Dollar-Rupee Swap Auction : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की बैंकिंग व्यवस्था में लंबे समय के लिए कैश बढ़ाने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय बैंक अगले सप्ताह 5 अरब डॉलर (4,84,91,27,50,000 रुपये) की डॉलर-रुपया खरीद-बिक्री अदला-बदली यानी स्वैप नीलामी आयोजित करेगा। न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक आरबीआई ने बुधवार को जारी एक सर्कुलर में बताया कि यह नीलामी 26 मई को होगी और इसकी अवधि तीन साल की रहेगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी बनाए रखना और वित्तीय स्थिरता को मजबूत करना है।
क्या है डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी
डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी एक ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमें बैंक अपने पास मौजूद अमेरिकी डॉलर आरबीआई को बेचते हैं। इसके बदले में आरबीआई बैंकों को रुपये उपलब्ध कराता है। तय अवधि पूरी होने के बाद बैंक उन्हीं डॉलर को वापस खरीद लेते हैं। इस प्रक्रिया से बैंकों के पास रुपये की उपलब्धता बढ़ जाती है और बाजार में नकदी की स्थिति बेहतर होती है। आरबीआई ने बताया कि इस बार स्वैप की अवधि तीन वर्ष की होगी। इसका मतलब यह है कि बैंक तीन साल तक अतिरिक्त रुपये का उपयोग कर सकेंगे। इससे बैंकों को कर्ज देने और वित्तीय गतिविधियों को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
रुपया कमजोर होने के बीच फैसला
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर मजबूत होने और विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव का असर रुपये पर देखा जा रहा है। ऐसे माहौल में आरबीआई का यह फैसला बाजार को स्थिरता देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से विदेशी मुद्रा बाजार में भरोसा बढ़ेगा और बैंकों को लंबी अवधि के लिए सस्ती नकदी मिल सकेगी। इससे वित्तीय संस्थानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
नीलामी की प्रक्रिया कैसे होगी
आरबीआई के अनुसार, इस नीलामी में हिस्सा लेने वाले बैंकों को प्रीमियम के आधार पर बोली लगानी होगी। प्रीमियम वह राशि होगी जो बैंक स्वैप अवधि के लिए आरबीआई को देने के लिए तैयार होंगे। बैंकों को अपनी बोली में प्रीमियम को दो दशमलव स्थान तक बताना होगा। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह बहु-मूल्य आधारित नीलामी होगी। इसका मतलब यह है कि जिन बैंकों की बोलियां स्वीकार की जाएंगी, उन्हें उसी प्रीमियम दर पर सौदा मिलेगा जो उन्होंने बोली में बताई होगी। इससे नीलामी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनेगी।
न्यूनतम बोली की सीमा तय
आरबीआई ने नीलामी में भाग लेने के लिए न्यूनतम बोली आकार भी तय किया है। कोई भी बैंक कम से कम एक करोड़ डॉलर की बोली लगा सकेगा। इसके बाद 10 लाख डॉलर के गुणक में बोली बढ़ाई जा सकेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य नीलामी को व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है। बैंकिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी बड़ी राशि की स्वैप नीलामी से बाजार में नकदी की स्थिति मजबूत होगी। इससे बैंकों के लिए धन जुटाना आसान होगा और ब्याज दरों पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
अर्थव्यवस्था को मिल सकती है मजबूती
आरबीआई का यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी रहने से उद्योगों और कारोबार को कर्ज उपलब्ध कराने में आसानी होगी। साथ ही आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर बाजार में नकदी पर्याप्त रहती है तो निवेश और उपभोग दोनों को बढ़ावा मिलता है। इससे आर्थिक विकास को समर्थन मिलता है। आरबीआई लगातार ऐसे कदम उठा रहा है ताकि वित्तीय बाजार स्थिर बने रहें और अर्थव्यवस्था पर वैश्विक दबाव का असर कम हो।
