अध्यात्म

Sawan Somvar Vrat Katha In Hindi: सावन के सोमवार की कथा क्या है, श्रावण पहले सोमवार की व्रत कथा, सावन सोमवार शिव जी की कहानी

Sawan Somvar Vrat Ki Katha In Hindi: भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए हर साल बड़ी संख्या में भक्तजन सावन सोमवार का व्रत रखते हैं। यदि आप भी सावन सोमवार का व्रत रख रहे हैं तो पहले इस दिन पढ़ी जाने वाली शिव जी और मां पार्वती से जुड़ी व्रत कथा के बारे में जान लें।

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सावन सोमवार के व्रत पर कौन सी कथा पढ़ें?

Sawan Somvar Vrat Ki Katha: भगवान शिव को समर्पित सावन का पवित्र महीना चल रहा है। आज 3 अगस्त 2026 को सावन का पहला सोमवार है। वहीं, दूसरा सोमवार 10 अगस्त, तीसरा सोमवार 17 अगस्त और चौथा सोमवार 24 अगस्त 2026 को है। शास्त्रों के अनुसार, जो भी भक्त सावन सोमवार के दिन देवों के देव महादेव की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करता है और व्रत रखता है, उसे भगवान शिव की विशेष कृपा और मनोवांछित फल का आशीर्वाद मिलता है। हालांकि, सावन सोमवार की पूजा इस दिन की व्रत कथा पढ़े बिना अधूरी होती है। आज यहां से आप श्रावण यानी सावन सोमवार की कथा पढ़ सकते हैं।

सावन सोमवार व्रत की कथा

शिव जी से मां पार्वती ने किया आग्रह

पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में किसी नगर में एक धनी साहूकार रहता था, जिसे पुत्र न होने का बहुत दुख था। साहूकार को एक पुत्र की प्राप्ति हो जाए, इसके लिए उसने हर सोमवार को शिव-पार्वती जी की पूजा और व्रत रखना शुरू किया। साहूकार की भक्ति से एक दिन माता पार्वती खुश हुईं और देवों के देव महादेव से उसकी इच्छा को पूरी करने का आग्रह किया।

शिव जी ने दिया साहूकार को वरदान

भगवान शिव ने माता पार्वती को समझाया कि साहूकार इस समय कर्म बंधन से बंधा है, लेकिन देवी ने साहूकार की भक्ति का मान रखा और उसकी इच्छा को पूरी करने के लिए हठ करने लगी। तब शिव जी ने माता पार्वती की बात मानी और साहूकार को पुत्र प्राप्ति का वरदान दे दिया, लेकिन साथ ही देवी को बताया कि इस पुत्र की उम्र लंबी नहीं होगी। ये केवल 12 वर्ष की आयु तक ही जीवित रहेगा।

बेटे को पढ़ने के लिए भेज दिया काशी

इसके बाद मां पार्वती साहूकार के समक्ष प्रकट हुईं और उसे पूरी बात बताई, जिसे सुन साहूकार को न खुशी हुई और न ही दुख हुआ। इसके कुछ समय के बाद साहूकार को एक पुत्र की प्राप्ति हो गई। जब पुत्र 11 साल का हो गया तो साहूकार ने उसे अपने मामा के साथ काशी में पढ़ाई करने के लिए भेज दिया, लेकिन काशी जाने से पहले जगह-जगह पर रुककर यज्ञ कराने को कहा। साथ ही ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा देने के लिए धन दिया।

एक नगर में करवाया यज्ञ

मामा-भांजे ने साहूकार की बात मानी और काशी में प्रवेश करने से पहले एक जगह पर यज्ञ करवाया और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा भी दी। जब मामा-भांजा काशी पहुंचने वाले थे तो उससे पहले एक नगर पड़ा, जहां नगर के राजा की बेटी का विवाह हो रहा था। राजकुमारी की शादी आंख से काने एक राजकुमार से होने वाली थी, जिसके बारे में नगर के राजा और उसकी बेटी को नहीं पता था।

साहूकार के बेटे से हुई राजकुमारी की शादी

राजकुमार और उसके पिता नहीं चाहते थे कि ये बात राजा को पता चले। ऐसे में उन्होंने साहूकार के बेटे से राजकुमारी की शादी कराने की योजना बनाई। उन्होंने सोचा शादी के बाद वो साहूकार के बेटे को कुछ पैसे दे देंगे, जिसे लेकर वो चला जाएगा, लेकिन साहूकार का बेटा बहुत ईमानदार था। वो राजकुमारी को धोखा नहीं देना चाहता था। इसलिए उसने विवाह के दौरान राजकुमारी की चुन्नी पर पूरी बात लिख थी।

साहूकार के बेटे की हुई मृत्यु

राजकुमारी ने बिना देर करे पूरी बात अपने माता-पिता को बताई, जिसके बाद उन्होंने अपनी बेटी को विदा नहीं किया। हालांकि, साहूकार का बेटा अपने मामा के साथ काशी पहुंच गया। जिस दिन साहूकार का बेटा 12 साल का हुआ, उसी दिन काशी में उसके मामा ने एक विशाल यज्ञ करवाया। यज्ञ वाले दिन बालक की तबीयत सुबह से ही खराब हो रही थी, जिसके कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई।

मां पार्वती ने की विनती

अपने भांजे को जमीन पर मृत पड़ा देख वो रोने लगा, जिससे आसपास के लोग वहां जमा हो गए। संयोगवश उसी समय शिव जी माता पार्वती के साथ वहां से कैलाश जा रहे थे। मां पार्वती को मामा को देख चिंता हुई और शिव जी से उसके दुख को दूर करने की विनती की। फिर शिव जी ने बताया कि ये उसी साहूकार का बेटा है, जिसे मैंने पहले वरदान दिया था। ये 12 साल का हो गया है, जिसके कारण इसकी मृत्यु हो गई है।

शिव जी ने दिया वरदान

मां पार्वती को ये बात सुन दुख हुआ और उन्होंने शिव जी से उसे जीवित होने का वरदान देने को कहा। शिव जी ने मां पार्वती की बात मानी और साहूकार के बेटे को उसके प्राण वापस कर दिए। इसके बाद बालक ने काशी में अपनी पढ़ाई पूरी की और एक दिन अपने पिता के पास वापस जाने का फैसला किया।

राजा ने किया राजकुमारी को विदा

घर जाने से पहले मामा-भांजा उसी नगर में जा पहुंचे जहां बालक का विवाह हुआ था। राजकुमारी ने साहूकार के बेटे को पहचान लिया और उसे अपने साथ महल ले गई, जहां उसकी खूब खातिरदारी की गई। कुछ दिन तक वहां रहने के बाद राजा ने साहूकार के बेटे के साथ राजकुमारी को विदा कर दिया।

शिव जी ने सपने में दिए दर्शन

साहूकार का बेटा राजकुमारी के साथ अपने घर जा पहुंचा, जिसे देख उसके माता-पिता बहुत खुश हुए। उसी रात साहूकार के सपने में भगवान शिव आए और उन्होंने कहा 'तेरे सोमवार के दिन मेरी पूजा करने, व्रत रखने और व्रत की कथा पढ़ने से मैं बहुत खुश हुआ, जिससे प्रसन्न होकर मैं तेरे पुत्र को लम्बी आयु प्रदान कर रहा हूं।' साथ ही कहा अब से जो भी व्यक्ति सोमवार के दिन मेरी पूजा करेगा, व्रत रखेगा और कथा पढ़ेगा, उसके सभी दुख मैं दूर करूंगा।

Nidhi Jain
निधि जैनauthor

निधि जैन Times Now नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के तौर पर जुड़ी हैं। इन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 साल से ज्यादा का अनुभव है। पढ़ने और लिखने के प्रति इनकी रुचि ही इन्हें जर्नलिज्म की ओर लेकर आई। निधि अब तक हेल्थ, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों पर 4,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुकी हैं।

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