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क्या ट्रंप के कहने भर से "बहने लगेगा ऑयल" कब तक भरेंगे ग्लोबल इकोनॉमी और ऑयल सप्लाई के घाव?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि होर्मुज स्ट्रेट को खोल दिया गया। अब "ऑयल को बहने दो", लेकिन क्या यह इतना आसान है? अमेरिकी ब्लॉकेड से ग्लोबल इकोनॉमी को जो घाव लगे हैं आखिर कब तक भरेंगे?

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होर्मुज खुला लेकिन, नहीं टला है संकट
Authored by: Yateendra Lawaniya
Updated Jun 15, 2026, 12:26 IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के मुताबिक US-IRAN के बीच डील हो चुकी है। ट्रंप ने Truth Social पर इसका ऐलान करते हुए कहा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ डील अब पूरी हो गई है। सभी को बधाई! मैं होर्मुज स्ट्रेट को टोल फ्री खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं, और साथ ही, यूनाइटेड स्टेट्स नेवल ब्लॉकेड को तुरंत हटाने की भी मंजूरी देता हूं। दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू करो। तेल बहने दो!" लेकिन, सवाल ये है कि क्या ट्रंप के कहने भर से ऑयल बहने लगेगा? क्योंकि, ईरान के खिलाफ अमेरिकी युद्ध और ब्लॉकेड ने ग्लोबल इकोनॉमी और ऑयल सप्लाई को गहरे घाव दिए हैं।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) सहित तमाम एक्सपर्ट, एनालिस्ट और रिसर्च एजेंसी बता चुकी हैं कि होर्मुज ब्लॉकेड भले ही ट्रंप के एक आदेश से खुल सकता है। लेकिन, ट्रंप और अमेरिका लाख कोशिश करें, तब भी ऑयल और गैस की सप्लाई आसानी से युद्ध पूर्व स्तर पर नहीं पहुंच पाएगी। इसके अलावा ग्लोबल इकोनॉमी को जो गहरे घाव लगे हैं, उन्हें भरने में कई वर्ष लग सकते हैं। बशर्ते इस बीच होर्मुज बंदी जैसा कोई और ग्लोबल संकट सामने नहीं आए।

एशिया पर सबसे गहरा असर

Hormuz Strait बंद होने का सबसे गहरा असर एशिया पर पड़ा है। भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, इंडोनेशिया जैसे एशियाई देशों को क्रूड ऑयल, गैस, ATF, डीजल और पेट्रोल सहित तमाम उत्पाद होर्मुज के रास्ते ही मिलते हैं। यहां तक कि यूरोप भी पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और गैस के लिए काफी हद तक होर्मुज पर निर्भर रहा है। बात सिर्फ ऑयल और गैस तक सीमित नहीं है। बल्कि, इसकी वजह से मैन्यूफैक्चरिंग से महंगाई तक असर देखने को मिला है। तीन महीने तक क्रूड की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही है। इसकी वजह से इन देशों पर भारी बोझ पड़ा है। इस बोझ का असर आने वाली तिमाही के आंकड़ों में दिखेगा। ऐसे में होर्मुज खुलने से एशिया को राहत तो जरूर मिलेगी, लेकिन संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। क्योंकि, आम लोगों तक जो महंगाई का दर्द पहुंचा है, वह कई महीनों तक बरकरार रह सकता है।

तुरंत नहीं जाएंगी दिक्कतें

ऊर्जा सलाहकार कंपनी वुड मैकेंजी के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट खुलते ही तेल और गैस की आपूर्ति फिर शुरू हो जाएगी, लेकिन कई महीनों से जमा हुई बाधाएं तुरंत खत्म नहीं होंगी। मैकेंजी की रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज के बंद होने पश्चिम एशिया में ऑयल एंड गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर को जो नुकसान पहुंचा है, उससे उबरने में दुनिया को पूरा एक साल लग सकता है। इसके अलावा अब भी होर्मुज में जोखिम बरकरार है। खासतौर पर जब तक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर खाड़ी में मौजूद हैं, फिर से झड़प की आशंकाएं बनी रहेंगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि सैकड़ों तेल टैंकरों को एशियाई बंदरगाहों तक पहुंचने में ही कई सप्ताह लगेंगे। इसके बाद वापसी और सामान्य व्यापार बहाली में भी महीनों का समय लग सकता है। यदि सुरक्षा संबंधी चिंताएं या बीमा की समस्या बनी रहती है तो प्रक्रिया और लंबी हो सकती है।

महंगाई का खतरा अभी बरकरार

तेल की कीमतों में भले ही 15 फीसदी तक की नरमी आ चुकी है। लेकिन, एशिया में अब भी महंगाई का दबाव बना रह सकता है। इसके अलावा LNG की कीमतें आमतौर पर तेल के दामों से जुड़ी होती हैं और इनमें तीन से छह महीने की देरी से असर दिखता है। इसका मतलब है कि मार्च में तेल की जो ऊंची कीमतें देखी गई थीं, उनका पूरा असर गैस बाजार में आने वाले महीनों में दिखाई देगा। वुड मैकेंजी का अनुमान है कि गैस बाजार में कीमतों का पूरा दबाव अभी सामने आना बाकी है और आने वाले महीनों में स्थिति संवेदनशील बनी रह सकती है।

खाद और खाद्य सुरक्षा पर भी असर

इस संघर्ष का सबसे बड़ा झटका वैश्विक खाद बाजार को लगा है। ईरान, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन मिलकर दुनिया की यूरिया आपूर्ति का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा उपलब्ध कराते हैं। सप्लाई बाधित होने से दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में बुवाई का मौसम प्रभावित हुआ है। NYT की एक रिपोर्ट में एशियाई विकास बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अल्बर्ट पार्क दावा करते हैं कि बुवाई के मौसम में व्यवधान लंबा चलता है, तो फसल उत्पादन घट सकता है और खाद्य सुरक्षा की समस्या पैदा हो सकती है। हालांकि, इसका असर तुरंत नहीं बल्कि साल के आखिर में दिखाई देगा।

किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

सुरक्षित समुद्री मार्ग बहाल होने से पाकिस्तान, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों को सबसे अधिक राहत मिलने की उम्मीद है। ये देश मध्य-पूर्वी ऊर्जा पर काफी निर्भर हैं। फिलीपींस तो पहले ही राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित कर चुका है और बिजली खपत में कटौती के आदेश दे चुका है। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे विकसित देशों ने अपने रणनीतिक भंडार और मजबूत वित्तीय स्थिति के दम पर शुरुआती झटका सह लिया, लेकिन उन्हें भी महंगे तेल और कमजोर सप्लाई चेन का सामना करना पड़ा है।

Hormuz Reopens

Hormuz Reopens

एक साल तक रह सकता है असर

NHK सहित कई जापानी मीडिया पोर्टल्स की रिपोर्ट के मुताबिक जापान और दक्षिण कोरिया की कंपनियां नेफ्था की कमी से जूझ रही हैं, जिसका इस्तेमाल प्लास्टिक और खाद्य पैकेजिंग उद्योग में होता है। इसक अलावा हीलियम और LPG जैसी अन्य वस्तुओं की कमी ने भी उद्योग और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर डाला है। जापान की एजेंसी फॉर नेचुरल रिसोर्सेज एंड एनर्जी के मुताबिक पश्चिम एशिया से नेफ्था की सप्लाई सामान्य होने के बाद भी उद्योगों पर इसका असर कम से कम एक साल तक रह सकता है। उनके मुताबिक सप्लाई चेन की छोटी-छोटी कड़ियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और उन्हें फिर से सामान्य होने में लंबा समय लगेगा।

भारत के लिए क्या मायने?

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। हालांकि, भारत ने आयात के लिए डायवर्सिफिकेशन का रास्ता अपनाया है। लेकिन, पश्चिम एशिया से भारत को होने वाली स्थिर, त्वरित और किफायती सप्लाई का असर जरूर पड़ा है। ORF की एक रिपोर्ट के मुताबिक होर्मुज बंदी से भारत सबसे ज्यादा प्रभावित बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इंडियन क्रूड बास्केट फरवरी के $69 से मार्च में $126 (पीक $157) पहुंच गया। Q2-Q3 2026 में CPI इन्फ्लेशन 5-6% होने का अनुमान। तेल, LNG, फर्टिलाइजर और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट से इन्फ्लेशन बढ़ा है। इन्हीं वजहों से Fitch Ratings ने FY27 के लिए भारत का GDP ग्रोथ फोरकास्ट घटाकर 6.4% कर दिया है। वहीं, Moody's ने 2026 में भारत की GDP ग्रोथ के लिए 6% का अनुमान लगाया है। यहां तक कि RBI ने भी भारतीय इकोनॉमी की ग्रोथ को लेकर अपने अनुमान में कटौती की है और महंगाई बढ़ने की आशंका जताई है।

हालांकि, पश्चिम एशिया में शांति आखिर में भारत के लिए फायदे का सौदा ही है। खासतौर पर अगर ईरानी तेल अमेरिकी प्रतिबंधों के बिना ओपन मार्केट में आता है, तो यह भारत के लिए बड़ा पॉजिटिव फैक्टर होगा, क्योंकि ईरान और भारत के बीच द्विपक्षीय कारोबार की संभावनाएं काफी ज्यादा हैं।

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