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SIP Calculator: ₹1 करोड़ जमा करने के लिए 25, 30 और 40 की उम्र में हर महीने कितनी सिप जरूरी?

SIP Calculator: आज आप देर से निवेश शुरू कर रहे हैं तो इसमें आपकी मदद स्टेप-अप SIP कर सकता है। एक पावरफुल टूल स्टेप-अप SIP है, जिसमें इन्वेस्टर हर साल SIP की रकम बढ़ाता है। म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय इस बात का ध्यान रखें कि किसी एक फंड या कैटेगरी पर निर्भर न रहें।

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सिप

SIP लाखों भारतीय निवेशकों के लिए पैसे बनाने का एक अहम जरिया बन गया है। AMFI के डेटा के अनुसार, जनवरी 2026 में SIP के जरिये म्यूचुअल फंड में 31,002 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। पिछले कुछ सालों में SIP की लोकप्रियता बढ़ने के साथ, कई निवेशक अब बड़े लक्ष्य तय कर रहे हैं। अगर आपका लक्ष्य 60 साल की उम्र तक 1 करोड़ रुपये जमा करना है, तो आपको SIP के जरिये हर महीने कितना इन्वेस्ट करना चाहिए? आइए इसे अलग-अलग उम्र के आधार पर समझते हैं।

अगर SIP 25 साल की उम्र में शुरू किया जाए: इन्वेस्टमेंट का समय: 35 साल (60 साल की उम्र तक)

सालाना रिटर्न की उम्मीद: 12%

मंथली SIP जरूरी: 2,000 रुपये

अगर कोई 25 साल का व्यक्ति 35 साल तक लगातार 12% रिटर्न पर हर महीने सिर्फ 2,000 रुपये इन्वेस्ट करता है, तो 60 साल की उम्र में जमा हुई रकम लगभग ₹1,10,21,662 करोड़ रुपये होगी।

यहां, इन्वेस्टर काफ़ी कम रकम लगाता है लेकिन उसे बहुत लंबे इन्वेस्टमेंट टाइम से फ़ायदा होता है। ज़्यादातर काम कंपाउंडिंग से ही होता है।

अगर SIP 30 साल की उम्र में शुरू किया जाता है तो इन्वेस्टमेंट का समय: 30 साल

मंथली SIP जरूरी: Rs 2,000

अगर कोई 30 साल का व्यक्ति 30 साल तक हर महीने 3500 रुपये 12% पर इन्वेस्ट करता है, तो 60 साल की उम्र में फंड लगभग 1,07,83,406 करोड़ रुपये होगा।

अगर SIP 40 साल की उम्र में शुरू किया जाता है तो इन्वेस्टमेंट का समय: 20 साल

मंथली SIP जरूरी: 11000 रुपये

अब फर्क बहुत बड़ा हो जाता है।

रिटायरमेंट में सिर्फ 20 साल बचे हैं, तो 40 साल के व्यक्ति को 12% सालाना रिटर्न पर 1,01,18,431 रुपये का फंड बनाने के लिए हर महीने लगभग 11000 रुपये निवेश करने होंगे।

स्टेप-अप SIP कर सकता है मदद

आज आप देर से निवेश शुरू कर रहे हैं तो इसमें आपकी मदद स्टेप-अप SIP कर सकता है। एक पावरफुल टूल स्टेप-अप SIP है, जिसमें इन्वेस्टर हर साल SIP की रकम बढ़ाता है। म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय इस बात का ध्यान रखें कि किसी एक फंड या कैटेगरी पर निर्भर न रहें। लार्ज-कैप, फ्लेक्सी-कैप और मिड-कैप फंड का मिक्स रिस्क को बैलेंस करने में मदद कर सकता है। र्टफोलियो को हर साल रिव्यू करें, लेकिन शॉर्ट-टर्म परफॉर्मेंस के आधार पर बार-बार बदलाव करने से बचें। जैसे-जैसे रिटायरमेंट पास आता है, धीरे-धीरे फंड का कुछ हिस्सा डेट या सुरक्षित इंस्ट्रूमेंट में शिफ्ट करें।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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