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Saptdhara Vision: क्या है विकसित भारत की 7 सूत्रीय ‘सप्तधारा’? जिसका PM मोदी ने लाल किले से लिया संकल्प

Saptdhara Vision: स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से ‘शक्ति की सप्तधारा’ का विजन पेश किया। इस सात सूत्रीय रोडमैप में मैन्युफैक्चरिंग, कृषि एवं फूड प्रोसेसिंग, तकनीक एवं नवाचार, गतिशक्ति, रक्षा शक्ति, हरित एवं नीली अर्थव्यवस्था और सॉफ्ट पावर को शामिल किया गया है। आइए इस सात सप्तधारा (Saptdhara) सूत्रीय रोडमैप को विस्तार से समझते हैं।

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Saptdhara Vision: मैन्युफैक्चरिंग से सॉफ्ट पावर तक, 2047 के भारत के लिए PM मोदी का ‘सप्तधारा’ मंत्र। AI IMAGE
Authored by: Piyush Kumar
Updated Aug 15, 2026, 08:56 IST
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"मैं आज उस युग को भी याद करना चाहूंगा जब भारत के सामर्थ्य को सप्तसिंधु के रूप में हम जानते थे, समझते थे, सुनते थे। अब विकसित भारत बनाने के लिए हमें नई धारा चाहिए।" स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 'सप्तधारा' का जिक्र किया है।

इस सात सप्तधारा (Saptdhara Vision) सूत्रीय रोडमैप में मैन्युफैक्चरिंग से लेकर कृषि, टेक्नोलॉजी, डिफेंस, ग्रीन-ब्लू इकोनॉमी और भारत की सॉफ्ट पावर तक को शामिल किया गया है। इसका व्यापक लक्ष्य भारत को तेज विकास की राह पर आगे ले जाना और 2047 तक विकसित भारत के सपने को साकार करना है।

पीएम मोदी ने शक्ति की सप्तधारा का आव्हान किया है। प्रधानमंत्री ने सात शक्तियों का जिक्र किया।

  • मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर
  • फूड प्रोसेसिंग
  • तकनीक
  • गतिशक्ति
  • रक्षा शक्ति
  • ग्रीन इकोनॉमी
  • सॉफ्ट पावर

आइए सिलसिलेवार तरीके से इन सभी सात शक्तियों को समझते हैं।

क्या है ‘शक्ति की सप्तधारा’?

प्रधानमंत्री मोदी के विजन की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ एक सेक्टर पर फोकस नहीं है। सरकार ने अर्थव्यवस्था, खेती, टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा, पर्यावरण और संस्कृति—इन सभी को भारत की भविष्य की ताकत के तौर पर पेश किया है।

1. मैन्युफैक्चरिंग: दुनिया के लिए भारत में निर्माण

‘सप्तधारा’ का पहला फोकस मैन्युफैक्चरिंग पर है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को उत्पादन के मामले में लागत, गुणवत्ता और बड़े पैमाने यानी cost, quality और scale के मोर्चे पर इतना प्रतिस्पर्धी बनना होगा कि भारतीय उत्पाद वैश्विक मानकों पर खरे उतरें।

यानी लक्ष्य सिर्फ भारत के लिए सामान बनाना नहीं, बल्कि भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में मजबूत करना है।

2. कृषि और फूड प्रोसेसिंग: खेत से ग्लोबल ब्रांड तक

दूसरी धारा कृषि और फूड प्रोसेसिंग है। पीएम मोदी का जोर कृषि उत्पादों को सिर्फ कच्चे माल के तौर पर बेचने के बजाय उनमें वैल्यू एडिशन करने और उन्हें वैश्विक ब्रांड बनाने पर है।

इसका मतलब है कि किसान की उपज की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के जरिए उसे घरेलू बाजार के साथ-साथ दुनिया के बाजारों तक पहुंचाया जाए।

3. टेक्नोलॉजी और इनोवेशन: डिजिटल ताकत बनेगी आधार

तीसरा फोकस प्रौद्योगिकी और नवाचार पर है। इसमें डिजिटल और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने की बात कही गई है।

आज की अर्थव्यवस्था में AI, सेमीकंडक्टर, डिजिटल सिस्टम और कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी रणनीतिक ताकत बन चुके हैं। ऐसे में भारत की कोशिश टेक्नोलॉजी का सिर्फ इस्तेमाल करने वाले देश की जगह टेक्नोलॉजी विकसित करने और उसका निर्यात करने वाले देश के रूप में अपनी भूमिका मजबूत करने की है।

4. गति शक्ति: कनेक्टिविटी जितनी तेज, विकास उतना तेज

चौथी धारा है गति शक्ति। इसका फोकस तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी पर है।

सड़क, रेल, बंदरगाह, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के बीच बेहतर तालमेल से माल और लोगों की आवाजाही आसान हो सकती है। इसका सीधा असर कारोबार की लागत और देश की आर्थिक रफ्तार पर पड़ता है। प्रधानमंत्री ने इसीलिए तेज औरनिर्बाध संपर्क व्यवस्था को विकास की अहम जरूरत बताया।

5. रक्षा शक्ति: अगली पीढ़ी की तकनीक पर जोर

पांचवीं धारा रक्षा शक्ति है। इसमें भविष्य की रक्षा तकनीक पर जोर दिया गया है।

ड्रोन और सुपरसोनिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में क्षमता विकसित करना भारत की सुरक्षा के साथ-साथ डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को भी मजबूत कर सकता है। इसका मकसद भारत को आधुनिक रक्षा तकनीक के मामले में ज्यादा आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना है।

6. ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी: पर्यावरण से आर्थिक अवसर तक

छठी धारा हरित और नीली अर्थव्यवस्था है। पीएम मोदी ने भारत के पास मौजूद विशाल संसाधनों को इस क्षेत्र की ताकत बताया।

ग्रीन इकोनॉमी में स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण-अनुकूल विकास, जबकि ब्लू इकोनॉमी में समुद्र और समुद्री संसाधनों से जुड़े आर्थिक अवसर शामिल होते हैं। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र रोजगार, ऊर्जा और निर्यात के नए अवसर पैदा करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

7. सॉफ्ट पावर: योग से पर्यटन तक दुनिया में भारत की पहचान

सप्तधारा की सातवीं और अलग तरह की कड़ी है भारत की सॉफ्ट पावर। पीएम मोदी ने योग, आयुर्वेद, समग्र स्वास्थ्य, रचनात्मक संसाधन और पर्यटन जैसे क्षेत्रों को भारत की वैश्विक पहचान से जोड़ा। इसका मतलब है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को सिर्फ पहचान तक सीमित न रखते हुए उन्हें वैश्विक प्रभाव और आर्थिक अवसर में बदला जाए।

आखिर क्यों महत्वपूर्ण है ‘सप्तधारा’?

अगर इसे आसान भाषा में समझें तो प्रधानमंत्री का संदेश है कि विकसित भारत बनाने के लिए अर्थव्यवस्था के हर बड़े इंजन को एक साथ गति देनी होगी।

  • मैन्युफैक्चरिंग से उत्पादन और रोजगार
  • कृषि और खाद्य प्रसंस्करण से किसानों की आय और निर्यात
  • तकनीक से नवाचार और डिजिटल ताकत
  • गतिशक्ति से बेहतर बुनियादी ढांचा और संपर्क व्यवस्था
  • रक्षा शक्ति से रणनीतिक आत्मनिर्भरता
  • हरित और नीली अर्थव्यवस्था से टिकाऊ विकास
  • सॉफ्ट पावर से दुनिया में भारत का प्रभाव

यानी ‘सप्तधारा’ को एक ऐसे 7-पॉइंट विकास मॉडल के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें भारत की आर्थिक, तकनीकी, रणनीतिक और सांस्कृतिक ताकतों को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश है। प्रधानमंत्री ने इसी व्यापक विकास दृष्टि को 2047 के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से जोड़ा है।

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