रस्सी छोटी थी या बचाव टीम को था जान का डर? सिस्टम की लापरवाही ने छीन ली युवराज मेहता की सांस!
- Edited by: शिशुपाल कुमार
- Updated Jan 19, 2026, 11:37 AM IST
ग्रेटर नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं। प्रशासन का कहना है कि गहरे और पानी से भरे गड्ढे तक पहुंचने के लिए रस्सियां, सीढ़ियां और अन्य उपकरण कम पड़ गए, साथ ही घने कोहरे और अंधेरे के कारण रेस्क्यू बेहद मुश्किल हो गया। वहीं, चश्मदीदों और परिजनों का आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिस और आपदा राहत टीमें ठंडे पानी और भीतर मौजूद मलबे के डर से गड्ढे में उतरने से कतराती रहीं।
मृतक इंजीनियर युवराज मेहता (फोटो- Times Now)
ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार देर रात एक दर्दनाक हादसे में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई। हैरानी की बात यह रही कि युवराज करीब 90 मिनट तक जिंदा रहे, अपनी डूबती कार की छत पर खड़े होकर मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन समय पर प्रभावी रेस्क्यू नहीं हो सका। इस घटना ने प्रशासनिक लापरवाही, निर्माण स्थलों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
50 फीट गहरा था गड्डा
नोएडा सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क में रहने वाले युवराज मेहता गुरुग्राम में नौकरी करते थे और हादसे के वक्त घर लौट रहे थे। घने कोहरे और कम दृश्यता के बीच उनकी मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा एक मोड़ पर अनियंत्रित होकर बिना बैरिकेड वाले नाले को पार करती हुई लगभग 50 फीट गहरे निर्माणाधीन गड्ढे में जा गिरी। पुलिस के अनुसार, मौके पर न तो चेतावनी बोर्ड लगे थे, न रिफ्लेक्टर और न ही कोई सुरक्षा घेरा।
लगाते रहे मदद की गुहार
हादसे के बावजूद युवराज ने हिम्मत नहीं हारी। वह किसी तरह कार की छत पर चढ़ गए और फोन कर मदद मांगने लगे। उनके पिता राजकुमार मेहता के मुताबिक, युवराज ने खुद फोन कर कहा था, “पापा, मुझे बचा लो।” ठंडे पानी से भरे गड्ढे में कार धीरे-धीरे डूबती जा रही थी और चारों ओर घना कोहरा छाया हुआ था।
अब प्रशासन दे रहा सफाई
सूचना मिलने पर पुलिस, फायर ब्रिगेड, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि गड्ढे की गहराई, पानी की मात्रा, ठंड और घने कोहरे के कारण रेस्क्यू में भारी दिक्कतें आईं। पुलिस के अनुसार, रस्सियां कम पड़ गईं, क्रेन और सीढ़ियां भी पर्याप्त नहीं रहीं और अंधेरे में पानी में उतरना खतरनाक माना गया। पुलिस के मुताबिक, दूरी और गहराई की वजह से कई बचाव की कोशिशें नाकाम रहीं। गड्ढे में फेंकी गई रस्सियां उस तक नहीं पहुंच पाईं। फायर ब्रिगेड ने क्रेन और सीढ़ियां लगाईं, लेकिन वे भी जरूरी गहराई तक नहीं पहुंच पाईं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि गड्ढा सड़क से काफी दूर था और गहरे पानी से भरा था, जिससे वहां पहुंचना बहुत मुश्किल था। HT की रिपोर्ट के अनुसार ग्रेटर नोएडा के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस हेमंत उपाध्याय ने कहा, "हमने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन निर्माणाधीन खाली प्लॉट में जमा पानी की गहराई की वजह से अंधेरे और घने कोहरे में उसे बचाना मुश्किल था। हमें डर था कि अगर कोई उसे बचाने के लिए पानी में उतरा तो और भी लोग घायल हो सकते हैं। यह हमारे लिए और भी बुरा हो सकता था।"
सवालों के घेरे में प्रशासन
मोनेंद्र, जो एक डिलीवरी एजेंट के तौर पर काम करते हैं और इस घटना के चश्मदीद गवाह हैं, ने बताया कि यह हादसा आधी रात के आसपास घने कोहरे के बीच हुआ और वह करीब 1.45 बजे मौके पर पहुंचे, उस समय तक युवराज मेहता अभी भी कार के अंदर फंसे हुए थे। मोनेंद्र ने रिपोर्टर्स को बताया, "लगभग एक घंटे पैंतालीस मिनट तक वह मदद के लिए गुहार लगाते रहे, कह रहे थे, 'प्लीज मुझे बचा लो, किसी भी तरह मुझे बचा लो'।" उनके मुताबिक, मौके पर मौजूद इमरजेंसी रिस्पॉन्डर्स ने ठंडे पानी और सतह के नीचे संभावित खतरों का हवाला देते हुए पानी में जाने से मना कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया, "पुलिस मौके पर मौजूद थी, साथ में SDRF (यूपी की स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) भी थी। फायर ब्रिगेड के लोग भी थे। लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की। वे कह रहे थे, 'पानी बहुत ठंडा है। हम अंदर नहीं जाएंगे। अंदर लोहे की रॉड हैं। हम नहीं जाएंगे'।"
जनता में भारी आक्रोश
इस घटना के बाद भारी जन आक्रोश देखने को मिला। मामले में निर्माण स्थल से जुड़े दो रियल एस्टेट समूहों-एमजेड विजटाउन प्लानर्स लिमिटेड और लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड- के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। दोनों कंपनियों ने अपनी जिम्मेदारी से इनकार किया है। वहीं नोएडा प्राधिकरण ने ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं और एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त कर दिया गया है।
युवराज की मौत से उठ रहे बचाव कार्यों पर सवाल
पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में आशंका है कि घने कोहरे के कारण युवराज मोड़ का सही अंदाजा नहीं लगा पाए और संभवतः वाहन की गति भी अधिक थी। बावजूद इसके, यह सवाल अब भी बना हुआ है कि अगर निर्माण स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा होती और रेस्क्यू तेजी से किया जाता, तो क्या एक युवा जान बचाई जा सकती थी। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों और लापरवाही की भयावह तस्वीर बनकर सामने आया है, जिसने एक परिवार से उसका इकलौता बेटा छीन लिया।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। शहर (Cities News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।