Middle East Oil Dependency : वैश्विक ऊर्जा बाजार में मिडिल ईस्ट का कच्चा तेल कई देशों के लिए (crude oil imports) एक अहम स्रोत बना हुआ है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के 2024 के आंकड़ों के आधार पर एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें यह बताया गया है कि अलग-अलग देश अपनी कुल तेल खपत का कितना हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करते हैं। यह आंकड़े दिखाते हैं कि दुनिया के कई देश अभी भी ऊर्जा जरुरतों के लिए इस क्षेत्र पर काफी निर्भर हैं, हालांकि यह निर्भरता हर देश में अलग-अलग है।
एशिया के देश सबसे आगे
रिपोर्ट के अनुसार एशिया के कई बड़े देश मिडिल ईस्ट के तेल पर काफी ज्यादा निर्भर हैं। इसमें सबसे ऊपर छोटे देश भी हैं, लेकिन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की निर्भरता वैश्विक दृष्टि से ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है। जापान इस लिस्ट में सबसे आगे है, जहां देश की कुल तेल खपत का करीब 77% हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। इसी तरह ताइवान में यह आंकड़ा करीब 63% और साउथ कोरिया में करीब 57% है। दक्षिण एशिया में भी स्थिति काफी महत्वपूर्ण है। भारत की बात करें तो देश अपनी कुल तेल खपत का करीब 45% हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है। वहीं चीन करीब 38% तेल इसी क्षेत्र से प्राप्त करता है। इसके अलावा पाकिस्तान भी उच्च निर्भरता वाले देशों में शामिल है, जहां यह हिस्सा करीब 78% तक पहुंच जाता है। श्रीलंका और थाइलैंड जैसे देशों में भी मिडिल ईस्ट के तेल का बड़ा योगदान देखा जाता है।
छोटे देशों की अत्यधिक निर्भरता
अगर छोटे देशों की बात करें तो निर्भरता और भी ज्यादा दिखाई देती है। कुछ देशों में तो यह 80–90% से भी ऊपर है। उदाहरण के लिए इरिटिरिया (Eritrea) में यह आंकड़ा करीब 91% तक पहुंच जाता है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। वहीं मेडागास्कर (Madagascar) में भी यह करीब 89% के आसपास है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि छोटे और कम उत्पादन क्षमता वाले देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर रहते हैं।
| रैंक | देश | मिडिल ईस्ट तेल पर निर्भरता |
|---|---|---|
| 1 | Eritrea | 91% |
| 2 | Madagascar | 89% |
| 3 | Pakistan | 78% |
| 4 | Japan | 77% |
| 5 | Kenya | 77% |
| 6 | Taiwan | 63% |
| 7 | South Korea | 57% |
| 8 | South Africa | 54% |
| 9 | Tanzania | 53% |
| 10 | Namibia | 50% |
| 11 | Sri Lanka | 50% |
| 12 | Thailand | 50% |
| 13 | India | 45% |
| 14 | Lithuania | 40% |
अमेरिका और यूरोप की स्थिति अलग क्यों है
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उत्तरी अमेरिका जैसे क्षेत्र जैसे United States और Canada मिडिल ईस्ट के तेल पर बहुत कम निर्भर हैं। इसका कारण यह है कि इन देशों के पास घरेलू उत्पादन और वैकल्पिक स्रोतों की बेहतर उपलब्धता है। इसी तरह कई यूरोपीय देशों ने भी ऊर्जा स्रोतों को विविध (diversify) किया है, जिससे उनकी निर्भरता अपेक्षाकृत कम हो गई है।
एशिया की उच्च निर्भरता के कारण
एशिया के देशों की मिडिल ईस्ट पर अधिक निर्भरता का मुख्य कारण यह है कि इन देशों की खपत उत्पादन से कहीं ज्यादा है। बड़े औद्योगिक विकास, तेजी से बढ़ती जनसंख्या और परिवहन क्षेत्र में तेल की भारी मांग इस निर्भरता को बढ़ाती है। मिडिल ईस्ट दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल निर्यातक क्षेत्र है, इसलिए एशियाई देश अपनी जरुरतों को पूरा करने के लिए यहां से बड़े पैमाने पर आयात करते हैं।
ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक जोखिम
रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) आज भी एक बड़ा वैश्विक मुद्दा है। मिडिल ईस्ट से आने वाला तेल अक्सर रणनीतिक समुद्री मार्गों से गुजरता है, जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)। अगर इन मार्गों में किसी तरह की बाधा आती है, तो कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हालांकि वैश्विक तेल बाजार समय के साथ संतुलन बना लेता है, लेकिन जिन देशों के पास विविध आपूर्तिकर्ता नहीं हैं, वे संकट के समय ज्यादा प्रभावित होते हैं।
यह रिपोर्ट बताती है कि भले ही दुनिया धीरे-धीरे ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ रही हो, लेकिन आज भी कई देश खासतौर पर एशिया में मिडिल ईस्ट के तेल पर काफी निर्भर हैं। इसमें भारत भी एक महत्वपूर्ण स्थान पर है, जहां करीब आधी तेल खपत इसी क्षेत्र से पूरी होती है।
