Barrier Lake Breach Risk: नेपाल में प्रकृति का प्रकोप रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को भोटेकोशी नदी घाटी में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की तबाही से देश अभी उभर भी नहीं पाया था कि अब एक और बड़े खतरे की घंटी बज गई है। नेपाल (Nepal Flood) के छोटेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास भूस्खलन के कारण एक विशालकाय 'बैरियर झील' बन गई है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय और 'ग्लोबल टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्राकृतिक बांध अगले 72 घंटों के भीतर कभी भी टूट सकता है, जिससे निचले इलाकों में विनाशकारी जल प्रलय आ सकता है।
भूवैज्ञानिकों के अनुसार, गुरुवार सुबह तक इस झील में पानी का आयतन 20 लाख घन मीटर तक पहुंच चुका था और अगले तीन दिनों में इसमें 30 लाख घन मीटर पानी और जमा होने की संभावना है। यानी कुल 50 लाख घन मीटर पानी का दबाव इस कच्चे बांध पर होगा। खतरे को देखते हुए चीनी अधिकारी रियल-टाइम सिमुलेशन के जरिए स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं ताकि संभावित आपदा से निपटा जा सके।
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अब तक 270 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की पुष्टि
दूसरी ओर, बुधवार को आई बाढ़ के बाद नेपाल में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की टीमें लगातार मलबे में जिंदगी की तलाश कर रही हैं। अब तक 270 से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है। अकेले नारायणी नदी से ही गुरुवार दोपहर तक 121 शव बरामद किए जा चुके हैं।
600 से अधिक विदेशी पर्यटकों और श्रद्धालुओं समेत सैकड़ों लोग अभी भी लापता
इस भीषण तबाही (Nepal Badh) में 600 से अधिक विदेशी पर्यटकों और श्रद्धालुओं समेत सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा का असर सीमा पार चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र तक देखा जा रहा है, जहां के केरूंग (ग्यिरोंग) पोर्ट पर भी बाढ़ का पानी और मलबा भारी नुकसान पहुंचा चुका है। प्रशासन की ओर से निचले इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
