Independence Day 2025: स्वतंत्रता दिवस 2025 के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़े ऐलान किए। उन्होंने सोलर, न्यूक्लियर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्लीन एनर्जी सेक्टर में हो रही तेज प्रगति और भविष्य की योजनाओं पर जोर दिया। भारत आज भी अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए कई देशों पर निर्भर है और हर साल लाखों-करोड़ रुपये खर्च करके ईंधन आयात करना पड़ता है।
इस स्थिति को बदलने के लिए जरूरी है कि हम ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनें। इसी दिशा में देश में सोलर एनर्जी उत्पादन पिछले कुछ वर्षों में 30 गुना तक बढ़ चुका है। भारत तेज़ी से क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ रहा है और मिशन ग्रीन हाइड्रोजन पर हजारों करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है। साथ ही, न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में भी बड़े फैसले लिए जा रहे हैं, जहां कई नए रिएक्टर पर काम चल रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक परमाणु ऊर्जा की क्षमता को 10 गुना से अधिक बढ़ाया जाए।
2030 तक क्लीन एनर्जी लाएंगे
पीएम मोदी ने कहा कि हमने तय किया था कि हम 2030 तक हम क्लीन एनर्जी लाएंगे। हमने जो संकल्प तय किया था वह हम 50 प्रतिशत पूरा कर चुके हैं। बजट का बड़ा हिस्सा पेट्रोल, गैस लाने में खर्च होता है। अगर हम ऊर्जा में निर्भर न होते तो वो धन देश के युवाओं, गरीबी दूर करने के लिए काम आता। अब हम आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ रहे हैं। हम अब समुद्र मंथन की ओर जा रहे हैं। हम समुद्र के भीतर तेल और गैस भंडार खोजने की दिशा में काम कर रहे हैं। भारत नया मिशन शुरू करने जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि जहां एक ओर दुनिया ग्लोबल वार्मिंग को लेकर चिंतित है, वहीं भारत ने गैर-जीवाश्म आधारित ऊर्जा स्रोतों से अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत प्राप्त करने का महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया है।
देश के 79वें स्वतंत्रता दिवस पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘जब आज दुनिया ग्लोबल वार्मिंग को लेकर चिंतित है, भारत ने तय किया था कि 2030 तक हम देश में स्वच्छ ऊर्जा का योगदान 50 प्रतिशत तक बढ़ा देंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे देशवासियों की क्षमता और दृढ़ संकल्प देखिए कि हमने 2030 के लिए जो लक्ष्य निर्धारित किया था, उसे हमने 2025 में ही हासिल कर लिया, यानी निर्धारित समय से पांच साल पहले... हम दुनिया के प्रति उतने ही संवेदनशील हैं जितने प्रकृति के प्रति जिम्मेदार हैं।’’ गत 30 जून तक भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता 484.8 गीगावाट थी, जिसमें से 242.8 गीगावाट (या 50.08 प्रतिशत) गैर-जीवाश्म-ईंधन स्रोतों से प्राप्त होती है, जिनमें नवीकरणीय ऊर्जा, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।
