भारतीय शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सप्ताह बुल्स (तेजड़ियों) ने जबरदस्त वापसी करते हुए लगातार जारी गिरावट के सिलसिले को थाम लिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की दोबारा लौटती खरीदारी और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों ने घरेलू बाजार को मजबूती प्रदान की है। इस शानदार रिकवरी के चलते बीते हफ्ते नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी (Nifty) 2.59 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,383.60 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स (Sensex) 2.68 प्रतिशत उछलकर 78,094.64 के स्तर पर जा पहुंचा, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट फिर से मजबूत हुआ है।
आरबीआई एमपीसी बैठक का फैसला
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले नए कारोबारी सप्ताह में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक का निर्णय बाजार की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। तीन दिवसीय एमपीसी बैठक की शुरुआत हो चुकी है और इसके फैसलों का ऐलान 5 अगस्त को किया जाएगा। शेयर बाजार के निवेशक मुख्य रूप से इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है और महंगाई व जीडीपी ग्रोथ पर क्या कमेंट्री देता है। यदि आरबीआई का रुख सकारात्मक और राहत भरा रहता है, तो बैंकिंग, एनबीएफसी और ऑटोमोबाइल्स सेक्टर के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिल सकती है।
Q1 FY27 कॉर्पोरेट नतीजे
रिजर्व बैंक की पॉलिसी के अलावा, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) के वित्तीय नतीजे भी बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इस हफ्ते देश की कई दिग्गज और बड़ी कंपनियां अपनी वित्तीय रिपोर्ट पेश करने वाली हैं। बाजार का मौजूदा वैल्यूएशन टिकाऊ रहेगा या नहीं, यह पूरी तरह से कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर निर्भर करेगा। जिन कंपनियों के नतीजे बाजार की उम्मीदों के अनुरूप या उससे बेहतर आएंगे, उनके शेयरों में निवेशकों को कमाई का शानदार मौका मिल सकता है।
सेंसेक्स 80,000 की ओर
विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि बुल्स की वापसी हो चुकी है, लेकिन क्या सेंसेक्स फिर से 80,000 के ऐतिहासिक स्तर को पार कर पाएगा, यह आने वाले ट्रिगर्स पर निर्भर करेगा। आरबीआई पॉलिसी और कॉर्पोरेट अर्निंग्स के अलावा, वैश्विक बाजारों का रुख, विदेशी निवेशकों का इनफ्लो और कच्चे तेल की चाल जैसे ट्रिगर्स भी अहम साबित होंगे। यदि सभी वैश्विक और घरेलू कारक अनुकूल रहते हैं, तो आईटी, बैंकिंग, ऑटो और मेटल जैसे प्रमुख सेक्टर्स बाजार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का काम करेंगे। ऐसे में निवेशकों को चुनिंदा और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए।
