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Tata Group: क्या टाटा ग्रुप में सबकुछ ठीक नहीं, टाटा संस में चेयरमैन की नियुक्ति पर फैसला क्यों टला?

Tata Group News: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की लगातार तीसरी कार्यकाल के लिए नियुक्ति पर फैसला टल गया है। इस कदम के बाद ग्रुप के भीतर टॉप स्तर पर मतभेद और असहमति की अटकलें तेज हो गई हैं। टाटा ट्रस्ट ने पहले ही उन्हें तीसरे कार्यकाल के लिए सर्वसम्मति से सिफारिश दी थी।

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चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर फैसला टलने से टाटा ट्रस्ट के प्रस्ताव पर उठे सवाल

Tata Group News: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त करने का निर्णय टल गया है। टाटा संस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने बैठक में इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया। यह कदम ऐसे समय में आया है जब टाटा ट्रस्ट ने पिछले साल सर्वसम्मति से उन्हें तीसरा कार्यकाल देने की सिफारिश की थी।

टाटा ग्रुप के अंदर मतभेद की अटकलें

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक इस फैसले के बाद टाटा समूह के अंदर टॉप लेवल पर मतभेद की अटकलें तेज हो गई हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा निर्णय स्थगित करने से टाटा ट्रस्ट के सर्वसम्मत प्रस्ताव पर सवाल खड़े हो गए हैं। कहा जाता है कि टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति पर कुछ शर्तें रखी थीं।

एयर इंडिया और नए निवेशों की चिंता

नोएल टाटा की चिंता मुख्य रूप से कुछ कंपनियों में हो रहे घाटों और उभरते क्षेत्रों में निवेश से जुड़ी है। उदाहरण के लिए, एयर इंडिया का अधिग्रहण 2022 में हुआ था और उसे फिर से व्यवस्थित करने की प्रक्रिया अभी भी जारी है। इसके अलावा, सेमीकंडक्टर और बैटरी विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों में भारी निवेश से जुड़े जोखिमों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

शेयर बाजार में सूचीकरण पर चिंता

सूत्रों के अनुसार, टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की नियामकीय बाध्यता को लेकर भी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में आशंकाएं थीं। इस मामले में स्पष्ट आश्वासन देने की मांग की गई थी। हालांकि, एक सूत्र ने यह भी कहा कि टाटा ट्रस्ट का सर्वसम्मत प्रस्ताव अभी भी कायम है और इसे उचित समय पर लागू किया जाएगा।

ट्रस्ट और बोर्ड के बीच रुख में अंतर

कुछ एक्सपर्ट्स ने सवाल उठाया कि क्या टाटा ट्रस्ट द्वारा नामित निदेशक, टाटा संस के निदेशक मंडल के सर्वसम्मति निर्णय से अलग रुख अपना सकते हैं। टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस में निर्णायक हिस्सेदारी है, जिससे उसके निर्णय का महत्व काफी अधिक है।

पहले भी हो चुके हैं मतभेद

यह पहला मौका नहीं है जब टाटा ट्रस्ट के भीतर मतभेद सामने आए हों। पिछले साल भी ट्रस्ट के अंदर मतभेद इतना बढ़ गया था कि मामला केंद्र सरकार तक पहुंच गया। बाद में सरकार ने दोनों पक्षों को आपसी मतभेद सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने की सलाह दी थी।

टाटा ग्रुप का परिचय

टाटा संस, जिसकी कुल कीमत 180 अरब डॉलर से अधिक है, टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है। यह समूह वाहन, इस्पात, सूचना प्रौद्योगिकी, विमानन और उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में कारोबार करता है। टाटा समूह भारत की सबसे बड़ी और विविधीकृत कंपनियों में से एक है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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