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Car, Bike, Cab या Metro! Petrol महंगा होने के बाद क्या पड़ रहा सस्ता

पेट्रोल की कीमतों ने एक बार फिर आम आदमी के मंथली बजट को हिला कर रख दिया है। ऐसे में हर कामकाजी इंसान के मन में एक ही सवाल है कि ट्रैवल के लिए सबसे सस्ता विकल्प क्या है।

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Petrol Price Hike (Photo: AI Generated Image)

Car vs Bike vs Metro vs Cab: दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर पहुंच चुकी है। ऐसे में रोज ऑफिस आने-जाने वाले लाखों लोगों के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर अब सफर के लिए सबसे सस्ता विकल्प कौन-सा है। क्या खुद की कार-बाइक चलाना सही रहेगा, या फिर मेट्रो और कैब ज्यादा फायदेमंद साबित होंगी? बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच यह तुलना नौकरीपेशा लोगों के लिए काफी अहम हो गई है। इस आर्टिकल में आपको यही बताने जा रहे हैं कि पेट्रोल के रेट्स बढ़ने के बाद Car, Bike Cab या Metro क्या लेना सही रहेगा और किसमें कितना खर्च आएगा।

कौन-सा विकल्प सबसे सस्ता

Petrol Price Hike

Petrol Price Hike (Photo: AI Generated Image)

मान लीजिए कोई व्यक्ति दिल्ली में रहता है और रोज सुबह अपने घर से ऑफिस के लिए निकलता है। उसके ऑफिस की दूरी करीब 10 से 12 किलोमीटर है। अब अगर वह अलग-अलग माध्यमों से सफर करता है, तो उसके खर्च में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है-

खुद की कार

अगर व्यक्ति अपनी खुद की कार से ऑफिस जाता है और उसकी कार लगभग 10-12 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है, तो मौजूदा पेट्रोल (Petrol) कीमत के हिसाब से कार चलाने का खर्च करीब 8-10 रुपये प्रति किलोमीटर तक पहुंच सकता है। यानी 10 से 12 किलोमीटर के सफर पर लगभग 80 से 120 रुपये तक खर्च हो सकते हैं। इसमें पार्किंग शुल्क, ट्रैफिक में लगने वाला अतिरिक्त ईंधन और कार मेंटेनेंस जैसे खर्च शामिल नहीं हैं। अगर इन्हें भी जोड़ दिया जाए, तो वास्तविक खर्च और ज्यादा बढ़ सकता है।

कैब

दूसरी तरफ, अगर वही व्यक्ति कैब बुक करता है तो खर्च काफी ज्यादा हो जाएगा। Rapido और Uber जैसी ऐप बेस्ड कैब सेवाओं से ऑफिस से घर तक (10-12 किलोमीटर) आने-जाने का किराया करीब 282 रुपये से 343 रुपये के बीच पड़ सकता है। ट्रैफिक, सर्ज प्राइसिंग और पीक आवर में यह राशि और भी बढ़ सकती है। हालांकि कैब का फायदा यह है कि व्यक्ति को ड्राइविंग की चिंता नहीं करनी पड़ती और सफर आरामदायक हो सकता है।

मेट्रो

वहीं, अगर मेट्रो की बात करें, तो यह विकल्प खर्च के मामले में सबसे संतुलित नजर आता है। 10-12 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए व्यक्ति को घर से मेट्रो स्टेशन आने और मेट्रो स्टेशन से ऑफिस तक पहुंचने के लिए ई-रिक्शा या बाइक लेनी पड़ेगी। घर से मेट्रो स्टेशन आने तक ई-रिक्शा का खर्च 15 रुपये, 7 स्टेशन का खर्च 32 रुपये और स्टेशन से ऑफिस पहुंचने का खर्च 15 रुपये से 50 रुपये मान सकते हैं। कुल मिलाकर मेट्रो से आने-जाने का खर्च लगभग 62 रुपये से 97 रुपये तक पड़ सकता है।

बाइक टैक्सी

इसके अलावा, कैब की जगह 10-12 किलोमीटर की दूरी के लिए बाइक टैक्सी भी की जा सकती है। इसका खर्च लगभग 90 रुपये से 103 रुपये तक सकता है। यह कैब से सस्ता है और ट्रैफिक में समय बचाने में भी मदद कर सकता है। हालांकि बारिश, गर्मी या लंबी दूरी में यह विकल्प हर किसी के लिए आरामदायक नहीं माना जाता।

खुद की बाइक

अगर कोई व्यक्ति अपनी बाइक से 10-12 किलोमीटर की दूरी तय करता है, तो उसका खर्च कार के मुकाबले काफी कम आता है। मान लें कि बाइक औसतन 45 से 55 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती है और पेट्रोल की कीमत 97.77 रुपये प्रति लीटर है तो 10-12 किलोमीटर सफर में लगभग 20 से 27 रुपये तक का पेट्रोल खर्च आएगा।

कौन-सा विकल्प चुनें

यात्रा का माध्यमदूरी (किलोमीटर)अनुमानित खर्च
खुद की कार10-12 किमी₹80 - ₹120
खुद की बाइक10-12 किमी₹20 - ₹27
मेट्रो10-12 किमी₹62 - ₹97
कैब (Uber/Rapido)10-12 किमी₹282 - ₹343
बाइक टैक्सी10-12 किमी₹90 - ₹103
अगर आपके पास खुद की बाइक है और ऑफिस से घर की दूरी भी अधिक नहीं है तो यह सबसे बेहतर विकल्प होगा। वहीं, अगर दूरी ज्यादा है तो आरामदायक और बिना ड्राइविंग तनाव वाले सफर के लिए खासकर दिल्ली जैसे ट्रैफिक वाले शहर में मेट्रो बेहतर विकल्प हो सकती है। हालांकि, कौन-सा विकल्प चुनना सही रहेगा, यह पूरी तरह व्यक्ति की जरूरत, बजट और रोजाना की यात्रा पर निर्भर करता है।

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Shivani Kotnala
शिवानी कोटनाला author

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने ... और देखें

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