संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के इतर आयोजित 'पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म समिट' (Partners for Multilateralism Summit) में भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपना पक्ष मजबूती से रखा है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था भारी दबाव में है, और ऐसे दौर में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना को कमजोर होने से बचाने के लिए बहुपक्षवाद को मजबूत बेहद करना जरूरी है। जयशंकर ने समिट की पहल के लिए राष्ट्रपति एंटोनियो कोस्टा का आभार जताया। उन्होंने कहा कि भारत इस पहल में सह-प्रायोजक के तौर पर शामिल होकर खुश है।
विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में दुनिया में शक्ति और प्रभाव का संतुलन धीरे-धीरे बदल रहा था। यह एक स्वाभाविक संरचनात्मक बदलाव था, लेकिन अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और वास्तविक संघर्षों ने इस बदलाव को अलग दिशा दे दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मूल भावना ही समाप्त हो जाएगी।
शांति से लेकर AI तक सामूहिक प्रयास जरूरी
विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि बहुपक्षवाद सिर्फ कागजी वादों या शब्दों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे जमीन पर उतरना होगा। उन्होंने जिन प्रमुख क्षेत्रों में सामूहिक प्रयासों की वकालत की, उनमें अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई, जलवायु न्याय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), विकास वित्त, आतंकवाद से मुकाबला, सप्लाई चेन, आपदा प्रबंधन और भविष्य की महामारियों से निपटने जैसे मुद्दों शामिल हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया ने अब तक जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे देशों के सामूहिक प्रयासों का नतीजा हैं। इसलिए मौजूदा उपलब्धियों को सुरक्षित रखने के साथ बेहतर वैश्विक व्यवस्था बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा।
4F संकट और सप्लाई चेन का मुद्दा उठाया
वैश्विक संकटों का जिक्र करते हुए जयशंकर ने '4F' संकट (Fuel, Food, Fertilizer और Finance) पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे संकटों को अपने हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता और इनके समाधान के लिए समन्वित प्रयास जरूरी हैं। नई तकनीकों और क्षमताओं के विकास का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि इनके इस्तेमाल के लिए उचित नियम और सुरक्षा मानक तैयार करने जरूरी हैं। सप्लाई चेन को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन जगहों पर चोकपॉइंट्स, किसी एक देश का एकाधिकार या सप्लाई बाधित होने का खतरा है, वहां जोखिम को कम करने और स्रोतों में विविधता लाने को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
सुधारित बहुपक्षवाद पर जोर
जयशंकर ने कहा कि बहुपक्षवाद तभी सफल हो सकता है जब अंतरराष्ट्रीय कानून, नियमों और मानदंडों का पूरी तरह पालन किया जाए। उन्होंने सुधारित बहुपक्षवाद की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने ज्यादा भागीदारी वाली चर्चा और अधिक पारदर्शी निर्णय लेने की प्रक्रिया को समय की जरूरत बताया। जयशंकर के मुताबिक, ऐसी सुधार प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था में उम्मीद और भरोसा मजबूत कर सकती है और देशों के बीच मिलकर काम करने के संकल्प को भी आगे बढ़ा सकती है।
