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कार, प्लेन, इंटरनेट... सब सफल, फिर भी निवेशक हुए बर्बाद! क्या हिस्ट्री रिपीट करेगा AI?

दुनिया बदलने वाली टेक्नोलॉजी आपका पोर्टफोलियो बदल पाएगी इसका एक जवाब अतीत में छिपा है और दूसरा भविष्य में है। मशहूर निवेशक देविना मेहरा ने AI बबल पर बड़े सवाल उठाए हैं, साथ ही बताया है कि निवेशक क्या करें?

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AI बबल से सावधान रहें निवेशक

AI Bubble Vs Historical Trend : किसी टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का सफल होना आम तौर पर अच्छी खबर माना जाता है। लेकिन शेयर बाजार का इतिहास एक दिलचस्प और चौंकाने वाली तस्वीर दिखाता है। कई बार वही टेक्नोलॉजी, जिसने दुनिया को बदल दिया, उसके पीछे पैसा लगाने वाले निवेशकों को भारी नुकसान भी हुआ। कार, प्लेन और इंटरनेट ऐसी तकनीकें हैं, जिन्होंने दुनिया को बदल डाला, लेकिन उस अनुपात में निवेशकों को फायदा नहीं मिला। फर्स्ट ग्लोबल की फाउंडर और CMD देविना मेहरा ने इस विरोधाभास पर सवाल उठाया है। उनका इशारा मौजूदा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बबल की तरफ है। उनका सवाल है कि क्या दुनिया बदलने वाली तकनीक निवेशकों के लिए भी शानदार निवेश साबित होगी?

देविना मेहरा ने वीडियो में कहती हैं, “क्या हो अगर सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट लॉस उन टेक्नोलॉजी से नहीं मिले, जो फेल हो जाती हैं... बल्कि उन टेक्नोलॉजी से हो जो सफल होती हैं?” मेहरा इसे एक्सप्लेन करते हुए बताती हैं कि किसी भी तकनीक के सफल होने के बाद उसके चारों तरफ उत्साह तेजी से बढ़ता है। निवेशक उस कहानी का हिस्सा बनना चाहते हैं। ज्यादा से ज्यादा पैसा उस सेक्टर में जाने लगता है और कंपनियों की वैल्यूएशन तेजी से ऊपर पहुंचती है।

यही वह मोड़ होता है, जहां अच्छी तकनीक और अच्छा निवेश एक-दूसरे से अलग होने लगते हैं। किसी कंपनी का बिजनेस भविष्य में बहुत बड़ा हो सकता है, लेकिन अगर उसके शेयर को खरीदने के लिए निवेशक पहले ही बहुत ऊंची कीमत चुका चुका है, तो आगे मिलने वाला रिटर्न कमजोर हो सकता है। क्योंकि, उस सफलता की कीमत शेयर बाजार पहले ही कितनी लगा चुका है।

कार से इंटरनेट तक एक जैसी कहानी

कार, प्लेन और इंटरनेट तीन तकनीक ऐसी रहीं, जिन्होंने पूरी दुनिया, उद्योग और अर्थव्यवस्था को बदल डाला। ये तकनीकें कमायाब हुईं। लेकिन, सभी निवेशकों को कामयाबी नहीं मिली, क्योंकि कई कार कंपनियां बंद हुईं। एयरलाइन बंद हुईं और डॉट कॉम बबल की यादें अब भी भुलाई नहीं गई हैं। मोटे तौर पर कमी तकनीक में नहीं, बल्की भविष्य की उस कीमत में थी, जो निवेशकों ने उस कहानी पर भरोसा करते हुए चुका दी थी।

AI में वही कहानी दोहराने का खतरा?

देविना मेहरा कहती हैं कि सवाल यह नहीं कि AI सफल होगा या असफल। उल्टा, उनका तर्क है कि AI सफल हो सकता है। लेकिन, फिर भी उसमें निवेश करने वाले बहुत से लोगों को खराब रिटर्न मिल सकता है।क्योंकि, जब किसी तकनीक को लेकर उम्मीद बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, तो उसकी कीमत में भविष्य का बड़ा हिस्सा पहले ही शामिल हो जाता है। उस समय थोड़ा भी कम ग्रोथ, ज्यादा प्रतिस्पर्धा या मुनाफे में देरी शेयर की वैल्यूएशन को नुकसान पहुंचा सकती है। इतिहास में यही हुआ है। रेलमार्ग, कार, एविएशन और इंटरनेट हर जगह तकनीक सफल रही, लेकिन बहुत सी कंपनियां खत्म हुईं और कई निवेशकों की पूंजी भी डूबी।

AI निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

पहला सवाल यह नहीं होना चाहिए कि टेक्नोलॉजी कितनी बड़ी होगी नहीं, बल्कि यह होना चाहिए कि उस कामयाबी के मुकाबले कंपनी का शेयर कितनी कीमत पर मिल रहा है। दूसरा, निवेशकों को कंपनी की वास्तविक कमाई की क्षमता देखनी चाहिए। सिर्फ यह उम्मीद कि आने वाले वर्षों में AI का बाजार बहुत बड़ा हो जाएगा, अपने आप में निवेश का पर्याप्त आधार नहीं है। तीसरा खतरा ज्यादा निवेश और ज्यादा क्षमता का है। जब एक ही अवसर के पीछे बड़ी संख्या में कंपनियां और निवेशक पूंजी लगा देते हैं, तो कंपनियों पर प्रदर्शन का भारी दबाव रहता है। ऐसे में जरा सी चूक किसी भी कंपनी को बाजार से बाहर कर सकती है। इसके साथ ही यह भी याद रखना चाहिए कि शुरुआती विजेता हमेशा अंतिम विजेता हों, यह जरूरी नहीं।

तकनीक और शेयर, दोनों अलग कहानी

देविना मेहरा के पूरे तर्क का सबसे अहम हिस्सा यही है कि समाज की सफलता और निवेशक की सफलता एक ही चीज नहीं होती। किसी तकनीक से ग्राहकों को सस्ती सेवाएं मिल सकती हैं, कंपनियों की उत्पादकता बढ़ सकती है और पूरी अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है। लेकिन जरूरी नहीं कि उस तकनीक में निवेश करने वाली हर कंपनी के शेयरधारक भी उसी अनुपात में अमीर हों। देविना मेहरा के मुताबिक बाजार का इतिहास बार-बार दिखाता है कि जब कोई तकनीक बेहद सफल होने की संभावना दिखाती है, तो उसमें पैसा बहुत तेजी से आता है। यही पैसा कई बार वैल्यूएशन को इतना ऊपर ले जाता है कि निवेशक वास्तविक कमाई की क्षमता से बहुत आगे की कीमत चुका बैठते हैं।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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