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अमेरिकी छूट का फायदा, भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने 2 करोड़ बैरल रूसी तेल खरीदा

Russian Crude Oil Import: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति में संभावित व्यवधान के बीच, भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने अमेरिका द्वारा जारी 30 दिन की अस्थायी छूट का लाभ उठाते हुए समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। इस कदम से कंपनियां अपने भंडार को मजबूत कर संभावित आपूर्ति संकट का सामना करना चाहती हैं।

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भारत ने अमेरिकी अस्थायी छूट के तहत रूसी तेल की खरीद बढ़ाई (तस्वीर-istock)

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Russian Crude Oil Import: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आपूर्ति में संभावित व्यवधान के बीच, भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने अमेरिका द्वारा जारी 30 दिन की अस्थायी छूट का लाभ उठाते हुए समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक सूत्रों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरों ने लगभग दो करोड़ बैरल रूसी तेल का ऑर्डर दिया है, जो मुख्य रूप से गैर-प्रतिबंधित इकाइयों से लिया गया है। कंपनियां इस मामले में कानूनी राय भी ले रही हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि क्या अमेरिकी छूट के तहत प्रतिबंधित संस्थाओं से भी खरीद की अनुमति दी जा सकती है या नहीं।

अमेरिकी अस्थायी छूट का महत्व

अमेरिका ने यूक्रेन के खिलाफ रूस की सैन्य कार्रवाई के विरोध में रूसी कच्चे तेल की खरीद पर कई पाबंदियां लगाई हैं। हालांकि, पश्चिम एशिया संकट के बढ़ते जोखिम को देखते हुए अमेरिकी प्रशासन ने 30 दिन का विशेष लाइसेंस जारी किया है। इसके तहत पांच मार्च, 2026 से पहले जहाजों पर लोड किए गए रूसी मूल के कच्चे तेल या पेट्रोलियम उत्पादों को भारत में उतारने और सप्लाई करने की अनुमति दी गई है। यह छूट चार अप्रैल, 2026 तक प्रभावी रहेगी, बशर्ते खरीदार भारतीय कानून के तहत पंजीकृत इकाई हो।

भारत की रूसी तेल खरीद में उतार-चढ़ाव

भारत ने 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरने का काम किया, लेकिन हाल के महीनों में अमेरिकी दबाव के कारण इस खरीद में गिरावट आई। फरवरी के अंत तक भारत रूस से प्रतिदिन लगभग 10.4 लाख बैरल तेल खरीद रहा था, जो मई 2023 के 21.5 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर से काफी कम है। अमेरिकी दबाव के चलते फरवरी की शुरुआत में भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते पर सहमति हुई थी, जिसके तहत भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क हटा दिए गए।

समुद्र में फंसे रूसी तेल की स्थिति

वर्तमान में लगभग 1.5 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में टैंकरों में फंसा हुआ है, जबकि लगभग 70 लाख बैरल तेल सिंगापुर के पास खड़े जहाजों में रखा गया है। इसके अलावा, भूमध्य सागर और स्वेज नहर क्षेत्र में भी रूसी तेल के टैंकर मौजूद हैं, जो एक महीने के भीतर भारत पहुंच सकते हैं। इस स्थिति ने भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों को समुद्र में उपलब्ध तेल की खरीद बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है, ताकि वे अपने भंडार को मजबूत रख सकें और पश्चिम एशिया संकट से संभावित आपूर्ति बाधा का मुकाबला कर सकें।

प्रमुख रिफाइनर कंपनियों की गतिविधियां

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) ने दिसंबर 2025 के बाद रूसी तेल की खरीद फिर से शुरू कर दी है। इसके अलावा, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड भी रूसी तेल डिलीवरी के विकल्प तलाश रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय रिफाइनरों को अल्पकालिक राहत दे सकता है, लेकिन चीन जैसे अन्य खरीदारों के साथ प्रतिस्पर्धा के कारण, पश्चिम एशिया से प्रतिदिन 26 लाख बैरल तेल की आपूर्ति में हो रही बाधा को पूरी तरह से भर पाना मुश्किल होगा।

अमेरिका का दृष्टिकोण

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस छूट को अस्थायी बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य वैश्विक तेल प्रवाह को स्थिर बनाए रखना है। उन्होंने साथ ही उम्मीद जताई कि भविष्य में भारत अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाएगा। भारतीय पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा कि भारत ने कभी रूस से तेल खरीद पूरी तरह बंद नहीं की और ऊर्जा स्रोतों में विविधता बनाए रखने की अपनी नीति पर कायम है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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