Dadri Lynching: अखलाक हत्याकांड मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार की वो याचिका खारिज हो गई है, जिसमें सरकार ने आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले को वापस लेने की बात कही थी। कोर्ट ने यूपी सरकार की दलील को खारिज करते हुए आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया है।
कोर्ट में क्यों खारिज हुआ यूपी सरकार की याचिका
सूरजपुर कोर्ट में आज अखलाक हत्याकांड में यूपी सरकार की केस वापस लेने की याचिका पर सुनवाई हुई। मामले में अदालत ने अभियोजन की ओर से केस वापसी की लगाई गई अर्जी को महत्वहीन और आधारहीन मानते हुए निरस्त कर दिया।रोजाना सुना जाए मामला
मामला 2015 में मोहम्मद अखलाक की लिंचिंग का है। जहां कोर्ट ने अब फैसले में रोजाना सुनवाई के साथ ट्रायल में तेजी लाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा, 'गौतम बुद्ध नगर के पुलिस कमिश्नर और ग्रेटर नोएडा के डिप्टी कमिश्नर को एक पत्र भेजा जाए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सबूतों को हर तरह की सुरक्षा दी जाए।'
अतिरिक्त जिला जज सौरभ द्विवेदी ने यह भी निर्देश दिया कि मामले को सबसे महत्वपूर्ण श्रेणी में रखा जाए और रोजाना सुना जाए। अदालत ने अभियोजन पक्ष को भी निर्देश दिया कि मामले में जल्द से जल्द सबूत रिकॉर्ड किए जाएं। मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी।
क्या थी ये घटना?
दादरी के बिसाड़ा गांव में अखलाक (50) को गाय की हत्या करने और उसके घर में मांस रखने की अफवाहों पर भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। 15 अक्टूबर को यूपी सरकार ने इस मामले में मुकदमा वापस लेने के लिए एक एप्लीकेशन दी थी, जिसमें कई कारण बताए गए थे, जैसे कि आरोपियों का नाम लेने में अखलाक के रिश्तेदारों के विरोधाभासी बयान; जैसे यह तथ्य कि आरोपियों के पास से कोई धारदार हथियार बरामद नहीं हुआ और आरोपी और पीड़ित के बीच किसी दुश्मनी या मनमुटाव का कोई सबूत नहीं मिला।
