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Indian Jewellery Market: 2030 तक भारत का आभूषण बाजार 130-150 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है

ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी) के उपाध्यक्ष अविनाश गुप्ता ने कहा कि प्रदर्शकों और खरीदारों की भागीदारी न केवल मजबूत व्यावसायिक भावना को दर्शाती है, बल्कि हमारे रत्न और आभूषण पारिस्थितिकी तंत्र की बढ़ती परिपक्वता को भी दर्शाती है।

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भारत का रत्न और आभूषण उद्योग लगातार मजबूत वृद्धि दर्ज कर रहा है। (फोटो क्रेडिट-iStock)

शनिवार को घोषणा की गई कि घरेलू आभूषण बाजार, जिसकी वर्तमान कीमत लगभग 85-90 अरब डॉलर आंकी गई है, वर्ष 2030 तक बढ़कर 130-150 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह वृद्धि विवाह सीजन की मांग, प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती पसंद, संगठित खुदरा विस्तार और उपभोक्ता विश्वास में बढ़ोतरी से प्रेरित होगी। भारत मंडपम में 'इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया' द्वारा आयोजित 'डीजेजीएफ सिग्नेचर 2026' के दूसरे संस्करण के उद्घाटन के साथ ही उत्तर भारत के आभूषण व्यापार को शुरुआती सीजन में महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला।

ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी) के उपाध्यक्ष अविनाश गुप्ता ने कहा कि प्रदर्शकों और खरीदारों की भागीदारी न केवल मजबूत व्यावसायिक भावना को दर्शाती है, बल्कि हमारे रत्न और आभूषण पारिस्थितिकी तंत्र की बढ़ती परिपक्वता को भी दर्शाती है।

नई सामान्य स्थिति में काम कर रहा है उद्योग

उन्होंने कहा, "आज आभूषण उद्योग एक नई सामान्य स्थिति में काम कर रहा है। सोने पर लगभग 3 प्रतिशत और चांदी पर करीब 5 प्रतिशत प्रीमियम अब सामान्य हो गया है। साथ ही, कम भंडारण चक्र और हर 8-15 दिन में आयोजित होने वाली व्यापारिक प्रदर्शनियां हमें कम जोखिम और अधिक दक्षता के साथ खरीद प्रबंधन की सुविधा देती हैं।"

गुप्ता ने आगे कहा, "विकास के साथ हमें महत्वपूर्ण नियामकीय बदलावों के लिए भी तैयार रहना होगा। भारतीय मानक ब्यूरो के नेतृत्व में एचयूआईडी स्थानांतरण से पारदर्शिता बढ़ेगी, चांदी पर अनिवार्य हॉलमार्किंग लागू की जाएगी और धन शोधन निवारण कानून के अनुपालन में एआई आधारित निगरानी को समर्थन मिलेगा।"

उद्योग मजबूत वृद्धि कर रहा है

भारत का रत्न और आभूषण उद्योग लगातार मजबूत वृद्धि दर्ज कर रहा है। यह क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 7-8 प्रतिशत योगदान देता है और कुल माल निर्यात का 12-14 प्रतिशत हिस्सा रखता है। इससे 50 लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है।

भारत मात्रा के आधार पर दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत हीरों का प्रसंस्करण करता है और सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है। इस कारण वैश्विक मूल्य शृंखला में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है।

130 अरब डॉलर तक पहुंचने के अनुमान

'इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया' के प्रबंध निदेशक योगेश मुदरास ने कहा कि 2030 तक घरेलू आभूषण बाजार के 130 अरब डॉलर तक पहुंचने के अनुमान के साथ यह क्षेत्र संरचित विकास के चरण में प्रवेश कर रहा है। यह वृद्धि त्योहारी मांग, विवाह खरीदारी और बढ़ते औपचारिककरण से संचालित होगी।

दिल्ली बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (टीबीजेए) के अध्यक्ष राम अवतार वर्मा ने कहा कि 'डीजेजीएफ सिग्नेचर 2026' वास्तव में दर्शाता है कि हमारा उद्योग कितनी दूर तक प्रगति कर चुका है। उन्होंने कहा, "इस संस्करण का पैमाना, भागीदारी और उत्साह बेहद प्रभावशाली है।"

(इनपुट- आईएएनएस)

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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