क्यों जानलेवा है दिल्ली की हवा? CAQM ने सुप्रीम कोर्ट में किया खुलासा; कीं 15 बड़ी सिफारिशें
- Edited by: Nishant Tiwari
- Updated Jan 21, 2026, 11:02 PM IST
दिल्ली-NCR में लगातार खराब होती वायु गुणवत्ता के पीछे सबसे बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं है। ऐसा वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया। CAQM ने रिपोर्टों के हवालों से बताया कि PM2.5 प्रदूषण में गाड़ियों की अहम भूमिका है। आयोग ने AQI सुधारने के लिए 15 दीर्घकालिक उपायों की सिफारिश भी की है। आइए विस्तार से जानते हैं।
CAQM ने प्रदूषण में गाड़ियों की बताई अहम भूमिका (फोटो: PTI)
CAQM on Delhi Pollution: दिल्ली NCR में हवा की गुणवत्ता का हाल भला किसे न पता होगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) रोजाना लाल-पीले रंग वाले खाकों में फेफड़ों के लिए खतरे को अंकों में बदल कर लिखता है। हरा खाका कभी कभार ही दिखाई देता है। सर्दी का मौसम शुरू होने के बाद दिल्ली की हवा जितने दिन ग्रीन जोन में रही होगी, उसे उंगलियों पर गिना जा सकता है। लेकिन क्या आपको ये बता है कि इस खराब हवा के पीछे सबसे बड़ा कारण क्या है? वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली NCR की खराब हवा के पीछे सबसे बड़ा कारण गाड़ियों के धुएं को बताया है। आयोग ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण के लिए सबसे अधिक जिम्मेदारी वाहनों से निकलने वाले धुएं की है। इसके साथ ही AQI में सुधार लाने के लिए आयोग ने 15 दीर्घकालिक उपायों की डीटेल्ड रूपरेखा भी अदालत के सामने रखी।
कैसे खतरनाक बनती है दिल्ली की हवा?
आयोग की ओर से न्यायालय में पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ को बताया कि 2015 से 2025 तक के अध्ययनों के विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली में PM2.5 (हवा में 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम डायमीटर के कण) की मौजूदगी के दो बड़े कारण हैं। पहला, NCR के भीतर होने वाला प्राथमिक उत्सर्जन, जिसमें सड़क की धूल और वाहनों से निकलने वाली गैसें शामिल हैं। दूसरा, वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी गैसों की रासायनिक प्रतिक्रिया से बनने वाले सेकेंड्री पार्टिकल। इन दोनों कारणों के प्रभाव से दिल्ली की हवा लगातार खतरनाक बनी रहती है, खासकर सर्दियों के मौसम में।
वाहनों पर नियंत्रण और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर जोर
वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए CAQM ने चरणबद्ध रणनीति अपनाने की सिफारिश की है। इसमें सबसे अहम कदम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सही समय पर हटाना बताया गया है। इसके साथ ही PUC 2.0 प्रणाली को मजबूत करने और रिमोट सेंसिंग तकनीक के जरिए सड़कों पर वाहनों की निगरानी की बात कही गई है। इसके अलावाआयोग ने मेट्रो, रीजनल रेल और RRTS नेटवर्क के विस्तार पर भी जोर दिया है ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता कम हो सके। मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब, रियल-टाइम पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम और सार्वजनिक परिवहन को भी योजना का अहम हिस्सा बताया गया है।
ई-वाहन और ट्रैफिक मैनेजमेंट होंगे अहम हथियार
सीएक्यूएम ने दिल्ली-एनसीआर में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने के लिए ईवी नीति में सुधार, चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन बढ़ाने और पुराने वाहनों को स्क्रैप करने पर अधिक प्रोत्साहन देने की सिफारिश की है। इसके अलावा ई-बस और CNG बसों के जरिए सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने, हाईवे और NCR में CNG-LNG नेटवर्क विकसित करने और इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने पर भी जोर दिया गया है। पार्किंग मैनेजमेंट और पर्यावरण संरक्षण शुल्क बढ़ाने जैसे कदम भी सुझाए गए हैं।
लंबी लड़ाई की तैयारी
CAQM का कहना है कि दिल्ली की हवा को साफ करना किसी एक मौसम या तात्कालिक उपाय से संभव नहीं है। इसके लिए परिवहन व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव, तकनीक का उपयोग और लोगों की आदतों में बदलाव जरूरी है। आयोग की सिफारिशें इसी दीर्घकालिक सोच का हिस्सा हैं, जिन पर अमल कर राजधानी को सांस लेने लायक बनाया जा सकता है।
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