FSSAI 100 Percent Claim Ban : एफएमसीजी (FMCG) क्षेत्र की प्रमुख कंपनी डाबर इंडिया ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उस सख्त निर्देश को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है, जिसमें कंपनी को अपने कई लोकप्रिय उत्पादों को '100 प्रतिशत' (100%) के दावों के साथ बेचने से रोक दिया गया है। FSSAI ने डाबर के शहद, देसी घी, नारियल तेल, सेब के सिरके, तिल के तेल, नारियल पानी और नारियल दूध जैसे उत्पादों पर '100% शुद्ध' या इसी तरह के दावे करने पर रोक लगा दी थी।
कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग
डाबर इंडिया की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के सामने इस मामले को तत्काल सूचीबद्ध (लिस्ट) करने का अनुरोध किया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस याचिका पर शुक्रवार (7 जुलाई 2026) को न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के समक्ष सुनवाई तय की है।
FSSAI ने बताया था भ्रामक और गैर-कानूनी
दरअसल, खाद्य नियामक FSSAI ने सोमवार को सोशल मीडिया के जरिए जानकारी दी थी कि उसने डाबर इंडिया लिमिटेड को '100 प्रतिशत' जैसे दावों के साथ अपने प्रोडक्ट बेचने से रोकने का आदेश जारी किया है। नियामक का तर्क था कि '100 प्रतिशत' के दावे खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हैं। FSSAI के अनुसार, ये दावे अस्पष्ट हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से साबित या सत्यापित नहीं किया जा सकता और ये आम उपभोक्ताओं को गुमराह करने का काम करते हैं। इसके साथ ही नियामक ने डाबर को ऐसे सभी उत्पादों की बिक्री तुरंत प्रभाव से रोकने और 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) जमा करने का निर्देश दिया था।
डाबर ने कहा- नहीं मिला सुनवाई का मौका
FSSAI के इस कठोर रुख के खिलाफ डाबर ने अदालत में अपनी याचिका दाखिल की है। कंपनी का कहना है कि खाद्य नियामक का यह आदेश प्राकृतिक न्याय के मूल सिद्धांतों और वैधानिक प्रावधानों का सीधा उल्लंघन करता है। डाबर का तर्क है कि इतना बड़ा प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने से पहले FSSAI ने उसे न तो कोई कारण बताओ (Show Cause) नोटिस दिया और न ही अपना पक्ष रखने का कोई अवसर प्रदान किया।
कंपनी का दावा: नियामक के पास नहीं ऐसा अधिकार
कंपनी ने अपनी याचिका में यह भी मुद्दा उठाया है कि FSSAI के पास बिना पूरी जांच-पड़ताल और प्रक्रिया का पालन किए इस तरह का व्यापक और प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने का कानूनी अधिकार नहीं है। डाबर के मुताबिक, यह आदेश अस्पष्ट, गैर-युक्तिसंगत और बिना पर्याप्त सोच-विचार के जल्दबाजी में पारित किया गया है। अब शुक्रवार को होने वाली सुनवाई पर पूरे बाजार और उपभोक्ताओं की नजरें टिकी हुई हैं कि अदालत FSSAI के बैन पर रोक लगाती है या डाबर को अपने विज्ञापनों में बदलाव करना पड़ेगा।
