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Andhra Pradesh Fire Accident: फार्मा कंपनी के कारखाने में आग का तांडव, अब तक 17 की मौत, 33 घायल लड़ रहे जिंदगी की जंग

Andhra Pradesh Fire Accident: आंध्र प्रदेश के अचुतापुरम स्थित फार्मा कंपनी के कारखाना अग्निकांड में अबतक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे में घायल 33 लोगों का इलाज जारी है।

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Andhra Pradesh Fire Accident: फार्मा कंपनी के कारखाने में आग का तांडव, अब तक 17 की मौत, 33 घायल लड़ रहे जिंदगी की जंग

Andhra Pradesh Fire Accident: आंध्र प्रदेश के अचुतापुरम में बुधवार को एक फार्मा कंपनी के कारखाने में आग लग जाने की घटना में 17 लोगों की मौत हो गई और 33 अन्य घायल हो गए। अनकापल्ली की जिलाधिकारी विजया कृष्णन ने बताया कि दुर्घटना दोपहर करीब सवा दो बजे एसेंटिया एडवांस्ड साइंसेस प्राइवेट लिमिटेड के संयंत्र में हुई।

शॉर्ट सर्किट से हुआ विस्फोट बिजली

कृष्णन ने बताया कि फैक्ट्री में दो पालियों में 381 कर्मचारी काम करते हैं। विस्फोट दोपहर को भोजनावकाश के समय हुआ। इसलिए कर्मचारियों की उपस्थिति कम थी। उन्होंने कहा कि संदेह है कि विस्फोट बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण हुआ। बताया कि 33 घायल लोगों को अनकापल्ली और अचुतापुरम के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जबकि अग्निशमन विभाग छह दमकल गाड़ियों की मदद से बचाव कार्य में लगा हुआ है।

मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने मौ तों पर दुख जताया

जिलाधिकारी ने बताया कि कारखाने में फंसे 13 लोगों को बचा लिया गया है। इस बीच मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने लोगों की मौत पर दुख जताया है। एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार मृतक श्रमिकों के परिवारों के साथ खड़ी रहेगी। अनाकापल्ले कलेक्टर विजया कृष्णन ने बताया कि अचुतपुरम एसईजेड विस्फोट घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है।

(इनपुट-भाषा)

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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