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ऐसे बनाएं Retirement Income Plan, बुढ़ापे में नहीं होगी पैसों की तंगी

रिटायरमेंट की तैयारी केवल बड़ा फंड जमा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इमरजेंसी फंड और नियमित कैश फ्लो को ध्यान में रखकर बनाया गया प्लान ही रिटायरमेंट के बाद आर्थिक जरूरतों को मैनेज करने में मदद कर सकता है।

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ऐसे बनाएं अपना रिटायरमेंट इनकम प्लान (Photo: iStock)

रिटायरमेंट (Retirement) के बाद नियमित कमाई बंद हो सकती है, लेकिन घर के खर्च, दवाइयां, बिजली-पानी के बिल और दूसरी जरूरतें बनी रहती हैं। ऐसे में सिर्फ रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड जमा करना ही काफी नहीं है, बल्कि उस फंड से हर महीने नियमित इनकम कैसे मिलेगी, इसका प्लान बनाना भी जरूरी है। सही रणनीति अपनाकर रिटायरमेंट के बाद पैसों की तंगी से बचने की तैयारी की जा सकती है।

इनकम का लगाएं हिसाब

रिटायरमेंट इनकम प्लान (Retirement Income Plan) बनाने का पहला कदम मौजूदा खर्चों का हिसाब लगाना है। हर महीने घर चलाने में कितने रुपये खर्च होते हैं, इसका रिकॉर्ड बनाएं। इसके बाद महंगाई को ध्यान में रखते हुए अनुमान लगाएं कि रिटायरमेंट के समय इसी तरह के खर्च के लिए कितनी रकम की जरूरत होगी। इसमें मेडिकल और अचानक आने वाले खर्चों के लिए अलग रकम रखना भी जरूरी है।

नियमित निवेश करें

रिटायरमेंट के लिए जितनी जल्दी निवेश शुरू किया जाए, उतना ज्यादा समय पैसा बढ़ने के लिए मिल सकता है। नौकरी के दौरान हर महीने अपनी आय का एक निश्चित हिस्सा रिटायरमेंट फंड के लिए अलग रखा जा सकता है। लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार EPF, PPF, NPS, म्यूचुअल फंड SIP और अन्य निवेश विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। निवेश को सिर्फ एक विकल्प में रखने के बजाय अलग-अलग साधनों में बांटना जोखिम को मैनेज करने में मदद कर सकता है।

सुरक्षित निवेश बढ़ाएं

रिटायरमेंट नजदीक आने पर पूरे पैसे को ज्यादा जोखिम वाले निवेश में रखना उचित नहीं हो सकता। धीरे-धीरे पोर्टफोलियो में अपेक्षाकृत स्थिर और कम जोखिम वाले विकल्पों का हिस्सा बढ़ाया जा सकता है। FD, पोस्ट ऑफिस की कुछ योजनाएं और अन्य सुरक्षित साधन नियमित आय की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

मंथली इनकम का बनाएं प्लान

रिटायरमेंट फंड तैयार होने के बाद उसे एक साथ खर्च करने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाएं जिससे हर महीने पैसा मिलता रहे। उदाहरण के लिए, ब्याज देने वाले निवेश से मिलने वाली आय का इस्तेमाल नियमित खर्चों के लिए किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार अलग-अलग निवेश साधनों की मैच्योरिटी और ब्याज मिलने की अवधि को भी अलग रखा जा सकता है, ताकि पूरे साल कैश फ्लो बना रहे।

इमरजेंसी और मेडिकल फंड अलग रखें

रिटायरमेंट फंड के अलावा एक अलग इमरजेंसी फंड रखना जरूरी है। अचानक बीमारी, घर की मरम्मत या किसी बड़े खर्च के समय इसी फंड का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे नियमित रिटायरमेंट इनकम को अचानक निकालने की जरूरत कम होगी।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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