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भारत जैसे देश में जहां पेट्रोल की कीमत करीब 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास है, वहां फ्यूल इकॉनमी (माइलेज) किसी भी वाहन की लोकप्रियता तय करने में बड़ा रोल निभाती है। इसके बावजूद, स्कूटरों की मांग लगातार बढ़ रही है, चाहे वे नियमित ऑफिस जाने वाले लोग हों, महिलाएं, डिलीवरी पार्टनर हों या छोटे व्यापारी, लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्कूटरें आमतौर पर मोटरसाइकिलों की तुलना में कम माइलेज देती हैं? आइए जानते हैं इसके पीछे के मुख्य कारण...
अधिकांश स्कूटरों में CVT (Continuously Variable Transmission) सिस्टम होता है। यह गियरबॉक्स अपने आप गियर बदलता है और इंजन को ज्यादातर समय ऊंचे RPM (Revolutions Per Minute) पर चलाता है। ऊंचे RPM पर इंजन ज्यादा फ्यूल खर्च करता है, जिससे माइलेज कम हो जाता है। वहीं, मोटरसाइकिलों में मैनुअल गियर सिस्टम होता है, जहां राइडर अपनी मर्जी से गियर बदल सकता है और कम RPM पर गियर अपशिफ्ट करके बेहतर माइलेज निकाल सकता है।
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स्कूटरों में आमतौर पर छोटा फ्यूल टैंक दिया जाता है (5-6 लीटर तक), जबकि मोटरसाइकिलों में 10-15 लीटर तक का टैंक होता है। छोटे टैंक की वजह से स्कूटरें कम दूरी तय कर पाती हैं, जिससे बार-बार रीफ्यूलिंग की जरूरत पड़ती है। दूसरी ओर, मोटरसाइकिलें एक बार टैंक फुल कराने पर लंबी दूरी तय कर सकती हैं, जिससे वे कुल मिलाकर ज्यादा फ्यूल एफिशिएंट लगती हैं।
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माइलेज सिर्फ मशीन पर नहीं, बल्कि राइडर की ड्राइविंग स्टाइल पर भी निर्भर करता है। मोटरसाइकिल में कुशल राइडर सही गियर और स्पीड पर इंजन को ऑप्टिमम लेवल पर रख सकता है, जिससे फ्यूल की बचत होती है, जबकि स्कूटरों में ऑटोमैटिक CVT गियरबॉक्स राइडर को यह नियंत्रण नहीं देता, और अक्सर ट्रैफिक में बार-बार स्टार्ट-स्टॉप की स्थिति बनती है, जिससे फ्यूल ज्यादा खर्च होता है।
अब कुल मिलाकर कहें तो स्कूटर्स अपनी सुविधा, आसान हैंडलिंग और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के लिए जानी जाती हैं, लेकिन ये सुविधाएं माइलेज की कीमत पर आती हैं।