Why Market Down Today: भारत सरकार ने कर्नाटका में दो और गुजरात में एक मानव मेटाप्नयूमोवायरस (HMPV) के मामले की पुष्टि की, जिसके बाद चीन में वायरस के प्रकोप की खबरों के बीच भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई। इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों ने सतर्कता बरतते हुए अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने की कोशिश की, जिसके कारण सेंसेक्स 1,258.12 अंक या 1.59 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,964.99 पर बंद हुआ और निफ्टी 388.70 अंक या 1.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,616.05 पर था।
निफ्टी में सबसे ज्यादा नुकसान में रहने वाले शेयरों में टाटा स्टील, ट्रेंट, कोल इंडिया, एनटीपीसी और बीपीसीएल शामिल थे, जबकि बढ़त में रहने वाले शेयरों में अपोलो हॉस्पिटल, टाटा कंज्यूमर, टाइटन कंपनी, एचसीएल टेक्नोलॉजीज थे।
सभी सेक्टरोल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए, जिनमें पीएसयू बैंक में 4 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि मेटल, रियल्टी, एनर्जी, पीएसयू, पावर और ऑयल एंड गैस में 3-3 प्रतिशत की गिरावट रही। बीएसई मिडकैप सूचकांक में 2.4 प्रतिशत और स्मॉलकैप सूचकांक में 3 प्रतिशत की गिरावट आई।
भारत VIX में 17% का उछाल
भारत का डर सूचकांक India VIX 17% बढ़ गया, जिससे बाजार में व्यापक बिक्री का दबाव देखा गया, खासकर मिड और स्मॉल-कैप शेयरों में। Sensex ने दिन के सबसे निचले स्तर 77,782 को छुआ, वहीं Nifty 23,600 के नीचे गिर गया।
स्वास्थ्य मंत्रालय का बयान: HMPV वायरस की स्थिति पर नियंत्रण
स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बारे में एक बयान जारी करते हुए कहा कि HMPV वायरस पहले से ही दुनिया भर में मौजूद है और भारत में भी इसके मामले सामने आए हैं। मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारतीय राज्यों में गंभीर श्वसन संबंधी बीमारियों (SARI) और इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षणों (ILI) में कोई असामान्य वृद्धि नहीं देखी गई है।
ICMR और IDSP नेटवर्क के आंकड़ों के अनुसार, देश में HMPV के मामलों की निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) चीन में स्थिति पर नियमित अपडेट दे रहा है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिक्री और वैश्विक स्थिति
शेयर बाजार पहले ही FII की बिकवाली के दबाव में था, जो जनवरी में अब तक लगभग आधे बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जैसा कि NSDL डेटा में देखा गया है। Geojit Financial Services के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. V K Vijayakumar के अनुसार, बाजार पर बाहरी नकारात्मक प्रभाव और घरेलू सकारात्मक कारकों का मिश्रण है और FII की बिक्री जारी रहने की संभावना है, जब तक अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर का सूचकांक स्थिर नहीं होते।
सम्भावित जोखिम और आगामी स्थिति
डॉ. V K Vijayakumar ने यह भी बताया कि "बाजार पर FII प्रवाह को लेकर नकारात्मक प्रभाव जारी रहेगा और निवेशकों को आने वाले समय में अमेरिकी डॉलर और 10 साल के अमेरिकी बांड यील्ड में गिरावट की उम्मीद करनी चाहिए।"
