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तेज रफ्तार से टकराए वैगन और पैसेंजर ट्रेन के कोच, तेज आवाज से गूंजा इलाका; क्रैश टेस्ट का आया वीडियो

आरडीएसओ ने बताया कि पैसेंजर ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे के रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (RSDO) ने ऑटोमेटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर एक क्रैश टेस्ट किया, जिसमें कोच सुरक्षित रहे।

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लखनऊ में ट्रेन कोच और वैगन की टक्कर (फोटो-@RDSOLucknow)

लखनऊ : भारतीय रेलवे ने लगातार सुरक्षित सफर के लिए कवायतें कर रहा है। खासकर, यात्री ट्रेनों को दुर्घटना से बचाने के लिए नई तकनीक विकसित कर रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को यात्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रेलवे अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO), लखनऊ और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI), पुणे ने संयुक्त रूप से LHB (लिंके-हॉफमैन-बुश) कोच का पहला फुल-स्केल क्रैशवर्थीनेस टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह टेस्ट इंटरनेशनल सिक्योरिटी स्टैंडर्ड EN 15227 के अनुरूप किया गया, जिसमें LHB कोच सभी प्रमुख सुरक्षा मानकों पर खरा उतरा।

परीक्षण 24 जून को लखनऊ स्थित विशेष क्रैश टेस्ट सुविधा में किया गया। इसमें एक LSLRD और एक LWSPP कोच को लगभग 43-44 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से नियंत्रित टक्कर कराई गई। इस दौरान कोचों में लगे सैकड़ों सेंसर और हाई-स्पीड कैमरों ने टक्कर के समय संरचना में आए बदलाव, ऊर्जा अवशोषण क्षमता और यात्रियों के लिए सुरक्षित स्थान (Survival Space) की विस्तृत रिकॉर्डिंग की।

सुरक्षित रेलवे कोच विकसित करने होगा प्रयोग

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस परीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि दुर्घटना की स्थिति में कोच की संरचना यात्रियों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त मजबूत बनी रहे और टक्कर के प्रभाव को अधिकतम सीमा तक अवशोषित कर सके। परीक्षण से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग भविष्य में और अधिक सुरक्षित रेलवे कोच विकसित करने में किया जाएगा।

भारतीय रेलवे पहले से ही अधिकांश प्रीमियम और लंबी दूरी की ट्रेनों में LHB कोच का उपयोग कर रही है। ये कोच एंटी-टेलीस्कोपिक डिजाइन, बेहतर ब्रेकिंग सिस्टम और अधिक स्थिरता जैसी विशेषताओं के कारण पारंपरिक ICF कोच की तुलना में अधिक सुरक्षित माने जाते हैं।

रेल मंत्रालय का मानना है कि EN 15227 मानक के अनुरूप सफल परीक्षण भारतीय रेलवे की सुरक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे भविष्य में यात्रियों को और अधिक सुरक्षित रेल यात्रा का अनुभव मिलेगा।

इस परीक्षण से प्राप्त निष्कर्ष भविष्य में भारतीय रेलवे के कोचों के डिजाइन को और अधिक सुरक्षित और उन्नत बनाने में मदद करेंगे। साथ ही, इन आंकड़ों के आधार पर यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और भारतीय रेलवे के लिए अधिक सुरक्षित रोलिंग स्टॉक विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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