पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक नया नक्शा जारी किया है। इसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका का नया क्षेत्र घोषित किया गया है। नक्शे में ईरान और ओमान के बीच स्थित रणनीतिक जलमार्ग को घेरकर उसके ऊपर 'NEW U.S. Territory'लिखा गया है। ट्रुथ सोशल पर उनका ये पोस्ट तब आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। और हाल ही में उन्होंने एलान किया था कि वो बहुत जल्द होर्मुज जलडमरूमध्य को संयुक्त राज्य अमेरिका का क्षेत्र घोषित कर देंगे। वहीं, ईरान ने पलटवार करते हुए ट्रंप की धमकियों को "बकवास" करार दिया था।
बता दें कि होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से की आवाजाही इसी रास्ते से होती है। ऐसे में इस जलमार्ग पर किसी भी तरह का सैन्य या राजनीतिक नियंत्रण वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर सीधा असर डाल सकता है।
पहले भी ट्रंप कर चुके हैं ऐसे दावे
ट्रंप का इस तरह का दावा कोई नया नहीं है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से शुरू हुई जंग से अब तक कई बार ट्रंप ऐसे दावे कर चुके हैं। कई बार तो उन्होंने ईरान पर सीधा हमला करने की भी धमकी दी, लेकिन आखिर में पीछे हट गए।अप्रैल में भी उन्होंने ऐसा ही एक नक्शा जारी किया था, जिसमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को स्ट्रेट ऑफ ट्रंप का नाम दिया था। ट्रम्प ने इस तस्वीर को बिना किसी कैप्शन के अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल अकाउंट पर पोस्ट किया था।
ईरान ने खारिज किए ट्रंप के दावे
वहीं, ईरान ने लगातार ट्रंप के इन दावों को खारिज किया है। तेहरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को कब खोला जाएगा, इसका फैसला ईरान करेगा। ईरान का साफ कहना है कि अमेरिका द्वारा जून में हुए अंतरिम समझौते की शर्तें पूरी किए जाने तक जलमार्ग बंद रहेगा। उसकी शर्तों में ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाना, तेल प्रतिबंध हटाना, ईरान की जब्त संपत्तियां जारी करना और सैन्य कार्रवाई रोकना शामिल हैं।
होर्मुज में जहाज पर हमला
इस बीच, होर्मुज से गुजर रहे एक जहाज पर मंगलवार को हमला भी हुआ, जिसमें जहाज के इंजन रूम को नुकसान पहुंचा और चालक दल का एक सदस्य हताहत हुआ। इस घटना ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत भी फिलहाल ठप है। 60 दिन की वार्ता अवधि खत्म होने के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा है। ईरान ने संकेत दिया है कि अगर कूटनीति विफल रहती है तो वह सैन्य रूप से और आक्रामक रुख अपना सकता है।
