अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक अहम फैसले ने वैश्विक कमोडिटी और ऊर्जा बाजार में अचानक बड़ी हलचल पैदा कर दी है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार खुलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 6 फीसदी से अधिक की जोरदार गिरावट दर्ज की गई। इस बड़ी बिकवाली के चलते बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) फ्यूचर्स का भाव 5.52 अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 6.28 प्रतिशत टूटकर 82.41 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। ठीक इसी तरह, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI Crude) की कीमतों में भी 5.27 डॉलर यानी 6.22 प्रतिशत की नरमी देखने को मिली, जिसके बाद यह 79.40 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करने लगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम होने की उम्मीद
कच्चे तेल के दामों में आई इस अचानक गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है, जिसमें उन्होंने ईरान पर नए सैन्य हमले की योजना को फिलहाल टालने का ऐलान किया है। व्हाइट हाउस की ओर से यह संकेत दिया गया है कि अमेरिका अब ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत और समझौता करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष को समाप्त करना और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही को फिर से सुचारू बनाना है। सैन्य टकराव टलने की खबर से ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन को लेकर बना तनाव काफी हद तक कम हो गया, जिससे क्रूड मार्केट में भारी बिकवाली देखने को मिली।
समझौते के लिए ईरान और मध्य-पूर्व के देशों ने मांगा समय
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर एक पोस्ट के जरिए इस स्थिति पर स्पष्टता दी। उन्होंने दावा किया कि ईरान और मध्य-पूर्व के अन्य देशों ने व्यापक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए थोड़ा अतिरिक्त समय मांगा है। ट्रंप के अनुसार, इस संभावित समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल और पूरी तरह से फिर से खोलने के साथ-साथ क्षेत्र में ईरान के परमाणु खतरे को समाप्त करने का रास्ता साफ होगा। इसी सकारात्मक कूटनीतिक बातचीत के आधार पर वाशिंगटन ने सैन्य कार्रवाई को फिलहाल स्थगित करने का फैसला लिया, जिसका सीधा असर ग्लोबल एनर्जी प्राइसेस पर दिखा।
भारत के लिए बड़ी राहत
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई यह भारी गिरावट भारत जैसे प्रमुख तेल आयातक देशों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर है। भारत अपनी घरेलू जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। यदि वैश्विक बाजार में क्रूड ऑयल के दाम इसी स्तर पर बने रहते हैं या इनमें और गिरावट आती है, तो भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) का आयात बिल कम होगा और उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव घटेगा। इससे घरेलू बाजार में सरकारी तेल कंपनियों को ईंधन की दरों में कटौती करने की गुंजाइश मिलेगी, जिससे आने वाले दिनों में आम जनता को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी राहत मिल सकती है।
