विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक व्यवस्था में बढ़ते दबाव और भू-राजनीतिक तनाव के बीच बहुपक्षवाद को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है। न्यूयॉर्क में 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर आयोजित पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म समिट(Partners for Multilateralism Summit) में उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना को बनाए रखना बेहद जरूरी है। जयशंकर ने समिट की पहल के लिए राष्ट्रपति एंटोनियो कोस्टा का आभार जताया। उन्होंने कहा कि भारत इस पहल में सह-प्रायोजक के तौर पर शामिल होकर खुश है।
विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में दुनिया में शक्ति और प्रभाव का संतुलन धीरे-धीरे बदल रहा था। यह एक स्वाभाविक संरचनात्मक बदलाव था, लेकिन अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और वास्तविक संघर्षों ने इस प्रक्रिया को अलग दिशा दे दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन परिस्थितियों को नियंत्रित नहीं किया गया तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मूल भावना प्रभावित हो सकती है।
शांति से लेकर AI तक सामूहिक प्रयास जरूरी
जयशंकर ने कहा कि बहुपक्षवाद केवल बैठकों और बयानों तक सीमित नहीं होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई, जलवायु न्याय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), विकास वित्त, आतंकवाद से मुकाबला, सप्लाई चेन, आपदा प्रबंधन और भविष्य की महामारियों से निपटने जैसे मुद्दों के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
