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नॉमिनी नहीं है तो मौत के बाद बैंक में जमा पैसों पर किसका हक होगा?

जब किसी बैंक खाते पर अस्थायी रूप से लेनदेन रोक दिया जाता है तो उसे अकाउंट फ्रीज कहा जाता है। इस दौरान खाते में पैसा मौजूद रहता है, लेकिन आप उसे निकाल या ट्रांसफर नहीं कर सकते हैं।

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Bank Nominee

आज के समय में लगभग हर व्यक्ति का किसी न किसी बैंक में खाता जरूर होता है। अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखने के लिए लोग बैंकों पर भरोसा करते हैं। अक्सर बैंक खाता (Bank Account) खोलते समय या बाद में ग्राहकों को 'नॉमिनी' (Nominee) दर्ज कराने की सलाह दी जाती है। नॉमिनी यानी वह व्यक्ति, जिसे खाताधारक की मृत्यु के बाद बैंक में जमा राशि सौंप दी जाती है। लेकिन हमारे देश में आज भी लाखों ऐसे बैंक खाते हैं, जिनमें कोई नॉमिनी रजिस्टर्ड नहीं है। कई बार लोग आलस में या जानकारी के अभाव में नॉमिनी का कॉलम खाली छोड़ देते हैं। ऐसे में एक बड़ा और गंभीर सवाल उठता है कि अगर किसी खाताधारक की अचानक मृत्यु हो जाए और उसके खाते में कोई नॉमिनी न हो, तो बैंक में जमा पैसों पर किसका हक होगा? क्या वह पैसा परिवार को आसानी से मिल जाता है या वह बैंक के पास ही रह जाता है?

नॉमिनी नहीं है तो किसे मिलेगा पैसा?

इस स्थिति में सबसे पहला नियम यह है कि नॉमिनी न होने पर खाताधारक के पैसों पर उसके कानूनी वारिसों (Legal Heirs) का हक होता है। हालांकि, नॉमिनी होने पर बैंक जितनी आसानी से पैसा ट्रांसफर कर देता है, नॉमिनी न होने पर प्रक्रिया उतनी ही जटिल और लंबी हो जाती है। अगर खाते में कोई नॉमिनी नहीं है, तो बैंक अपनी मर्जी से परिवार के किसी भी सदस्य को पैसा नहीं सौंप सकता। इसके लिए बैंक को पुख्ता कानूनी सबूतों की जरूरत होती है, ताकि भविष्य में परिवार के ही किसी दूसरे सदस्य के बीच पैसों को लेकर कोई विवाद न खड़ा हो।

बिना नॉमिनी वाले खाते से पैसा निकालने की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि खाते में कुल कितनी रकम जमा है। यदि बैंक खाते में जमा राशि बहुत बड़ी नहीं है (हर बैंक की अपनी एक तय सीमा होती है, जैसे 2 लाख या 5 लाख तक), तो बैंक एक सरलीकृत प्रक्रिया अपनाता है। इसके तहत मृतक के कानूनी वारिसों को बैंक जाकर कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं। इन दस्तावेजों में खाताधारक का मृत्यु प्रमाणपत्र, सभी कानूनी वारिसों के पहचान पत्र, एक इंडेम्निटी बॉन्ड और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) शामिल होते हैं। यदि परिवार के सभी सदस्य इस बात पर सहमत हैं कि पैसा किसी एक सदस्य (जैसे मृतक की पत्नी या बड़े बेटे) को दे दिया जाए, तो बाकी सदस्यों को अपनी एनओसी देनी होती है। इसके बाद बैंक आंतरिक वेरिफिकेशन करके पैसा ट्रांसफर कर देता है।

अगर ज्यादा पैसे जमा हैं तो किसे और कैसे मिलेगा?

लेकिन, यदि बैंक खाते या लॉकर में जमा रकम बहुत बड़ी है, तो बैंक बिना उत्तराधिकार प्रमाणपत्र (Succession Certificate) या कोर्ट के आदेश के पैसा जारी नहीं करता। उत्तराधिकार प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए कानूनी वारिसों को सक्षम जिला अदालत (District Court) में एक याचिका दायर करनी होती है। अदालत में यह साबित करना होता है कि याचिकाकर्ता ही मृतक का असली और कानूनी उत्तराधिकारी है। इसके लिए अदालत अखबारों में नोटिस जारी करती है ताकि यदि किसी और को इस संपत्ति पर आपत्ति हो तो वह सामने आ सके। यदि कोई आपत्ति नहीं आती है, तो कोर्ट उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी कर देता है। इस पूरी कानूनी प्रक्रिया में कई महीनों का समय लग सकता है और अदालती खर्च भी उठाना पड़ता है।

वसीयत बनी है तो क्या है नियम?

अगर मृतक व्यक्ति ने अपनी मृत्यु से पहले कोई वसीयत (Will) बनाई थी, तो प्रक्रिया थोड़ी आसान हो सकती है। वसीयत के आधार पर जिस व्यक्ति को संपत्ति का हकदार बनाया गया है, वह बैंक में वसीयत की कॉपी और 'प्रोबेट' (Probate - कोर्ट द्वारा प्रमाणित वसीयत) पेश करके पैसों पर दावा कर सकता है। ईसाई या मुस्लिम पर्सनल लॉ के मामलों में भी उत्तराधिकार के नियम उनके धार्मिक कानूनों के अनुसार तय होते हैं, और बैंक उसी के आधार पर दावों का निपटारा करता है। यदि खाताधारक की मृत्यु के बाद कोई भी कानूनी वारिस पैसों पर दावा करने नहीं आता है, तो वह राशि सालों तक बैंक के पास अनक्लेम्ड डिपॉजिट (Unclaimed Deposit) के रूप में पड़ी रहती है और बाद में आरबीआई के फंड में ट्रांसफर कर दी जाती है।

इस पूरी कानूनी उलझन और परेशानी से बचने का एकमात्र और सबसे सरल उपाय यही है कि अपने बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस पॉलिसियों में नॉमिनी का नाम जरूर दर्ज करवाएं। नॉमिनी का नाम दर्ज होने से खाताधारक की मृत्यु के बाद परिवार को आर्थिक संकट के समय पैसों के लिए अदालतों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। अगर आपने अभी तक अपने खाते में नॉमिनी नहीं जोड़ा है, तो आज ही नेट बैंकिंग या अपनी बैंक शाखा में जाकर एक साधारण फॉर्म भरकर नॉमिनी का नाम अपडेट करवा लें, ताकि आपके बाद आपका परिवार सुरक्षित रह सके।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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