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GST उछला, GDP दौड़ी फिर शेयर बाजार में क्यों जारी है गिरावट? वित्त मंत्रालय रिपोर्ट में हुआ खुलासा

रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती देश के लिए एक बड़ी ताकत है।

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बाजार क्यों पस्त?

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट जारी है। निवेशकों को समझ में नहीं आ रहा कि वो क्या करें? अब इसका जवाब मिल गया है। वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत को अन्य विकासशील देशों की तरह पूंजी प्रवाह आकर्षित करने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों को लेकर अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक कृत्रिम मेधा (AI) से भारत को विदेशी निवेश लाने की क्षमता को प्रभावित कर रही है। उल्लेखनीय है कि भारतीय बाजार में गिरावट की बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। इससे रुपये पर भी दबाब बढ़ा है। रुपया एक बार फिर टूटकर डॉलर के सामने 95 के पार पहुंच गया है।

रिपोर्ट में क्या कहा गया?

मंत्रालय की सितंबर की मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि इस साल जुलाई-अगस्त के जीएसटी संग्रह, निर्यात आंकड़े समेत उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक अप्रैल-जून, तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत जीडीपी वृद्धि के बाद आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार में कुछ नरमी का संकेत देते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि वैश्विक परिस्थितियां एक बार फिर प्रतिकूल हो गई हैं। सितंबर में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है और भारतीय मुद्रा पर निकट अवधि में दबाव बना हुआ है।

हर तिमाही करना होगा बेहतर प्रदर्शन

मासिक आर्थिक समीक्षा में कहा गया कि वैश्विक और उससे उत्पन्न आर्थिक अनिश्चितता का मतलब है कि भारत कोविड के बाद की वृद्धि की उपलब्धियों पर निर्भर होकर नहीं रह सकता। इसे हर तिमाही अर्जित करना होगा। यही नीति-निर्माताओं के सामने चुनौती है। रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को 'कारोबार के अनुकूल के बजाय अधिक प्रतिस्पर्धा के अनुकूल’ बनाने की जरूरत की बात कही गयी है। इसमें कहा गया कि केवल प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था ही सफल, नवोन्मेषी और विनिर्माण आधारित अर्थव्यवस्था बन सकती है।

इस कारण बढ़ी चुनौती

अमेरिका के साथ 'अस्थिर’ व्यापार संबंध, कृत्रिम मेधा के चलते वैश्विक स्तर पर पूंजी निवेश और सीमापार पूंजी प्रवाह में बदलाव तथा विकसित देशों द्वारा अपनी विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए निवेश हासिल करने की होड़ ने विकासशील देशों के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत को अन्य विकासशील देशों की तरह, पूंजी प्रवाह आकर्षित करने की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, संकेत हैं कि शुद्ध आधार पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह इस वित्त वर्ष में पिछले साल की तुलना में बेहतर रह सकता है।

कब लौटेंगे विदेशी निवेशक?

अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों की स्थिति, शुल्क संबंधी दबाव, कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता तथा वैश्विक स्तर पर कृत्रिम मेधा से जुड़े घटनाक्रमों में भारत से जुड़ी संभावनाओं का अभाव भारत की स्थिति को आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में प्रभावित कर रहा है। समय के साथ इन चुनौतियों के कम होने पर भारत की वृद्धि क्षमता निवेशकों का ध्यान आकर्षित करेगी।

इन चिंताओं को लेकर किया अगाह

रिपोर्ट ने आगाह किया कि दिखने वाली आपसी मित्रता के बावजूद वैश्विक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को रणनीतिक रूप से इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति तेज हो रही है। ऊर्जा, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य और सेमीकंडक्टर जैसे विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक आपूर्ति संबंधी झटके उभरने लगे हैं। जलवायु, वैश्विक स्थिति और मौद्रिक दबावों के एक साथ बढ़ने से भारत के आर्थिक परिदृश्य में मुद्रास्फीति का जोखिम बढ़ सकता है। आपूर्ति संबंधी झटकों से पैदा होने वाली महंगाई आर्थिक वृद्धि को प्रभावित करेगी।

ब्याज दरें बढ़ रही

इसमें कहा गया कि विकसित देशों में ब्याज दरें तेजी से बढ़ रही हैं, जिसका असर घरेलू बॉण्ड प्रतिफल पर भी पड़ेगा। साथ ही, वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने के बीच ऊंची ब्याज दरें कई निवेशकों को अपने घरेलू बाजारों में निवेश बनाए रखने के लिए प्रेरित करेंगी, जिससे सीमापार पूंजी प्रवाह धीमा हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, लगातार उच्च गुणवत्ता वाले, स्थिर और अपेक्षाकृत तेज फैसले निवेशकों को भरोसा दिलाएंगे। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि भारत को अर्थव्यवस्था को कारोबार के अनुकूल बनाने के बजाय अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने पर काम करना चाहिए। केवल प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था ही सफल, नवोन्मेषी और विनिर्माण आधारित अर्थव्यवस्था बन सकती है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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