US-Iran फरवरी से चल रहे युद्ध को खत्म करने पर सहमत हो गए हैं। इसके लिए दोनों देशों के बीच शुक्रवार 19 जून को स्विट्जरलैंड में समझौता होने वाला है। इस समझौता के बाद Hormuz Strait से ऑयल और गैस की सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद है। इस डील की उम्मीद के चलते ही क्रूड ऑयल के दाम पहले ही घट चुके हैं।
वहीं, एनर्जी मार्केट के तमाम एनालिस्टों के मुताबिक आने वाले दिनों में होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद LNG के दाम 40 फीसदी तक घट सकते हैं।फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG का भाव $18-20 प्रति MMBtu है। होर्मुज स्ट्रेट से LNG का फ्लो सामान्य होने पर रेट $12-15 प्रति MMBtu तक गिर सकते हैं।
भारत का लगभग 60% LNG इंपोर्ट कतर और UAE से होता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा तब रुक गया जब लड़ाई की वजह से होर्मुज से होकर बहने वाले पानी पर असर पड़ा और जरूरी रीजनल सप्लाई इंफ्रास्ट्रक्चर ऑफलाइन हो गया। इसके बाद भारतीय खरीदारों को रिप्लेसमेंट कार्गो के लिए स्पॉट मार्केट में जाना पड़ा, जिससे खरीदने की लागत तेज़ी से बढ़ गई। संकट के पीक पर LNG की कीमतें $25/MMBtu से ऊपर चली गई थीं और रुकावट के दौरान औसतन $17-18/MMBtu थीं।
भारत को राहत
फिलहाल, भारत को LNG की ऊंची कीमतों के चलते कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी के बीच बढ़ता आयात बिल और सब्सिडी सरकार के लिए राजकोषीय स्तर पर चुनौतियां खड़ी कर रहा है। वहीं, उद्योगों की लागत बढ़ने की वजह से महंगाई भी बढ़ रही है। LNG के दाम घटने से खासतौर पर उन उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, जो CNG-PNG का इस्तेमाल करते हैं।
भारत के लिए क्यों अहम?
भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी क्रूड ऑयल और नैचुरल गैस का 50 फीसदी आयात करता है। दुनिया की करीब 20 फीसदी ऑयल और गैस सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है। इसके बंद होने की वजह से दुनियाभर में ऑयल और गैस के दाम बढ़ गए हैं। यह रुकावट भारत की एनर्जी सिक्योरिटी और इम्पोर्ट कॉस्ट के लिए सीधा खतरा बन जाती है। एनालिस्ट मानते हैं कि क्रूड ऑयल की कीमतों में $10 की गिरावट से भारत का सालाना इम्पोर्ट बिल $13-15 बिलियन तक कम हो सकता है।
होर्मुज खुलने का क्या होगा असर?
रेटिंग एजेंसी ICRA के मुताबिक ईरान और अमेरिका के बीच अगर समझौता सफल होता है, तो क्रूड और ऑयल के दाम कम होंगे। लेकिन, युद्ध पूर्व स्थिति आने में समय लगेगा। क्योंकि, युद्ध की वजह से क्रूड का करीब 1 कराेड बैरल प्रति दिन उत्पादन घटा है। इसक अलावा गैस के उत्पादन में भी कमी आई है। खासतौर पर इजरायली और ईरानी हमलों में ऑयल और गैस से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर को जो नुकसान पहुंचा है, उसे ठीक होने में लंबा समय लग सकता है।
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