बिजनेस

100 बार दुत्कार, पर नहीं मानी हार; खड़ी की ₹3.3 लाख करोड़ की Canva, अब हार्वर्ड में पढ़ाई जा रही मेलानी पर्किन्स की Success Story

अपने आइडिया पर भरोसा और जूनून किसे कहते हैं, यह मेलानी पर्किन्स की कहानी से पता चलता है। निवेशकों ने 100 बार दुत्कार, फिर भी हार नहीं मानी और आज 3 लाख करोड़ से ज्यादा की कंपनी खड़ी कर दी।

Image

लगातार 3 साल रिजेक्शन झेलने के बाद मिली कामयाबी

Success Story of Melanie Perkins : स्टार्टअप शुरू करना और उसे कामयाबी के शिखर तक ले जाना कितना मुश्किल है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि दुनिया के 50 फीसदी स्टार्टअप शुरुआती 5 साल में ही दम तोड़ देते हैं। वहीं, 15 साल तक सिर्फ 25 फीसदी ही टिक पाते हैं।

हार्वर्ड बिजनेस स्कूल (Harvard Business School) के प्रोफेसर विलियम सालमैन कहते हैं "बाजार में हर अमेजन या उबर के पीछे ऐसी दर्जनों कंपनियां होती हैं, जिन्हें कोई याद नहीं रख पाता।" लेकिन इस बेहद मुश्किल और रिस्की सफर में कुछ ऐसी कहानियां भी होती हैं, जो इतिहास रच देती हैं। ऐसी ही एक कहानी कैन्वा (Canva) की फाउंडर मेलानी पर्किन्स (Melanie Perkins) की है।

मेलानी पर्किन्स को एक समय 100 से ज्यादा इनवेस्टर्स ने रिजेक्ट कर दिया था, लेकिन आज उनकी कंपनी दुनिया की सबसे मूल्यवान फीमेल-लेड (महिला नेतृत्व वाली) कंपनियों में से एक बन चुकी है और हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू भी इसकी मिसाल दे रहा है। दुनिया के 190 देशों में करीब 25 करोड़ लोग इसका इस्तेमाल करते हैं और कंपनी का वैल्यूएशन करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है।

आइडिया जिसने बदली दुनिया?

बात साल 2007 की है। मेलानी पर्किन्स ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में एक पार्ट-टाइम नौकरी कर रही थीं, जहां वे छात्रों को डेस्कटॉप डिजाइन सॉफ्टवेयर (जैसे फोटोशॉप आदि) चलाना सिखाती थीं। वे पारंपरिक डिजाइन सॉफ्टवेयर्स से बहुत परेशान थीं। वे बहुत महंगे थे, बेहद जटिल थे, और उन्हें सीखने के लिए छात्रों को पूरा एक सेमेस्टर लगाना पड़ता था। मेलानी के दिमाग में एक सीधा सा सवाल कौंधा, "क्या कोई ऐसा तरीका नहीं हो सकता, जिससे डिजाइनिंग को बेहद आसान, सुलभ और सस्ता बनाया जा सके?" यहीं से शुरुआत हुई एक ऐसे ऑनलाइन टूल की, जो बिना किसी टेक्निकल नॉलेज के किसी से भी शानदार डिजाइन बनवा सके।

3 साल में 100 से ज्यादा 'रिजेक्शन'

एक मैग्जीन को दिए इंटरव्यू में मेलानी ने बताया कि उन्हें पूरा यकीन था कि उनका आइडिया बहुत दमदार है। लेकिन, इनवेस्टर्स को उसे समझाना उतना ही मुश्किल साबित हुआ। मेलानी जब अपने आइडिया के लिए फंड जुटाने निकलीं, तो उन्हें एक-दो नहीं बल्कि 100 से ज्यादा इनवेस्टर्स ने सीधे मना कर दिया। लगातार 3 साल तक पिच करने के बाद भी उन्हें कोई सफलता नहीं मिल रही थी। लेकिन, मेलानी ने हार नहीं मानी। 3 साल के कड़े संघर्ष के बाद कैनवा को अपना पहला इनवेस्टमेंट मिला।

बदलाव जिसने पलट दी किस्मत

मेलानी ने एक इंटरव्यू में बताया कि जब उन्होंने अपनी 'पिचिंग स्ट्रैटेजी' को बदला, तब जाकर इनवेस्टर्स ने पैसे लगाए। मेलानी ने सीधे समाधान बेचने के बजाय, लोगों की रोजमर्रा की समस्या को सामने रखना शुरू किया। मेलानी के मुताबिक "बहुत से लोग फोटोशॉप जैसी चीजों को देखकर पूरी तरह घबरा जाते हैं। अपनी कहानी को सही तरह से बयां करना बेहद जरूरी है, क्योंकि अगर आपकी ऑडियंस आपकी समस्या को ही नहीं समझेगी, तो वो आपके समाधान को कभी नहीं समझ पाएगी।"

आज 190 देशों में फैला है साम्राज्य

मेलानी के उसी 'प्रॉब्लम-सॉल्विंग' एटीट्यूड और कभी हार न मानने वाले जज्बे का नतीजा आज पूरी दुनिया के सामने है। आज दुनिया के 190 देशों में करीब 6 करोड़ से ज्यादा एक्टिव यूजर्स हैं। हाल ही में मिले $200 मिलियन के नए निवेश के बाद Canva Valuation $40 बिलियन (करीब ₹3.3 लाख करोड़) के पार पहुंच गया है।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

    और पढ़ें
    End of Article