बिजनेस

युद्ध थमने का असर! त्योहारों से पहले बड़ी राहत संभव, 10% तक सस्ते हो सकते हैं खाद्य तेल

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म हो चुका है। दोनों देश शांति के लिए एक स्थायी समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। ऐसे में क्रूड के साथ ही खाद्य तेलों के दाम भी घट सकते हैं।

Image

घट सकती हैं खाद्य तेलों की कीमत

Edible oil prices drop India 2026 : अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने का असर Crude Oil Prices पर तो तुरंत ही दिखने लगा है। Brent Curde के दाम तीन महीने के निचले स्तर पर आ गए हैंं। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में अगस्त के महीने से शुरू होने वाले त्योहारों के सीजन से ठीक पहले मिडिल क्लास और रसोई का बजट संभालने वालों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत मिल सकती है। युद्ध के चलते आसमान छू रहे खाने के तेल (Edible Oil) की कीमतों में अगले कुछ महीनों के भीतर 10% तक की बड़ी गिरावट आ सकती है।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकार के एक एम्पॉवर्ड ग्रुप (Empowered Group) और एक्सपर्ट्स के ताजा आकलन में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि खाद्य तेलों के दाम में जल्द ही 10 फीसदी तक कमी आ सकती है और इससे भी बड़ी राहत की बात यह है कि घटी हुई कीमतें पूरे फेस्टिव सीजन (Festive Season) के दौरान स्थिर बने रहने की उम्मीद है।

क्यों घट सकते हैं खाद्य तेलों के दाम?

भारत सिर्फ क्रूड ऑयल का ही आयातक नहीं है। बल्कि, दुनिया में खाद्य तेलों का भी सबसे बड़ा आयातक है, इसलिए वैश्विक बाजारों में होने वाली हलचल का सीधा असर हमारी रसोई पर पड़ता है। एम्पॉवर्ड ग्रुप के मुताबिक खाद्य तेल सस्ता होने के पीछे तीन बड़ी वजहें हैं। पहली वजह पश्चिम एशिया में युद्ध का अंत है। इसकी वजह से ग्लोबल सप्लाई चेन सामान्य होगी। वहीं, दूसरी बड़ी वजह भी युद्ध से जुड़ी है। क्रूड सस्ता होने की वजह से

मालभाड़े (Freight Costs) में कमी आएगी। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जहाजों और लॉजिस्टिक्स के किराए में बड़ी गिरावट आ सकती है, जिससे आयात सस्ता होया। इसके अलावा सबसे बड़े पाम ऑयल उत्पादक देशों जैसे- इंडोनेशिया और मलेशिया से भारत में पाम ऑयल की आवक भी बढ़ने की उम्मीद है।

आम उपभोक्ताओं को कब मिलेगी राहत

कीमतों में 10% की कटौती तय मानी जा रही है, लेकिन रिटेल मार्केट यानी आपकी नजदीकी दुकान तक इसका फायदा पहुंचने में कुछ हफ्तों का समय लग सकता है। दरअसल, भारतीय कंपनियों और डीलर्स के पास पहले से ही महंगे दाम पर खरीदा हुआ पुराना स्टॉक (Existing Inventory) मौजूद है। साथ ही, कंपनियों के पुराने सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स भी चल रहे हैं। जैसे ही यह पुराना स्टॉक क्लियर होगा, रिटेल मार्केट में तेल के डिब्बे और पैकेट सस्ते रेट पर मिलने शुरू हो जाएंगे।

सरकार का 'सुपर-7 एक्शन प्लान'

इस साल मार्च के आखिरी हफ्ते में जब युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हुआ था, तब सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए 7 अधिकार प्राप्त समूह (Empowered Groups) का गठन किया था। इन ग्रुप्स का काम युद्ध के असर को कम करना और देश में जरूरी चीजों की सप्लाई बनाए रखना था। ये ग्रुप्स राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश मामले, अर्थव्यवस्था और व्यापार, सप्लाई चेन और आवश्यक वस्तुएं , ऊर्जा और उर्वरक, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स और पब्लिक कम्युनिकेशन पर 24 घंटे नजर रख रहे हैं।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

और पढ़ें
End of Article