Impact Of September Rainfall On Food Inflation:जुलाई-अगस्त में बारिश का आंख-मिचौली ने खाने-पीने की चीजों को जेब पर भारी कर दिया। पहले टमाटर, फिर दूसरी सब्जियों और चावल-गेंहू की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को दो अंकों तक पहुंचा दिया था। लेकिन अब रिटेल खाद्यान्न महंगाई घट रही है। जुलाई के मुकाबले अगस्त में यह 11.51 फीसदी से घटकर 9.94 फीसदी पर आ गई है। इसके अलावा अगस्त के मुकाबले सितंबर में अच्छी बारिश भी महंगाई को आने वाले दिनों में कूल कर सकती है। ऐसा अनुमान है कि सितंबर में बेहतर बारिश होने से खरीफ फसलों का उत्पादन बढ़ सकता है। जिसका असर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में कमी के रूप में दिख सकता है।
धान और सोयाबीन का रकबा बढ़ा
सितंबर के महीने में बारिश अच्छी होने से देश के प्रमुख फसल उत्पादन करने वाले राज्यों में फसलों की बुआई बढ़ी है। इसका असर धान और सोयाबीन के रकबे में बढ़ोतरी के रूप में दिख रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 8 सितंबर तक धान का रकबा 2.7 फीसदी यानी 4.03 करोड़ हेक्टेअर बढ़ गया है। इसी तरह सोयाबीन का रकबा करीब 1.3 फीसदी यानी 1.25 करोड़ हेक्टेअर बढ़ा है।
अच्छी बात यह है कि पंजाब और हरियाणा जो कि उत्तर भारत के प्रमुख धान उत्पादक राज्य है। वहां पर इस बारिश पानी की जरूरत पूरी हो गई है। इसके अलावा सितंबर में बेहतर बारिश से पूर्वी भारत के राज्यों में धान की बुआई बढ़ने की उम्मीद है।
चुनावी दौर में सरकार एक्स्ट्रा अलर्ट
खाने-पीने की चीजों के दाम लगातार बढ़ने को देखते हुए सरकार ने अधिकांश खाद्य पदार्थों के कारोबार को रेग्युलेट कर दिया है। उसने चावल और गेहूं के निर्यात पर सख्ती कर दी। इसी तरह, दालों के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी है और अरहर एवं उड़द दाल पर स्टॉक लिमिट लगाने के साथ मसूर दाल के स्टॉक की मॉनिटरिंग बढ़ा दी है। लेकिन जिस तरह मौसम अनुकूल हुआ है, उसे देखते हुए जब खरीफ की नई फसलें बाजार में आएंगी। तो महंगाई में कमी आएगी ।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पूरे साल के लिए 2023-24 के लिए रिटेल महंगाई दर 5.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। जो कि उसके सामान्य मानक जैसा है।
