Maharasthra News: महाराष्ट्र में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की संपत्तियों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में स्थित दाऊद की पुश्तैनी संपत्तियों को आखिरकार खरीदार मिल गए हैं। 2017 से अब तक चार बार नीलामी की कोशिशें नाकाम रहने के बाद, 5 मार्च 2026 को हुई केंद्र सरकार की नीलामी में दो बोलीदाताओं ने इन संपत्तियों को अपने नाम कर लिया।
मां के नाम पर दर्ज थी जमीन
यह नीलामी रत्नागिरी के खेड़ तालुका स्थित मुंबके गांव की चार खेती की जमीनों के लिए थी। ये तमाम संपत्तियां दाऊद की मां, अमीना बी के नाम पर सरकारी दस्तावेजों में दर्ज थीं। लंबे समय से इन जमीनों को 'स्मगलर्स एंड फॉरेन एक्सचेंज मैनिपुलेटर्स एक्ट' (SAFEMA) के तहत जब्त कर रखा गया था। सरकार का मुख्य उद्देश्य अपराधी गतिविधियों या तस्करी से अर्जित संपत्तियों को कुर्क कर समाज की मुख्यधारा में लाना था।
क्यों लगे 9 साल?
हैरानी की बात यह है कि 2017, 2020, 2024 और 2025 में भी इन जमीनों को बेचने की कोशिश हुई थी। नवंबर 2025 में तो सरकार ने बेस प्राइस में 30% तक की कटौती भी की थी, लेकिन डॉन के खौफ या कानूनी झमेलों के डर से कोई भी सामने नहीं आ रहा था। लेकिन इस बार, मुंबई के एक व्यक्ति ने एक प्लॉट खरीदा, जबकि दूसरे बोलीदाता ने बाकी तीन प्लॉट अपने नाम किए। सुरक्षा कारणों से फिलहाल खरीदारों की पहचान गुप्त रखी गई है।

दाउद के रत्नागिरी के 4 प्लॉट नीलाम हुए
कौड़ियों के दाम, फिर भी हुई जंग
रत्नागिरी के मुंबके गांव में स्थित भगोड़े डॉन दाऊद इब्राहिम की मां अमीना बी के नाम दर्ज इन पुश्तैनी संपत्तियों का सरकारी ब्यौरा काफी लंबा-चौड़ा है। इन जमीनों की रिजर्व प्राइस महज कुछ हजार रुपये से शुरू होकर 9 लाख तक रखी गई थी। नीलामी में शामिल सबसे बड़ी संपत्ति का क्षेत्रफल 10,420.51 वर्ग मीटर है और इसकी रिजर्व प्राइस 9,41,280 रुपये तय की गई थी। इसके अलावा, 8,953.55 वर्ग मीटर वाली दूसरी बड़ी कृषि भूमि की शुरुआती कीमत 8,08,770 रुपये रखी गई थी। वहीं, 2,240 वर्ग मीटर जमीन की रिजर्व प्राइस 2,33,430 रुपये और सबसे छोटे प्लॉट की कीमत महज 15,440 रुपये निर्धारित की गई थी। केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी ने नीलामी को सफल बनाने के लिए SAFEMA नियमों के तहत रिजर्व प्राइस में 15% से 30% तक की छूट देने का प्रावधान भी रखा था, जिससे खरीदारों के लिए यह डील आर्थिक रूप से आकर्षक हो गई। जिसकी रिजर्व प्राइस 9.41 लाख थी, उसे 10 लाख से भी अधिक की बोली लगाकर खरीदा गया। सफल बोलीदाताओं को अब अप्रैल 2026 तक पूरी रकम जमा करनी होगी, जिसके बाद उन्हें मालिकाना हक मिल जाएगा।
सरकार का कड़ा संदेश
यह नीलामी केवल जमीन की बिक्री नहीं, बल्कि अपराधियों के लिए एक सख्त संदेश है। इस घटना से यह बात और पुख्ता हो जाती है कि अपराध की कमाई से खड़ी की गई जागीर को देर-सबेर कानून अपने कब्जे में ले ही लेगा।
