80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी दिल्ली स्थित लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। देश को विकसित भारत बनाने की दिशा में 'शक्ति की सप्तधारा' का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने भारतीय रेलवे के कायाकल्प, विद्युतीकरण की अभूतपूर्व गति और पर्यावरण अनुकूल 'ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन' का विशेष रूप से जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के ट्रैक रिकॉर्ड ने न केवल आयातित डीजल पर भारत की निर्भरता कम की है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूत आधार दिया है।
"90 साल बनाम 10 साल": रेल इलेक्ट्रिफिकेशन में भारत ने रचा इतिहास
पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान देश के सामने भारतीय रेलवे के विद्युतीकरण के आंकड़े रखे। उन्होंने कहा कि भारत में रेलवे विद्युतीकरण की शुरुआत 1925 में हुई थी, लेकिन अगले 90 वर्षों (2014 तक) में कुल नेटवर्क का केवल 30 प्रतिशत हिस्सा ही इलेक्ट्रिक लाइन में बदला जा सका था। प्रधानमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने बीते 10 वर्षों में बाकी बचे 70 प्रतिशत नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा कर दिखाया। पीएम मोदी ने कहा, "हमने महज एक दशक में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। 90 वर्षों में 30 प्रतिशत और 10 वर्षों में 70 प्रतिशत, यह काम करने की वास्तविक गति है।" इलेक्ट्रिफिकेशन के पूरा होने से भारत को हर साल अरबों रुपये के डीजल आयात को बचाने में मदद मिली है और कार्बन उत्सर्जन में भी भारी कमी आई है।
ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन: दुनिया में भारत ने लहराया परचम
रेलवे के हरित भविष्य (Green Railways) की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने हाइड्रोजन से चलने वाली देश की पहली स्वदेशी ट्रेन का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है जो ग्रीन हाइड्रोजन से ट्रेनें संचालित कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि खास बात यह है कि यह दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक है। भारत ने विश्व पटल पर हाइड्रोजन ट्रेनों के क्षेत्र में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है।
जींद-सोनीपत रूट पर दौड़ रही पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन
उल्लेखनीय है कि भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई 2026 को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यह ट्रेन हरियाणा में उत्तर रेलवे (Northern Railways) के 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत खंड पर सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। इस तकनीक से रेल क्षेत्र में बिना किसी प्रदूषण के ट्रेन संचालन का एक नया अध्याय शुरू हुआ है।
