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होर्मुज खुले या बंद रहे... भारत को नो टेंशन! दोस्त रूस ने संभाला मोर्चा, जानें कैसे?

मार्च से भारतीय रिफाइनरियों ने खाड़ी क्षेत्र से कम आपूर्ति की भरपाई के लिए अटलांटिक क्षेत्र और वेनेजुएला से भी खरीद बढ़ाई है। मेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम समझौते के बाद तेल की आवाजाही फिर शुरू हो गई है।

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रूस से कच्चा तेल

ईरान और अमेरिका एक बार फिर होर्मुज को लेकर बयानबाजी कर रहे हैं। लेबनान पर इजरायल के ताजा हमले के बाद ईरान ने फिर होर्मुज बंद करने का ऐलान किया है। वहीं, दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुली धमकी दी है कि अगर 60 दिनों में शांति समझौता नहीं होता है तो अमेरिका होर्मुज में टोल वसूलना शुरू कर देगा। इन दोनों खबरों ने दुनिया को चिंता में डाल दिया है, लेकिन भारत के लिए राहत की खबर है। भारत का सच्चा दोस्त रूस रिकॉर्ड तेल भेज रहा है। केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, 19 जून तक भारत ने रूस से औसतन 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) कच्चे तेल का आयात किया है, जो मई में 19.1 लाख बीपीडी था। इसके साथ ही रूस, भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

यूएई से भी तेल की खरीद बढ़ाई

भारत ने जून में रूस और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है। विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने और खाड़ी देशों से कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह बहाल होने से पहले पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करने के लिए आयात बढ़ाया है। जून में यूएई से आयात 6.36 लाख बीपीडी रहा, जो मई के रिकॉर्ड 6.44 लाख बीपीडी के करीब है। वहीं, वेनेजुएला 2.09 लाख बीपीडी के साथ भारत का चौथा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा। सऊदी अरब से आयात 3.84 लाख बैरल प्रतिदिन रहा।

अमेरिका से तेल का आयात घटा

इसके उलट अमेरिका से तेल आयात घटकर 91,000 बीपीडी रह गया, जबकि मई में यह 2.52 लाख बीपीडी था। रिपोर्ट के अनुसार, एलपीजी क्षेत्र में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला है। खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति प्रभावित होने के बाद अमेरिका भारत के लिए एक प्रमुख एलपीजी आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। हालांकि, इससे आपूर्ति का विविधीकरण बढ़ा है, लेकिन लंबी दूरी के कारण परिवहन लागत भी बढ़ी है।

भारत को सस्ता तेल दे रहा है रूस

भारत की खरीद नीति में विविधीकरण की रणनीति साफ दिखाई दे रही है। रूस से रियायती दरों पर मिलने वाला कच्चा तेल आकर्षक बना हुआ है, जबकि यूएई से बढ़ी खरीद ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अनिश्चितता के दौरान आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद की। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक है और कच्चे तेल, एलएनजी तथा एलपीजी की जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र पर काफी निर्भर है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद किए जाने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई थी। यह जलमार्ग दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल खपत के परिवहन का प्रमुख रास्ता माना जाता है।

केप्लर के वरिष्ठ प्रबंधक (मॉडलिंग) सुमित रितोलिया ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से भारत को सबसे तेज राहत एलपीजी आपूर्ति में मिलेगी, जबकि कच्चे तेल और एलएनजी का आयात सामान्य होने में कुछ अधिक समय लग सकता है। रितोलिया के अनुसार, जून में रूस से भारत का तेल आयात 23.5 लाख बीपीडी से अधिक रहने और नया रिकॉर्ड बनाने की संभावना है। प्रतिस्पर्धी छूट और स्थिर मांग के कारण भविष्य में भी रूसी तेल भारत के आयात का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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