ग्रेटर नोएडा इंजीनियर मौत के मामले में एक्शन; SIT गठित, हटाए गए नोएडा अथॉरिटी के CEO
- Edited by: Nilesh Dwivedi
- Updated Jan 19, 2026, 10:17 PM IST
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में घने कोहरे के बीच हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। एक अनियंत्रित कार के गहरे, पानी से भरे गड्ढे में गिरने से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं संज्ञान लेते हुए विशेष जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में SIT गठित
Greater Noida Software Engineer Death: घने कोहरे के चलते ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में एक कार चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा, जिसके चलते कार करीब 20 फीट से अधिक गहरे, पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। इस हादसे में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान चली गई। अब इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का खुद संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर घटना की विस्तृत जांच के लिए सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है।
इस SIT का नेतृत्व मेरठ के डिविजनल कमिश्नर करेंगे। टीम में उनके साथ मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक (ADG) और लोक निर्माण विभाग (PWD) के मुख्य अभियंता को भी शामिल किया गया है। SIT को पांच दिनों के अंदर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इसी के साथ, टीम बनने के बाद से नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) लोकेश एम को उनके पदों से हटाया गया, जिसकी जानकारी यूपी CMO ने दी। इस बीच, यह भी माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद घटनास्थल का दौरा कर सकते हैं। संभावित दौरे के दौरान मुख्यमंत्री पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दे सकते हैं और हर संभव सहायता का भरोसा दिला सकते हैं।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद खुलासा हुआ कि युवराज की मौत दम घुटने से हुई, वहीं हार्ट फेलियर/कार्डियक अरेस्ट को भी मौत का एक कारण बताया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पोस्टमॉर्टम से यह संकेत मिलता है कि कार्डियक अरेस्ट के चलते युवराज की जान गई। जिस बेसमेंट में युवराज की कार गिर गई थी, वहां पानी भरा हुआ था और बताया जा रहा है कि वह पानी बेहद ठंडा, लगभग बर्फ जैसा था। हादसे के बाद युवराज लंबे समय तक उसी ठंडे पानी में भीगा रहा। वह करीब दो घंटे तक पानी से घिरी अपनी कार पर खड़ा होकर मदद का इंतजार करता रहा। इस दौरान उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। पुलिस का कहना है कि अत्यधिक ठंड, लंबे समय तक ठंडे पानी के संपर्क में रहने और मानसिक दबाव के कारण उसकी हालत गंभीर हो गई। आशंका है कि मदद मिलने में देरी से युवराज घबरा गया और इसी घबराहट के बीच उसे कार्डियक अरेस्ट आया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
ड्यूटी से घर लौटते समय हुआ था हादसा
दुर्घटना स्थल पर लापरवाही और आवश्यक सुरक्षा इंतजामों के अभाव को लेकर स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने बताया कि इस मामले में दो रियल एस्टेट डेवलपर्स के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। मृतक की पहचान युवराज मेहता के रूप में हुई है, जो सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसायटी का निवासी था। वह गुरुग्राम की एक नामी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत था और शनिवार तड़के ड्यूटी से घर लौटते समय हादसे का शिकार हो गया।
शनिवार सुबह शव को बाहर निकाला गया
नॉलेज पार्क थाना पुलिस के अनुसार, शुक्रवार देर रात करीब 12:15 बजे सूचना मिली कि सेक्टर-150 के पास निर्माणाधीन इमारत के बेसमेंट के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में एक कार गिर गई है। इसके बाद तत्काल तलाशी अभियान शुरू किया गया। दमकल विभाग, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमों ने शनिवार सुबह शव को बाहर निकाला।
डिलीवरी एजेंट का आरोप
घटना के प्रत्यक्षदर्शी होने का दावा करने वाले एक डिलीवरी एजेंट मोनिंदर ने आरोप लगाया कि बचाव कार्य में काफी देरी हुई। उसने कहा कि यदि समय रहते प्रयास किए जाते, तो इंजीनियर की जान बचाई जा सकती थी। मोनिंदर के अनुसार, वह रात करीब 1:45 बजे घटनास्थल पर पहुंचा था, लेकिन ठंडे पानी और लोहे की सरियों की मौजूदगी के कारण बचावकर्मी गड्ढे में उतरने से हिचक रहे थे। उसने बताया कि उसने खुद कमर में रस्सी बांधकर पानी में उतरने का साहस किया और लगभग आधे घंटे तक कार और युवक को खोजने की कोशिश की।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने क्या बताया?
मोनिंदर का कहना है कि हादसे के बाद मेहता को कार की छत पर खड़े होकर मोबाइल की टॉर्च से मदद के लिए इशारे करते हुए देखा गया था। बाद में उसे बताया गया कि यदि सहायता दस मिनट पहले मिल जाती, तो उसकी जान बच सकती थी। उसने यह भी बताया कि इससे पहले उसी गड्ढे से स्थानीय लोगों ने एक ट्रक चालक को सुरक्षित बाहर निकाला था। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्रा ने लापरवाही से इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद दुखद है, लेकिन पुलिस और दमकल विभाग की टीमों ने बचाव के लिए हर संभव प्रयास किए। उनके अनुसार, क्रेन, सीढ़ी, अस्थायी नाव और सर्चलाइट की मदद ली गई, हालांकि अंधेरे और पानी की वजह से दृश्यता बेहद कम थी।
आए दिन होते रहे हादसे
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित परिवार की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच जारी है। सहायक पुलिस आयुक्त हेमंत उपाध्याय ने पुष्टि की कि दो रियल एस्टेट डेवलपर्स को आरोपी बनाया गया है। मृतक के पिता राज कुमार मेहता ने अपनी शिकायत में कहा कि स्थानीय निवासियों ने कई बार नोएडा प्रशासन से नाले के पास बैरिकेडिंग और रिफ्लेक्टर लगाने की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे आए दिन हादसे होते रहे।
लोगों ने निकाला कैंडल मार्च
रविवार शाम को स्थानीय लोगों ने युवराज मेहता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर कैंडल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और क्षेत्र के विकासकर्ताओं पर लापरवाही का आरोप लगाया। विरोध के बाद नोएडा प्रशासन ने मौके पर अवरोधक लगवा दिए। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में कोहरा और संभावित तेज रफ्तार को हादसे की वजह माना जा रहा है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
(इनपुट - भाषा)
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। शहर (Cities News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।