पहले से ज्यादा कीमत चुकानी होगी।

हर साल बढ़ेगा चार्ज

सरकार ने सिर्फ एक बार चार्ज बढ़ाने तक ही इस फैसले को सीमित नहीं रखा है, बल्कि हर साल इसमें 5% की बढ़ोतरी का भी प्रावधान किया गया है। यह बढ़ोतरी हर साल अप्रैल से लागू होगी और इसे लगभग 10 रुपये के आसपास राउंड ऑफ किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की मुहर

इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी भी मिल चुकी है। कोर्ट ने इसे उचित, न्यायसंगत और जरूरी कदम बताया है। साथ ही स्पष्ट किया है कि जो भारी वाहन दिल्ली में जरूरी काम के लिए नहीं आ रहे हैं, उन्हें शहर के बाहर बने एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि प्रदूषण और ट्रैफिक दोनों को कम किया जा सके।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली अब अनावश्यक वाहन प्रदूषण का बोझ नहीं उठा सकती और ECC बढ़ाकर साफ संदेश दिया गया है कि प्रदूषण फैलाने वालों को अब ज्यादा कीमत चुकानी होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सिर्फ राजस्व बढ़ाने का कदम नहीं, बल्कि एक सख्त पर्यावरणीय चेतावनी है, खासतौर पर डीजल वाहनों को हतोत्साहित करने के लिए यह फैसला अहम माना जा रहा है।

दरअसल, साल 2015 में तय किया गया ECC अब प्रभावी नहीं रह गया था। बढ़ती महंगाई और प्रदूषण के स्तर को देखते हुए इसे अपडेट करना जरूरी हो गया था। इस कदम से ट्रांसपोर्टर्स को कम प्रदूषण वाले विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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