शेयर बाजार के साथ रुपये में बड़ी गिरावट का दौर जारी है। गुरुवार को अमेरिकी मुद्रा डॉलर के मुकाबले 37 पैसे टूटकर 96.31 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह दो महीने से अधिक समय में रुपये का सबसे निचला स्तर है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की धारणा और वैश्विक बॉण्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी की चिंता के बीच रुपये पर आगे भी दबाव बना रह सकता है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.95 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान यह कमजोर होकर 96.34 प्रति डॉलर के निचले स्तर तक आ गया। कारोबार के अंत में रुपया 96.31 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से 37 पैसे की गिरावट है। रुपया बुधवार को शुरुआती बढ़त गंवाता हुआ 95.94 प्रति डॉलर पर स्थिर बंद हुआ था।
एक्सपर्ट का क्या है कहना?
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की धारणा और अमेरिकी बॉण्ड प्रतिफल बढ़ने की चिंता के बीच रुपये के नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करने के आसार हैं। डॉलर में मजबूती और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रुपये पर अधिक दबाव डाल सकती है। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.45 प्रतिशत बढ़कर 101.90 पर रहा।
कच्चे तेल में उछाल
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड का भाव वायदा कारोबार में 2.54 प्रतिशत बढ़कर 100.52 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 570.59 अंक की गिरावट के साथ 71,909.70 अंक पर जबकि निफ्टी 198.50 अंक टूटकर 22,421.95 अंक पर बंद हुआ। अगर कच्चे तेल की कीमत और बढ़ती है तो रुपये पर दबाब बढ़ सकता है। वहीं, आरबीआई की रेपो रेट बढ़ाने का भी असर होगा। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बुधवार को शुद्ध रूप से 10,148.41 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
