Dragon Fruit cultivation : देश के कई इलाकों में धान, गेहूं, आलू, टमाटर और प्याज जैसी पारंपरिक फसलों की खेती तो होती है लेकिन अब कई कृषि इलाके में एक बड़े बदलाव देखने को मिल रहा है। यहां के किसान पारंपरिक खेती के ढर्रे से बाहर निकलकर आधुनिक और कैश फसलों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। अधिक आय देने वाले फलों के उत्पादन को लेकर किसानों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। इसी कड़ी में किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती की शुरुआत की है, इससे देश के कई हिस्सों में किसानों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस नई पहल से आने वाले समय में किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी और उनकी आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।
नई कृषि क्रांति
देश के कई हिस्सों में प्रगतिशील किसानों ने एक-एक एकड़ जमीन में इसके पौधे लगाए हैं। पहली बार हो रही इस अनोखी खेती को सफल बनाने के लिए जिला बागवानी विभाग भी पूरी तरह सक्रिय है। विभाग द्वारा किसानों को समय-समय पर जरूरी तकनीकी मार्गदर्शन, पौधों के रखरखाव और सुरक्षा से जुड़ी जरूरी सलाह उपलब्ध कराई जा रही है। पहली बार इस तरह की व्यावसायिक फसल की तरफ किसानों का रुख होना कृषि परिदृश्य के लिए एक बेहद सुखद संकेत माना जा रहा है।
वर्षों तक लगातार बंपर कमाई
ड्रैगन फ्रूट की खेती की लागत और मुनाफे के गणित को समझना जरूरी है। कृषि एक्सपर्ट के मुताबिक एक एकड़ जमीन में ड्रैगन फ्रूट का पूरा सेटअप तैयार करने, पोल (खंभे) लगाने और पौधे रोपने में कुल मिलाकर करीब 6 से 7 लाख रुपये का खर्च आ सकता है। हालांकि, इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगाने के बाद 20 से 25 सालों तक पौधों से लगातार फल प्राप्त कर सकते हैं यानी सालों साल तक लाखों की कमाई कर सकते हैं।
बीमारियों से बचाव में ड्रैगन फ्रूट बेहद असरदार
बाजार में ड्रैगन फ्रूट की भारी मांग और ऊंची कीमतों का मुख्य कारण इसके औषधीय गुण और स्वास्थ्य लाभ हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स अनुसार, यह फल शरीर में हीमोग्लोबिन यानी खून की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है। इसके अलावा, यह हृदय रोगों से बचाव, पाचन तंत्र को दुरुस्त कर कब्ज से राहत दिलाने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत करने में बेहद फायदेमंद माना जाता है। मोटापा कम करने, शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी यह फ्रूट बेहद लाभदायक है। इन तमाम फायदों के कारण बाजारों में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे किसानों को इसका बेहतरीन दाम मिलता है।
