Delhi Launches First Hydrogen Bus: दिल्ली में पेट्रोल, डीजल और CNG की बढ़ती कीमतों के बीच वैकल्पिक ईंधन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच Delhi Metro Rail Corporation (DMRC) ने सेंट्रल विस्टा इलाके में हाइड्रोजन से चलने वाली शटल बस सेवा शुरू की है। DMRC ने आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ मिलकर यह पहल शुरू की है।

First Hydrogen Bus (X handle/@OfficialDMRC)
दो हाइड्रोजन बसों को सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से यात्री सेवा के लिए रवाना किया गया। ऐसे समय में जब दिल्ली में CNG की कीमत बढ़कर 79.09 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है, सवाल यह कि क्या हाइड्रोजन भविष्य में CNG का बेहतर विकल्प बन सकता है।
CNG की भी बढ़ रही कीमतें
पिछले कुछ वर्षों में CNG को पेट्रोल और डीजल के मुकाबले सस्ता और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प माना जाता रहा है। टैक्सी, ऑटो और निजी कार मालिक बड़ी संख्या में CNG वाहनों की तरफ शिफ्ट हुए थे। लेकिन अब लगातार बढ़ती कीमतों के कारण CNG का खर्च भी धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। सरकार और कंपनियां अब हाइड्रोजन जैसी नई तकनीकों पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
हाइड्रोजन भविष्य का क्लीन एनर्जी विकल्प
हाइड्रोजन फ्यूल को भविष्य का क्लीन एनर्जी विकल्प माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे चलने वाले वाहनों से धुएं की जगह केवल पानी की भाप निकलती है। यानी यह पारंपरिक ईंधन के मुकाबले प्रदूषण काफी कम कर सकता है। दिल्ली जैसे शहर, जहां वायु प्रदूषण बड़ी समस्या है, वहां यह तकनीक काफी अहम साबित हो सकती है।
बसें लंबी दूरी तय करने में भी सक्षम
हाइड्रोजन बसें लंबी दूरी तय करने में भी सक्षम होती हैं और इन्हें रिफ्यूल करने में ज्यादा समय नहीं लगता। यही वजह है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में इसे एक संभावित गेमचेंजर माना जा रहा है। अगर आने वाले वर्षों में हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होता है, तो यह CNG बसों और डीजल बसों की जगह भी ले सकता है।
हालांकि अभी हाइड्रोजन तकनीक शुरुआती दौर में है। इसकी सबसे बड़ी चुनौती लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर है। हाइड्रोजन उत्पादन, स्टोरेज और रिफ्यूलिंग स्टेशन तैयार करना काफी महंगा माना जाता है। दूसरी तरफ CNG का नेटवर्क पहले से काफी विकसित है और देश के कई शहरों में आसानी से उपलब्ध है। इसलिए फिलहाल आम लोगों के लिए CNG ज्यादा व्यावहारिक विकल्प बना हुआ है।
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन की दिशा में भारत के कदम
लेकिन लंबे समय की बात करें, तो हाइड्रोजन तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है। दुनियाभर में कई देश हाइड्रोजन मोबिलिटी पर निवेश कर रहे हैं। भारत भी ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के जरिए इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है। आने वाले समय में अगर उत्पादन लागत कम होती है और ज्यादा स्टेशन बनते हैं, तो हाइड्रोजन वाहन आम लोगों तक भी पहुंच सकते हैं।
दिल्ली में शुरू हुई हाइड्रोजन बस सेवा को इसी बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। यह केवल नई बस सेवा नहीं, बल्कि भविष्य की ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी का ट्रायल भी है। अगर यह मॉडल सफल होता है, तो आने वाले वर्षों में देश के दूसरे शहरों में भी ऐसी सेवाएं शुरू हो सकती हैं।
