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Patna: झारखंड से बिहार तक एंबुलेंस में शराब की तस्करी, सीक्रेट केबिन में छिपा रखी थी बोतलें; 3 गिरफ्तार

बिहार के पटना (दनियावां) में उत्पाद विभाग ने एंबुलेंस से शराब तस्करी का बड़ा खुलासा किया है। रांची से लाई जा रही लाखों की विदेशी शराब और 3 तस्कर पकड़े गए हैं।

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एंबुलेंस के 'तहखाने' में रखकर हो रही थी तस्करी

Photo : Times Now Digital

Patna News: बिहार में शराबबंदी कानून को ठेंगा दिखाने के लिए तस्कर हर दिन नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। पटना उत्पाद विभाग ने एक ऐसी कार्रवाई की है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। दनियावां इलाके में विभाग ने एक एंबुलेंस को पकड़ा है, जिसके अंदर छिपाकर भारी मात्रा में विदेशी शराब पटना लाई जा रही थी।

रांची से पटना तक का 'सेफ पैसेज'

उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि झारखंड की राजधानी रांची से एक एंबुलेंस के जरिए शराब की बड़ी खेप पटना की ओर आ रही है। सूचना मिलते ही विभाग ने दनियावां के पास जाल बिछाया। जब संदिग्ध एंबुलेंस को रोककर तलाशी ली गई, तो शुरुआत में कुछ नहीं मिला। लेकिन सघन जांच के दौरान एंबुलेंस के भीतर विशेष रूप से बनाए गए 'सीक्रेट चैंबर' (गुप्त तहखाने) का खुलासा हुआ। इस कार्रवाई में लाखों रुपये की शराब बरामद की गई है। पुलिस ने मौके से तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है कि यह खेप पटना में किसे सप्लाई की जानी थी।

अधिकारी का बयान

पटना उत्पाद विभाग के सहायक आयुक्त प्रेम प्रकाश ने बताया कि तस्करों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए एंबुलेंस का सहारा लिया ताकि पुलिस को शक न हो। उन्होंने कहा, "हमें इनपुट मिला था कि एंबुलेंस के जरिए तस्करी हो रही है। पकड़े गए आरोपियों ने एंबुलेंस की बॉडी में बदलाव कर गुप्त जगह बनाई थी।"

एंबुलेंस बनी तस्करों की 'ढाल'

यह कोई पहली बार नहीं है जब बिहार में शराब ढोने के लिए एंबुलेंस का इस्तेमाल हुआ हो। हाल के महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं। पिछले महीने हाजीपुर में पुलिस ने एक एंबुलेंस पकड़ी थी जिसकी छत में तहखाना बनाकर 1500 बोतलें (555 लीटर) विदेशी शराब छिपाई गई थी। बीते दिनों पटना में मद्य निषेध विभाग ने एक अन्य कार्रवाई में एंबुलेंस के इंजन और अन्य हिस्सों से अंग्रेजी शराब जब्त की थी। तस्करों का मानना है कि एंबुलेंस होने के कारण चेकिंग पॉइंट पर उन्हें जल्दी रास्ता मिल जाता है और पुलिस मानवीय आधार पर ज्यादा तलाशी नहीं लेती।

प्रशासनिक चुनौती

लगातार हो रही इन घटनाओं ने उत्पाद विभाग की चुनौती बढ़ा दी है। अब पुलिस और उत्पाद विभाग केवल ट्रकों और निजी वाहनों पर ही नहीं, बल्कि एंबुलेंस और अन्य इमरजेंसी सेवाओं वाले वाहनों पर भी पैनी नजर रख रहे हैं।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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