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NSE IPO : खत्म हुआ 10 साल का इंतजार, जानें कब तक होगी लिस्टिंग, कितने शेयर बिकेंगे?

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज NSE IPO का 10 साल का इंतजार अब खत्म हो गया है। कंपनी ने पब्लिक इश्यू के लिए सेबी को अपना आवेदन सौंप दिया है। अब जल्द ही कंपनी बाजार में लिस्ट होगी।

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एनएसई ने आईपीओ के लिए किया आवेदन

NSE IPO TIMELINE : भारतीय शेयर बाजार के तमाम निवेशकों 10 साल से जिस IPO इंतजार कर रहे हैं, आखिरकार उसका DRHP फाइल कर दिया गया है। NSE ने बुधवार रात को पब्लिक इश्यू के लिए दिए आवेदन में IPO से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने 17 जून 2026 को अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) दाखिल कर दिया है। खास बात यह है कि यह IPO पूरी तरह Offer For Sale (OFS) होगा और कंपनी कोई नया शेयर जारी नहीं करेगी। DRHP के मुताबिक कुल 14.89 करोड़ (148.90 million) शेयर बेचे जाएंगे।

तारीखइवेंट
17 जून 2026NSE ने DRHP फाइल किया
जून-जुलाई 2026SEBI की टिप्पणियां (Observation Letter)
जुलाई-अगस्त 2026RHP फाइलिंग और प्राइस बैंड घोषणा
RHP के बादAnchor Book (IPO खुलने से 1 दिन पहले)
IPO खुलने के 3 दिन बादइश्यू बंद
इश्यू बंद होने के T+3 दिन के भीतरलिस्टिंग संभव

IPO की सबसे बड़ी बातें

NSE का IPO पूरी तरह OFS आधारित है। इसका मतलब IPO से मिलने वाला पैसा कंपनी के पास नहीं जाएगा बल्कि मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगा। DRHP के अनुसार कुल 148,905,525 इक्विटी शेयर बिक्री के लिए रखे गए हैं। NSE के पास कोई प्रमोटर नहीं है और इसे DRHP में भी स्पष्ट रूप से बताया गया है।

NSE कितना बड़ा है?

DRHP के मुताबिक NSE ने FY26 में दुनिया के इक्विटी डेरिवेटिव्स कारोबार का 51.18% मार्केट शेयर संभाला। वहीं, इंडेक्स ऑप्शन सेगमेंट में वैश्विक हिस्सेदारी 89.02% रही। इसके साथ ही देशभर के 99% से ज्यादा पिनकोड से जुड़े 12.9 करोड़ से अधिक यूनिक निवेशक NSE प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। फिलहाल, 2,978 सूचीबद्ध संस्थाएं NSE पर मौजूद हैं।

सबसे प्रॉफिटेबल एक्सचेंज में एक

DRHP में शामिल Redseer रिपोर्ट के मुताबिक FY26 में NSE का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) मार्जिन 55.05% रहा। इसके अलावा रिटर्न ऑन एवरेज इक्विटी (RoAE) लगभग 33% रहा। यह दुनिया के प्रमुख सूचीबद्ध एक्सचेंज समूहों में सबसे मजबूत लाभप्रदता प्रोफाइल में से एक है। इसके अलावा DRHP के मुताबिक NSE हर दिन दुनिया के कुल ट्रेड्स का एक बड़ा हिस्सा प्रोसेस करता है। FY26 में वैश्विक इक्विटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स में उसका हिस्सा 51% से ज्यादा रहा। कंपनी ने अपनी तकनीकी क्षमता और लो-लेटेंसी ट्रेडिंग सिस्टम को प्रमुख प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बताया है।

FY26 में NSE का वित्तीय प्रदर्शन

DRHP में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹10,474 करोड़ रहा है। वहीं, नेट टैन्जिबल एसेट्स ₹44,865 करोड़ के रहे हैं। जबकि, मॉनेटरी एसेट्स ₹34,760 करोड़ के हैं। इसके अलावा NSE की क्लियरिंग इकाई NCL ने FY26 में कैश मार्केट में 88.42% मार्केट शेयर

इक्विटी डेरिवेटिव्स में 91.04% और करेंसी डेरिवेटिव्स में 74.09% मार्केट शेयर हासिल किया है।

निवेशकों के लिए क्या मायने?

NSE भारत के वित्तीय बाजार का सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थान माना जाता है। मजबूत लाभप्रदता, ऊंचा बाजार हिस्सा और लगभग एकाधिकार जैसी स्थिति इसे भारतीय IPO बाजार की सबसे चर्चित पेशकशों में से एक बना सकती है। हालांकि, अंतिम मूल्य बैंड और वैल्यूएशन सामने आने के बाद ही यह तय होगा कि निवेशकों को इसमें कितनी आकर्षक एंट्री मिलती है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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