भारत में करोड़ों परिवारों की रसोई एलपीजी (LPG) सिलेंडर पर निर्भर है। हाल के दिनों में गैस सिलेंडर की बुकिंग और उनके बीच के समयांतराल (Delivery Gap) को लेकर कई तरह की खबरें और भ्रम सामने आ रहे हैं। आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अब उन्हें अगला सिलेंडर बुक करने के लिए 25 दिन या 45 दिन का लंबा इंतजार करना होगा? रसोई गैस की कालाबाजारी रोकने और समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार और तेल कंपनियों (OMCs) ने समय-समय पर बुकिंग नियमों में बदलाव किए हैं, जिन्हें जानना उपभोक्ता के लिए बेहद जरूरी है।
बुकिंग के बीच कितने दिनों का अंतर जरूरी है?
सरकारी नियमों के अनुसार, एक सामान्य एलपीजी ग्राहक (General Category) साल भर में सब्सिडी वाले 12 सिलेंडर प्राप्त करने का हकदार होता है। पहले दो सिलेंडरों की बुकिंग के बीच 15 दिनों का अनिवार्य अंतर (Gap) रखा गया था। यानी आप एक सिलेंडर मिलने के ठीक 15 दिन बाद ही अगला रिफिल बुक कर सकते थे। हालांकि, हालिया अपडेट्स और कुछ विशेष परिस्थितियों में, तेल कंपनियों ने इस गैप को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। कई राज्यों में यह चर्चा है कि भारी मांग या स्टॉक की स्थिति को देखते हुए इस 'वेटिंग पीरियड' को बढ़ाया जा सकता है।
25 दिन और 45 दिन का गणित क्या है?
सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अब ग्राहकों को 25 से 45 दिनों का इंतजार करना होगा। असल में, यह नियम हर किसी पर लागू नहीं होता। यह मुख्य रूप से उन उपभोक्ताओं के लिए है जो एक तय सीमा से ज्यादा सिलेंडर की खपत करते हैं या जहां सप्लाई चेन में बाधा आती है। उज्ज्वला योजना (Ujjwala Yojana) के लाभार्थियों के लिए नियम थोड़े अलग हो सकते हैं क्योंकि उन्हें मिलने वाली सब्सिडी और रिफिल की प्रक्रिया सीधी सरकार से जुड़ी होती है। कुछ विशेष क्षेत्रों में जहां ईंधन की खपत अचानक बढ़ जाती है, वहां कंपनियां अस्थिरता को रोकने के लिए 'अगली बुकिंग' की समय सीमा को अस्थायी रूप से बढ़ा देती हैं।
कालाबाजारी रोकने के लिए 'सप्लाई कंट्रोल'
सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू उपयोग के सिलेंडर का इस्तेमाल व्यावसायिक (Commercial) कार्यों में न हो। अक्सर देखा गया है कि लोग जल्दी-जल्दी बुकिंग करके सिलेंडर स्टॉक कर लेते हैं और फिर उसे महंगे दामों पर बेचते हैं। इसी को रोकने के लिए सॉफ्टवेयर आधारित 'बुकिंग ब्लॉक' सिस्टम लगाया गया है। अगर आप अपने तय समय से पहले बुकिंग करने की कोशिश करते हैं, तो सिस्टम उसे 'इनवैलिड' (Invalid) बता देता है। वर्तमान में अधिकांश क्षेत्रों में 15 से 21 दिनों का औसत गैप अनिवार्य माना जा रहा है, लेकिन पैनिक बाइंग की स्थिति में इसे 30 दिन तक भी देखा गया है।
उपभोक्ता क्या करें?
यदि आपको गैस बुकिंग में समस्या आ रही है या आपका डिस्ट्रीब्यूटर 45 दिन का नियम बता रहा है, तो सबसे पहले अपनी गैस एजेंसी के आधिकारिक मोबाइल ऐप (जैसे- Indane, HP Pay, या Hello BPCL) पर अपनी पात्रता चेक करें। नियम यह भी कहता है कि यदि आपके पास डबल सिलेंडर कनेक्शन (DBC) है, तो आपके लिए नियम थोड़े लचीले हो सकते हैं, लेकिन सिंगल सिलेंडर वालों को अपनी खपत का प्रबंधन सावधानी से करना होगा।
