Home Loan : जीवन में जब अचानक कोई बड़ा खर्च आ जाता है, चाहे वह घर की मरम्मत हो, मेडिकल इमरजेंसी या बच्चों की पढ़ाई तो अक्सर लोग लोन का सहारा लेते हैं। ऐसे में अगर आपके पास पहले से कोई होम लोन चल रहा है, तो आपके पास दो प्रमुख विकल्प होते हैं 'होम लोन टॉप-अप' या फिर नया 'पर्सनल लोन'। दोनों ही विकल्पों की अपनी विशेषताएं और सीमाएं हैं। इसलिए केवल ब्याज दर देखकर फैसला लेने के बजाय, लोन की कुल अवधि, प्रोसेसिंग फीस और अपनी रीपेमेंट क्षमता को समझना बेहद जरूरी है।
क्या होता है होम लोन टॉप-अप?
होम लोन टॉप-अप आपके मौजूदा होम लोन पर मिलने वाली एक अतिरिक्त लोन सुविधा है। चूंकि आप बैंक के पुराने ग्राहक होते हैं और आपकी संपत्ति पहले से ही बैंक के पास गिरवी होती है, इसलिए बैंक आसानी से यह लोन दे देते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी ब्याज दरें अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन की तुलना में काफी कम होती हैं। साथ ही, अगर आपका पिछला रीपेमेंट ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा है, तो कागजी कार्रवाई भी बहुत आसान हो जाती है।
पर्सनल लोन की अपनी सहूलियतें
अगर आपके पास होम लोन नहीं है या आप अपनी संपत्ति को अतिरिक्त लोन से नहीं बांधना चाहते, तो पर्सनल लोन एक व्यावहारिक विकल्प है। यह एक अनसिक्योर्ड लोन होता है, यानी इसके लिए आपको कोई प्रॉपर्टी या गारंटी गिरवी रखने की ज़रूरत नहीं होती। इसका सबसे बड़ा फायदा फंड्स की त्वरित उपलब्धता और इसके इस्तेमाल में मिलने वाली आजादी है। हालांकि, बैंक के लिए रिस्क ज्यादा होने के कारण इसकी ब्याज दरें टॉप-अप लोन के मुकाबले अधिक होती हैं।
केवल EMI न देखें, कुल ब्याज का हिसाब लगाएं
अक्सर लोग कम EMI देखकर टॉप-अप लोन चुन लेते हैं, जो एक भूल साबित हो सकती है। मान लीजिए कि आपने टॉप-अप लोन लिया और उसे अपने बचे हुए होम लोन की लंबी अवधि (जैसे 15 या 20 साल) से जोड़ दिया। भले ही ब्याज दर कम हो, लेकिन इतने लंबे समय तक ब्याज चुकाने के कारण आपकी जेब पर कुल बोझ बहुत बढ़ जाएगा। इसके विपरीत, पर्सनल लोन की EMI भले थोड़ी ज्यादा हो, लेकिन इसकी अवधि (सामान्यतः 1 से 5 वर्ष) छोटी होती है। नतीजतन, आप कुल मिलाकर कम ब्याज चुकाते हैं।
टैक्स छूट का गणित और अन्य खर्च
कई लोगों को लगता है कि होम लोन टॉप-अप लेने पर खुद-ब-खुद इनकम टैक्स की धारा 24(b) के तहत छूट मिल जाएगी। ऐसा नहीं है। टैक्स लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि आप उस पैसे का इस्तेमाल कहां कर रहे हैं। अगर पैसे का इस्तेमाल घर के रिनोवेशन या सुधार के लिए हुआ है, तो ही नियम और शर्तों के तहत टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है। इसके अलावा, लोन चुनते समय प्रोसेसिंग फीस, लीगल चार्जेस और डॉक्यूमेंटेशन कॉस्ट को भी जरूर जोड़ें, क्योंकि कई बार छिपे हुए खर्च लोन को महंगा बना देते हैं।
आपके लिए कौन सा विकल्प सही है?
अगर आपको बड़े फंड की आवश्यकता है, आप कम EMI रखना चाहते हैं और पैसे का इस्तेमाल घर से जुड़े कामों के लिए कर रहे हैं, तो टॉप-अप लोन एक समझदारी भरा फैसला है। लेकिन ध्यान रखें कि इसे अपने मौजूदा लोन की पूरी अवधि तक न खींचें; इसे जल्द से जल्द चुकाने की कोशिश करें। दूसरी ओर, अगर आपको कम समय के लिए पैसा चाहिए और आप थोड़ी ज्यादा EMI आसानी से भर सकते हैं, तो पर्सनल लोन बेहतर है ताकि आप कर्ज के जाल से जल्दी मुक्त हो सकें। फैसला लेने से पहले अपनी मासिक आय, इमरजेंसी फंड और दोनों लोन की कुल लागत की तुलना जरूर करें।
