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दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा को क्यों सही नहीं लगता Mutual Fund, आम इन्वेस्टर को दी ये सलाह

हम दशकों से सुन रहे हैं, म्यूचुअल फंड सही है। लेकिन, दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा की राय इससे अलग है। वे कहते हैं कि म्यूचुअल फंड हों या शेयरों की ट्रेडिंग आम लोगों को इससे बचना चाहिए।

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निवेशकों को इक्विटी मार्केट से दूर रहने की सलाह

Mutual Fund Investment Alternate View: दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा का म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार को लेकर नजरिया बाकी बाजार विशेषज्ञों से काफी अलग है। उनका मानना है कि आम निवेशक के लिए इक्विटी में लगातार पैसा बनाना उतना आसान नहीं है, जितना निवेश से जुड़े विज्ञापनों और लंबे समय के रिटर्न के आंकड़ों से दिखाया जाता है। हाल में भी उन्होंने कहा कि आम निवेशक को अपनी डिस्पोजेबल नेट वर्थ का सिर्फ 5-10% ही इक्विटी में रखना चाहिए।

‘म्यूचुअल फंड सही है’ पर सवाल क्यों?

शर्मा की आपत्ति म्यूचुअल फंड के अस्तित्व से ज्यादा उस धारणा पर है, जिसमें इक्विटी निवेश को लगभग हर निवेशक के लिए आसान और लंबे समय में भरोसेमंद धन बनाने का रास्ता बताया जाता है। उनका कहना है कि बाजार में जोखिम हमेशा मौजूद रहता है और तेज रिटर्न के साथ उतार-चढ़ाव भी आता है। शंकर शर्मा कहते हैं, ‘म्यूचुअल फंड सही है’ अभियान में सचिन तेंदुलकर, एमएस धोनी और रोहित शर्मा जैसे लोकप्रिय क्रिकेटरों का इस्तेमाल किया गया। लेकिन बड़े सेलिब्रिटी का प्रचार किसी निवेश विकल्प के जोखिम को खत्म नहीं करता।

लंबे समय के रिटर्न की कहानी अधूरी?

शर्मा की एक बड़ी दलील यह है कि बाजार में लंबे समय के औसत रिटर्न का आंकड़ा पूरी कहानी नहीं बताता। किसी खास अवधि में शानदार प्रदर्शन होने का मतलब यह नहीं कि हर निवेशक उसी तरह का रिटर्न हासिल करेगा। निवेश कब शुरू किया गया, कितने समय तक पैसा लगा रहा, बीच में कितनी गिरावट आई और निवेशक ने गिरावट के दौरान क्या किया इन सबका असर अंतिम रिटर्न पर पड़ता है। यही वजह है कि शर्मा इक्विटी को स्थिर या अनुमानित रिटर्न का साधन मानने से बचने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक ऊंचे रिटर्न की संभावना के साथ ऊंचा जोखिम भी जुड़ा है।

फिर आम निवेशक क्या करे?

शर्मा की सबसे चर्चित सलाह उनके परिवार की एक घटना से जुड़ी है। शर्मा ने बहन और जीजा को शेयर और म्यूचुअल फंड से दूर रहने की सलाह दी। शर्मा के मुताबिक एक आम आदमी को 40% पैसा अच्छे फिक्स्ड डिपॉजिट, 30% सोने और 30% शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर कच्ची जमीन में लगाना चाहिए। शर्मा के मुताबिक इससे उनका परिवार बिना बाजार की रोजाना चिंता के आर्थिक रूप से मजबूत रह सकता है। शर्मा का कहना है कि आम निवेशक के पोर्टफोलियो में इक्विटी को उसके डिस्पोजेबल नेट वर्थ के 5-10% से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

क्या हर निवेशक के लिए यही रणनीति सही है?

यह जरूरी नहीं। क्योंकि, तमाम बड़े निवेशक सलाह देते हैं कि लंबे समय के लक्ष्य और पर्याप्त समय वाले निवेशकों के लिए इक्विटी का हिस्सा काफी अहम हो सकता है। ऐसे में किसी एक की सलाह को सार्वभौमिक नियम की तरह नहीं माना जा सकता है।

एक्सपर्ट व्यू: यह आर्टिकल Gquant & First Global के फाउंडर व दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा विचारों पर आधारित है। शर्मा ने ये विचार अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर व्यक्त किए हैं।

डिस्क्लेमर: TIMES NOW नवभारत किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ या कमोडिटी में निवेश की सलाह नहीं देता है। यहां पर केवल जानकारी दी गई है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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