बिजनेस

Flipkart से देसी आउट,अब भारत की धरती पर भिड़ंगे दो अमेरिकी अरबपति,जानें किसे फायदा

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Aug 1, 2023, 04:03 PM IST

Flipkart Founder Binny Bansal Sells Entire Stake From The Company: वॉलमार्ट दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी है। और उसका मालिकाना हक दुनिया के सबसे रईस बिजनेस परिवार वॉल्टन खानदान के पास है। जिनके पास 247 अरब डॉलर की दौलत है। भारतीय बाजार में वॉलमार्ट का बढ़ता दखल उस रणनीति का हिस्सा है जो उसने 2018 में फ्लिपकार्ट में 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के साथ शुरू किया था।

Image

FLIPKART

Flipkart Founder Binny Bansal Sells Entire Stake From The Company:भारत में ई-कॉमर्स क्रांति की पहचान बनी Flipkart से उसके फाउंडर या यू कहें कंपनी के जन्मदाता आउट हो गए हैं। साल 2007 में आईआईटी के दो छात्रों सचिन बंसल और बिन्नी बंसल द्वारा शुरू की गई कंपनी से उनका नाता पूरी तरह खत्म हो गया है। असल में कंपनी के को-फाउंडर बिन्नी बंसल (Binny Bansal) ने अपनी बची हिस्सेदारी बेच दी है। इसके पहले 2018 में बिन्नी के साथी और दूसरे फाउंडर सचिन ने अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी। बिन्नी के फ्लिपकार्ट से निकलने के बाद अब भारतीयों द्वारा शुरू की गई कंपनी से सारे देसी फाउंडर आउट हो गए हैं।

अमेरिकी निवेशक मालिक

सिंगापुर में रेलुगेटरी फाइलिंग के अनुसार, नए बदलावों के बाद फ्लिपकार्ट (Flipkart) में अमेरिकी रिटेल दिग्गज वॉलमार्ट (Walmart) की करीब 80 फीसदी तक हिस्सेदारी तक हो जाएगी। Tracxn के ताजा आंकड़ों से पता चला कि वॉलमार्ट की अब फ्लिपकार्ट में 80.5 फीसदी हिस्सेदारी है। वॉलमार्ट ने साल 2018 में करीब 16 अरब डॉलर (आज के रेट पर 1.31 लाख करोड़ रु) के निवेश से फ्लिपकार्ट की 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली थी। उस वक्त सचिन बंसल और बिन्नी बंसल की कंपनी में करीब 15 फीसदी हिस्सेदारी थी। और अमेरिकी इंवेस्टमेंट फर्म टाइगर ग्लोबल 26 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ी निवेशक थी। लेकिन 2018 के बाद से अब वॉलमार्ट के पास मालिकाना हक है।

भारत में भिड़ेंगे दो अमेरिकी अरबपति

वॉलमार्ट दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल कंपनी है। और उसका मालिकाना हक दुनिया के सबसे रईस बिजनेस परिवार वॉल्टन खानदान के पास है। जिनके पास 247 अरब डॉलर की दौलत है। भारतीय बाजार में वॉलमार्ट का बढ़ता दखल उस रणनीति का हिस्सा है जो उसने 2018 में फ्लिपकार्ट में 77 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के साथ शुरू किया था। असल में वॉलमार्ट फ्लिपकार्ट के जरिए भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में अपनी दबदबा बनाना चाहती है। जहां उसकी टक्कर दुनिया के तीसरे सबसे रईस अमेरिकी अरबपति जेफ बेजोस से होगी। जेफ बेजोस अमेजन के फाउंडर हैं। और अब भारत के ई-कॉमर्स बाजार में अमेजन और फ्लिपकार्ट ही सबसे बड़े दिग्गज बचे हैं। जिन्हें फिलहाल टक्कर देने वाला कोई नहीं है। और ये दोनों ही आपस में टक्कर लेते हुए नजर आएंगे।

अब मुकेश अंबानी से उम्मीद

अमेजन और फ्लिपकार्ट की इस समय भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में 60 फीसदी हिस्सेदारी है। और जिस तरह इन दोनों कंपनियों के पास पैसा है, ऐसे में भारत में उन्हें केवल मुकेश अंबानी ही टक्कर देते दिखाई दे रहे हैं। अंबानी Ajio के जरिए ई-कॉमर्स बाजार में उतर चुके हैं। और वह बहुत तेजी से टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपनी पैठ बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2022 में 72 अरब डॉलर का ई-कॉमर्स 2025 तक 133 अरब डॉलर का हो जाएगा। और उसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों की अहम भूमिका होगी। ऐसे में मुकेश अंबानी देसी परचम लहरा सकते हैं। हालांकि ये लड़ाई बेहद दिलचस्प होने वाली है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

और पढ़ें
End of Article